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दुनिया

बलात्कार मामले का हाइजैक

शक्तिपूर्ण प्रदर्शन और सरकारी तेजी के बाद दिल्ली बलात्कार मामला अब राजनीतिक बयानबाजी और मीडिया की भेड़चाल में फंसता जा रहा है. राष्ट्रपति इसे भारत की शर्म बता रहे हों, अखबार वाले बयानबाजी की रिपोर्टिंग में उलझ गए हैं.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जब दिल्ली बलात्कार कांड पर बयान दे रहे थे, मीडिया और आम लोगों में इस बात पर ज्यादा चर्चा हो रही थी कि आसाराम बापू नाम के गुरु ने इस मामले में क्या बयान दिया है. समाचार चैनलों पर इस बयान को तरह तरह से रिपीट कर दिखाया गया और इसके "मायने बताए गए." दर्शकों को यह भी जानकारी दी गई कि आध्यात्मिक गुरु को इस तरह का बयान देना चाहिए या नहीं.

भारत का यह वही मीडिया है, जिसने तीन हफ्ते पहले बड़ी जिम्मेदारी दिखाते हुए इस मामले की चौबीसों घंटे रिपोर्टिंग शुरू की थी और लोगों के प्रदर्शनों को जगह देने का फैसला किया था. दिल्ली की जनता ने पहली बार बिना किसी नेता या राजनीतिक पार्टी के जिम्मेदार प्रदर्शन किया था और कवरेज को लेकर मीडिया की भी तारीफ की गई थी.

लेकिन मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद कुछ समय बीत चुका है और सब कुछ पुराने तरीके पर लौटने लगा है. भारत की राजनीतिक पार्टियां किसी भी मुद्दे को हाइजैक करने में माहिर हैं. मीडिया इन राजनीतिक नेताओं के इर्द गिर्द घूमता है और देखते ही देखते आम बयान से भी सनसनी फैलाने में देर नहीं करता. सबसे पहले केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने बहस छेड़ी की "क्या लड़की के नाम को सार्वजनिक करके उसके नाम पर कानून बनाया जा सकता है."

इसके बाद नेतागण इसके पक्ष और विपक्ष में पंचायत करने लगे और मीडिया बढ़ा चढ़ा कर उनके बयानों के "मायने" समझाने लगा. इस दौरान कोई 65 साल का महेश जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठा लोगों की बाट जोहता रहा, उसे पूछने वाला कोई नहीं दिखा.

बयान पर बयान

जब बलात्कार पर राजनीति चल निकली, तो दूसरे नेता भी बयान देने आ गए. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कह दिया कि "बलात्कार की घटना भारत में कम और इंडिया में ज्यादा होती है." उनका इशारा पारंपरिक गांव वाले भारतीय हिस्से को भारत और तेजी से आधुनिक हो रहे "इंडिया" की ओर था. बहरहाल, इस बेतुके बयान पर भी खूब राजनीति हुई. बीच में नफरत की राजनीति करने के आरोपी राज ठाकरे ने भी बलात्कार के मुद्दे पर क्षेत्रीयता का रंग चढ़ा दिया और आरोप लगाया कि बलात्कार के सारे आरोपी बिहार के हैं.

दिल्ली में 16 दिसंबर की रात एक चलती बस में 23 साल की लड़की का सामूहिक बलात्कार हुआ, जिसके लिए छह आरोपियों को पकड़ा गया है. घटना के बाद बेहद नाजुक हालत में लड़की और उसके दोस्त को बस से फेंक दिया गया. दो हफ्ते तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद लड़की ने सिंगापुर के एक अस्पताल में 29 दिसंबर को दम तोड़ दिया. सरकारी रवैये और दिल्ली पुलिस की लापरवाही के खिलाफ लोगों ने जम कर प्रदर्शन किया. इस बात पर भी सवाल उठे कि क्या लड़की को इतनी खराब हालत में सिंगापुर भेजा जाना सही था.

गुरु भी आए

लेकिन इन बड़े मुद्दों के बाद बना दबाव राजनीति और गुरुओं के बयान के बीच कहीं दब कर रह गया. नेताओं को भाव मिलता देख आध्यात्मिक गुरु भी सामने आने लगे. करोड़ों भारतीय जिस आसाराम बापू से "दीक्षा" लेते हैं, उन्होंने लड़की को भी कसूरवार कह दिया कि "ताली एक हाथ से नहीं बजती." अब भले "बापू" के प्रवक्ताओं को सफाई देनी पड़ रही हो लेकिन चर्चा में तो आ ही गए. सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया ने लोगों को जागरूक करने के लिए जगह जगह सेमिनार करने की बात कही थी, जो अब इन बयानों के बीच दब कर रह गई है.

इस बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस पूरी घटना को भारत के लिए शर्म की बात बताई है, "हां, दिल्ली में जो कुछ हाल में हुआ, हमें इस बात पर शर्म है. हम बहुत शर्मिंदा हैं. अगर कोई देश अपनी मां, बहन या बेटी की सुरक्षा नहीं कर सकता, वह एक सभ्य समाज नहीं हो सकता."

वैसे, ट्विटर पर मुखर्जी से ज्यादा #आसाराम ट्रेंड कर रहे हैं.

रिपोर्टः अनवर जे अशरफ

संपादनः महेश झा

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