1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का प्रदर्शन

बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लाम बढ़ रहा है. बांग्लादेश का इस्लामी संगठन हिफाजत ए इस्लाम अपने लाखों समर्थकों को सड़क पर ला रहा है और हिंसक तरीके से मांग कर रहा है.

प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के पीछे अब तक शायद ही खुलकर सामने आया इस्लामी संगठन हिफाजत ए इस्लाम है. इसका नेतृत्व मुस्लिम विचारक शाह अहमद शफी कर रहे हैं. उनका कहना है कि हिफाजत गैर राजनीतिक संगठन है. वह सिर्फ यह चाहता है कि इस्लाम को कमतर न किया जाए. यह संगठन हिंसक प्रदर्शनों के जरिए कट्टरपंथी मांगों वाला 13 सूत्री कार्यक्रम मनवाना चाहता है. उनमें ऐसी बातें भी शामिल हैं जिन्हें बांग्लादेश में जर्मन राजदूत अलब्रेष्ट कोंत्से "चरमपंथी" मानते हैं. हिफाजत ईशनिंदा के लिए कठोर कानून बनाने, तथाकथित नास्तिक ब्लॉगरों के लिए मौत की सजा और महिलाओं और पुरुषों को अलग अलग रखने की मांग कर रहा है. संगठन इस्लाम के लिए खास सुरक्षा और संविधान में अल्लाह का उल्लेख फिर से करने पर जोर दे रहा है. हिफाजत का कहना है कि औरतों को अपने घर से बाहर कोई काम करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए.

अफगान कनेक्शन

बांग्लादेश के इस्लाम फाउंडेशन के डायरेक्टर शमीम मोहम्मद अफजाल कहते हैं कि इस तरह की मांगें देश के उदारवादी संविधान के अनुरूप नहीं हैं, "13 मांगों में कुछ ऐसी हैं जो इस्लामी शिक्षा पर आधारित हैं, लेकिन जिस तरह से उसकी व्याख्या की गई है, वह गलत है. इसके अलावा इस्लाम हिंसा के इस्तेमाल का समर्थन नहीं करता." महिला परिषद की प्रवक्ता और एक्टिविस्ट सुफिया अख्तर हिफाजत की मांगों का विरोध करते हुए कहती हैं, "हम कभी इस बात की इजाजत नहीं देंगे कि मुल्लाह यहां बांग्लादेश में तालिबान शासन स्थापित करें. हम क्यों स्वीकार करें कि बांग्लादेश अफगानिस्तान में बदल दिया जाए?"

इस चिंता को समझा जा सकता है. हिफाजत के एक नेता एक मदरसे के प्रमुख मौलाना हबीबुर रहमान हैं. वे अफगानिस्तान में 80 के दशक में तथाकथित जिहाद के अनुभवों और अल कायदा सरगना ओसाना बिन लादेन को समर्थन देने का डंका पीटते हैं. उनके विचारों को हिफाजत के समर्थकों का समर्थन मिल रहा है, जिनमें से ज्यादातर मदरसों के छात्र और टीचर हैं. हिफाजत पहली बार 2010 में शेख हसीना की सरकार की धर्मनिरपेक्ष शिक्षा नीति का विरोध करने वाले संगठनों के संघ के रूप में सुर्खियों में आया. शुरू से ही उसके समर्थक हिंसक रवैया अपना रहे थे. 2011 में उन्होंने सरकार की समानता नीति के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया.

विपक्ष का समर्थन

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि हिफाजत का प्रभाव इतना इसलिए बढ़ गया है कि छोटी लेकिन कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात ए इस्लामी युद्ध अपराध मुकदमों के कारण पंगु हो गई है. उसके कुछ नेताओं के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और कुछ भूमिगत हो गए हैं. अभियुक्तों में देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनल पार्टी के सदस्य भी हैं. उन पर 40 साल पहले पाकिस्तान के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नरसंहार और बलात्कार करने के आरोप हैं. आरोपों के मुताबिक उन्होंने उस समय आजादी के लिए लड़ रहे विद्रोहियों पर क्रूर अत्याचार किए गए. मिलिशिया ने 2,00,000 से ज्यादा महिलाओं से बलात्कार किया. जनवरी में पहले अभियुक्तों को मौत की सजा सुनाई गई.

प्रेक्षकों का कहना है कि प्रमुख विपक्षी पार्टी बीएनपी सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन कर रही है. पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी युद्ध अपराध मुकदमे को सरकार का राजनीतिक हथकंडा मानती है. वह इस्लामी विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल सरकार पर दबाव डालने के लिए करने की इच्छुक है क्योंकि प्रधानमंत्री शेख हसीना मुकदमे को रोकने से मना कर रही है. वे इस साल के अंत में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले अंतरिम सरकार को जिम्मेदारी सौंपने के लिए भी तैयार नहीं हैं. मई महीने के पहले रविवार को इस्लामी कट्टरपंथियों ने राजधानी ढाका को ठप कर दिया. रैली में आए 2,00,000 से ज्यादा लोगों ने शहर को जाम कर दिया और नास्तिकों के लिए सजा ए मौत की मांग की. प्रदर्शनों में अब तक 15 लोगों की जानें गई हैं. बीएनपी नेता खांडकर मोशर्रफ हुसैन इस संख्या को बहुत कम बताते हैं और इन मौतों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं. वह कहते हैं, "मैं हिफाजत की सभी मांगों का समर्थन नहीं कर सकता, लेकिन मैं यह भी नहीं कहूंगा कि मैं उनका समर्थन नहीं करता."

मदरसों पर आरोप

जब सत्ताधारी पार्टी के समर्थक और उदारवादी छात्रों ने आजादी की लड़ाई में अत्याचार करने वालों के खिलाफ प्रदर्शन किए और वे अभियुक्तों को मौत की सजा देने की मांग कर रहे थे तो हिफाजत समर्थकों ने उन पर हिंसक हमले किए. कई ब्लॉगरों को मार दिया गया. इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें नास्तिक करार दिया और ब्लॉगरों को मौत की सजा देने की मांग की. हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए सरकार ने कई ब्लॉगरों को गिरफ्तार कर लिया.

शेख हसीना की अवामी लीग के महासचिव महबूबुल आलम हनीफ इस्लामी कट्टरपंथियों को दी गई रियायत को स्वीकार करते हैं, "हमने कुछेक मांगे मान लीं, लेकिन कुछ और नहीं मान सकते. यदि हम सारी मांगें मान लें तो हमारे देश का नाम अफगानिस्तान होगा. अब हम हिफाजत की सारी गतिविधियों को सख्ती से रोकेंगे." पुलिस ने इस बीच हिफाजत के 200 सदस्यों पर मुकदमे दायर किए हैं. सूचना मंत्री हसनुल हक ने मदरसों के प्रमुखों पर छात्रों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार करने और उन्हें सरकार के खिलाफ सड़कों पर भेजने का आरोप लगाया है.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों ने इस बीच बांग्लादेश की सरकार से अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करने की मांग की है और ब्लॉगरों को रिहा करने की अपील की है. लेकिन हिंसा बढ़ती जा रही है. आने वाले दिनों में और प्रदर्शनों की योजना है.

रिपोर्ट: ग्रैहम लुकस/एमजे

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री