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जर्मन चुनाव

बलात्कार के आरोप में टीवी ऐंकर

क्या आपराधिक मामलों में सेलिब्रिटिज को किसी हद तक बख्शा जाता है? या अपनी शोहरत की वजह से उन्हें ज्यादा ही झेलना पड़ता है? जर्मनी में काखेलमान बलात्कार मुकदमे में ये सवाल फिर से उभरकर सामने आए हैं.

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काखेलमान - मौसम बेगाना है.

योएर्ग काखेलमान जर्मनी में मौसम रिपोर्ट देने वाले सबसे लोकप्रिय टीवी ऐंकर रहे हैं. उनकी पूर्व जीवनसंगिनी ने उनके खिलाफ आरोप लगाया है कि उन्होंने आपसी झगड़े के बाद चाकू से धमकाकर बलात्कार किया था. इस आरोप की जांच के दौरान काखेलमान को कई महीनों तक हिरासत में रखा गया. महीनों से मीडिया में इस सिलसिले में चटखारी रिपोर्टें आ रही हैं. रिपोर्ट देने वाले पत्रकार दो खेमों में बंटे हुए हैं. एक ओर कहा जा रहा है कि उनकी शोहरत को ध्यान में रखते हुए लंबे समय तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो कुछ लोगों का आरोप है कि एक सेलिब्रिटी होने की वजह से अदालत के फैसले से पहले ही उन्हें दोषी करार दिया जा रहा है. इसके अलावा पक्के सबूत के बिना उन्हें काफी लंबे समय तक हिरासत में रखने के आरोप भी लगाए गए हैं.

बलात्कार और पारिवारिक जीवन में हिंसा के आरोप तो अदालत में साबित किए जाने हैं, लेकिन पत्रकारों की खोज से यह सामने आ चुका है कि एक ही समय में काखेलमान के कई महिलाओं के साथ संबंध थे. इस प्रकार नैतिक रूप से उन्हें अपराधी की श्रेणी में रख दिया गया है, सेलिब्रिटी न होने पर शायद जो नहीं होता. साथ ही, यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि ढीले चरित्र का होने से ही क्या कोई बलात्कारी हो जाता है?

इन सवालों पर प्रकाश डालने वाले मुकदमे की आज पहली सुनवाई थी. और अदालत की कार्रवाई कुछ ही मिनटों के बाद स्थगित करनी पड़ी. बचाव पक्ष के वकील ने दो न्यायाधीशों के खिलाफ निष्पक्ष न होने का आरोप लगाया. मीडिया के अनुसार न्यायाधीश जाइडलिंग एक क्लब के उपाध्यक्ष हैं, और शिकायत करने वाली महिला के पिता की अध्यक्षता वाले एक क्लब के साथ उनके क्लब का सहयोग है. न्यायाधीश जाइडलिंग ने इस सिलसिले में कहा था कि वे पीड़ित महिला को नहीं जानते हैं. बचाव पक्ष के अनुसार पीड़ित कह देना उनके पक्षपाती होने का संकेत है.

ऐसा लगता है कि यह मुकदमा लंबे समय तक व्यवस्था के प्रश्नों में उलझा रहेगा. मीडिया में चर्चा होती रहेगी. और काखेलमान का पलड़ा अंततः कुछ भारी ही रहेगा, क्योंकि मीडिया के मामले में वे अपनी प्रतिद्वंद्वी से कहीं अधिक अनुभवी हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: महेश झा

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