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ब्लॉग

बांग्लादेशः अतीत से सीखना जरूरी

बांग्लादेश के अधिकारियों ने एकुशे टीवी के प्रमुख को गिरफ्तार कर लिया है और चैनल को बंद कर दिया है. डॉयचे वेले के ग्रैहम लूकस का कहना है कि जो अतीत से नहीं सीखता वह वर्तमान और भविष्य खो देता है.

यह कार्रवाई पांच जनवरी को प्रधानमंत्री शेख हसीना के विवादित पुनर्निर्वाचन की पहली वर्षगांठ पर हुई. यदि किसी को बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के भविष्य पर चिंता करने के लिए किसी कारण की जरूरत थी तो अब नहीं होगी. ईटीवी के चेयरमैन अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने नेतृत्व और देश के अतीत की अपनी व्याख्या को दी जाने वाली चुनौती को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं.

अब्दुस सलाम पर लगाए गए आरोप मनगढंत हैं. सलाम को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने ईटीवी पर नवंबर में न्यूज प्रोग्राम में पोर्नोग्राफिक तस्वीरें प्रासिरत करने का आरोप लगाया है और संबंधित महिला की शिकायत पर कार्रवाई करने का दावा किया है. चैनल ने आरोपों का जोरदार खंडन किया है. विवादित फूटेज के संबंध में चैनल के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रोग्राम में "कुछ धुंधली तस्वीरें थीं जो पत्रकारिता के नियमों के अनुकूल हैं." डीडब्ल्यू के संवाददाता से जेल से बात करते हुए सलाम ने कहा है कि उनकी न्यूज टीम को संपादकीय स्वतंत्रता है. केबल ऑपरेटरों का कहना है कि उन्हें ईटीवी का प्रसारण रोकने को कहा गया है, लेकिन सरकार ने इसका खंडन किया है.

पिछले कुछ समय से मानवाधिकार संगठन मीडिया और प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ हसीना सरकार की कार्रवाइयों की बार बार आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि तथाकथित अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध ट्रिब्यूनल का सरकार अपने प्रतिद्वंद्वियों का डराने और दबाने में इस्तेमाल कर रही है.

अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी की वजहें एक दिन पहले की घटनाओं में देखी जा सकती हैं, जो विपक्षी दलों के बहिष्कार के बीच हुए संसदीय चुनावों में शेख हसीना की जीत की पहली वर्षगांठ थी. 2014 के चुनावों के विरोध में सरकार विरोधी रैली का आयोजन करने की घोषणा के बाद पुलिस ने प्रधानमंत्री के प्रतिद्वंद्वी और बीएनपी नेता खालिदा जिया को नजरबंद कर दिया. बीएपी के महासचिव मिर्जा फखरुल को एक प्रेस कांफ्रेंस के बाद ढाका प्रेस क्लब के सामने गिरफ्तार कर लिया गया.

बढ़ते राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में ईटीवी ने लंदन से खालिदा जिया के बड़े बेटे तारीक रहमान का भाषण प्रसारित करने का संपादकीय फैसला लिया. दिसंबर में बांग्लादेश के अधिकारियों ने रहमान की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था. इससे पहले उन्होंने 1971 में स्वतंत्रता आंदोलन में देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की भूमिका की सरकारी व्याख्या को चुनौती दी थी. हसीना मुजीबुर रहमान की बेटी हैं.

तारीक रहमान के लंदन भाषण का प्रसारण करने के संपादकीय फैसले पर बहस की जा सकती है. उन्हें लोकतांत्रिक राजनीतिज्ञ के आदर्श के रूप में नहीं, बल्कि एक भ्रष्टाचारी व्यक्ति के रूप में ही देखा जा सकता है. लेकिन उस सामग्री के प्रसारण के चैनल के अधिकार पर बहस नहीं हो सकती जिसे वह देश में राजनीतिक संकट के सिलसिले में प्रासंगिक समझता है. लोकतांत्रिक समाज में मीडिया सूचना देने और सार्वजनिक बहस शुरू करने में प्रमुख भूमिका निभाती है. सुलह समझौता लोकतंत्र का अहम हिस्सा होता है. ऐसा लगता है कि शेख हसीना जॉर्ज ऑरवेल के 1984 की कल्पना को प्राथमिकता देती है, "जिसका अतीत पर नियंत्रण है वह भविष्य का नियंत्रण करता है, जो वर्तमान का नियंत्रण करता है वह अतीत का नियंत्रण करता है." शेख हसीना को यह नहीं भूलना चाहिए कि जो अतीत से नहीं सीखता वह वर्तमना और भविष्य दोनों ही खो देता है.

ग्रैहम लूकस/एमजे


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