बवाल के बाद गई महिलाओं की नौकरी | मनोरंजन | DW | 27.08.2010
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मनोरंजन

बवाल के बाद गई महिलाओं की नौकरी

सऊदी अरब की सबसे बड़ी सुपर मार्केट चेन ने अपने यहां महिलाओं को नौकरी देने का फैसला वापस ले लिया है. इस मामले पर धार्मिक बवाल होने के बाद कंपनी ने यह फैसला किया. हालांकि राजशाही मुल्लाओं से नाराज है.

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महिलाओं पर कई तरह की पाबंदी

सुपर मार्किट चेन चलाने वाली कंपनी पांडा ग्रुप ने अपने यहां 11 महिलाओं को कैशियर के तौर नौकरी दी. लेकिन इस बात पर धार्मिक संगठनों ने खासा बवाल मचाया. इस कंपनी में सऊदी राजकुमार वालिद बिन तलाल का बड़ा हिस्सा है.

हाल ही में एक कट्टरपंथी विद्वान यूसुफ अल अहमद ने सैटेलाइट टीवी चैनल पर एक संदेश देकर लोगों से इस कंपनी के बहिष्कार की अपील की. उनकी इस अपील के बाद फेसबुक पर लोगों ने महिला कर्मचारियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. आखिरकार कंपनी ने महिलाओं को नौकरी से हटाने का फैसला कर लिया.

हालांकि इस बात पर किंग अब्दुल्लाह ने नाराजगी जताते हुए यूसुफ अल अहमद को लताड़ लगाई है. उन्होंने कहा कि अल अहमद को आधिकारिक संस्थान सऊदी इंस्टिट्यूट फॉर रिलीजियस स्कॉलर्स के साथ विचार विमर्श किए बिना किसी तरह का फतवा जारी नहीं करना चाहिए.

इसी महीने की शुरुआत में किंग अब्दुल्ला ने एक आदेश जारी कर कहा था कि आधिकारिक रूप से तैनात मौलवी ही सार्वजनिक फतवे जारी करेंगे. इस आदेश को देश में बड़े पैमाने पर सुधारों के पहले कदम के तौर पर देखा जा रहा है. राजशाही इस बात पर भी विचार कर रही है कि एक सरकारी टीवी और रेडियो स्टेशन शुरू किया जाए, जहां आधिकारिक विद्वान ही फतवे जारी करेंगे.

सऊदी अर्थव्यवस्था में महिलाओं को कुछ ही क्षेत्रों में काम करने की आजादी है. इनमें शिक्षा, बैंकिंग और दवा क्षेत्र शामिल हैं. लेकिन उन पर काफी पाबंदियां भी हैं. मसलन उन्हें गाड़ियां चलाने की इजाजत नहीं है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः आभा एम