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दुनिया

बर्लिन की बढ़ती चाहत

दस साल पहले तक जिंदादिल लेकिन गरीब शहर के रूप में मशहूर बर्लिन दुनिया में नई पहचान बना रहा है. हाल में कुछ ऐसे बदलाव आए हैं, जिनसे बर्लिन दुनिया के कुछ सबसे पसंदीदा शहरों में एक बन गया है.

नवंबर में जर्मन सरकार बर्लिन के ताजा आर्थिक आंकड़ों को लोगों के सामने लाई. 2015 तक के लिए शहर का बजट संतुलन में है. कर्ज अब बीते जमाने की बात हो गई. बर्लिन विधानसभा के प्रवक्ता रिचर्ड मेंग ने कहा, "बर्लिन ने अपनी तैयारी कर ली है."

खराब हालात

कई लोगों के लिए यह बात हैरान करने वाली रही. बर्लिन को एक जिंदादिल शहर के रूप में तो जाना जाता था लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर ही रही. फिर बर्लिन में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण की समय सीमा का खिंचता जाना और भारी खर्च भी दागदार था.

कई सालों तक बर्लिन को दूसरे मजबूत राज्यों से आर्थिक मदद लेनी पड़ी. 2013 की शुरुआत में बवेरिया, हेस्से, बाडेन वुर्टेमबर्ग, सबने मिल कर बर्लिन को आर्थिक संकट से निकालने के लिए दो अरब यूरो की मदद दी ताकि दूसरे राज्यों के मुकाबले वह अर्थव्यवस्था में पिछड़ न जाए.

आकर्षण का केन्द्र

हाल में बर्लिन के राजस्व में इजाफा हुआ है. अगर आंकड़े सही हैं, तो बर्लिन आने वाले वक्त में खर्च के मुकाबले 40 करोड़ यूरो ज्यादा कमा सकता है.

कामयाबी पर्यटन से भी मिली है. पर्यटन शहर का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग बन गया है. मेंग ने बताया, "पर्यटन के मामले में हम पेरिस और लंदन के बाद तीसरे नंबर पर हैं. जाहिर है इससे शहर में रोजगार भी आता है और पैसा भी."

युवाओं के बीच बर्लिन काफी पसंदीदा जगह है. बहुत सारे लोग सिर्फ यहां घूमने नहीं बल्कि घर बसाने और जिंदगी गुजारने के बारे में सोच कर आते हैं. हर साल शहर की आबादी 30,000 बढ़ रही है, जबकि जर्मनी की आबादी थमी हुई है. ऐसा आने वाले समय में जर्मनी के दूसरे शहरों के साथ भी हो सकता है लेकिन मेंग को भरोसा है कि उनके शहर की बात कुछ अलग है.

मेंग ने डॉयचे वेले से कहा, "बर्लिन के बारे में खूब जिज्ञासा है. शहर उन तमाम लोगों को अपनी तरफ खींचता है जो जीवन में कोई खास अनुभव चाहते हैं, जो कुछ अलग करना चाहते हैं."

यह बात सिर्फ रोमांच हासिल करने वालों पर ही लागू नहीं होती. पिछळे सालों में जानी मानी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने मुख्यालय भी बर्लिन स्थानांतरित कर लिए हैं. माइक्रोसॉफ्ट ने तो शहर के मशहूर और रईस इलाके उंटर डेन लिंडेन मार्ग पर विशालकाय चारमंजिला दफ्तर खोला है.

बढ़ता उद्योग

हाल के सालों में कई इंटरनेट और मीडिया कंपनियों के खुलने से भी बर्लिन में बदलाव आया है. कोलोन के आर्थिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के मिशाएल बार्के कहते हैं, "इंटरनेट के क्षेत्र में बर्लिन की अंतरराष्ट्रीय पटल पर अहम भूमिका है. जर्मनी में या दुनिया के किसी और कोने में, इस क्षेत्र में काम करने के लिए इतनी अनुकूल परिस्थितियां नहीं हैं, जितनी यहां."

बर्लिन की आमदनी में चार फीसदी भागीदारी आईटी और इंटरनेट उद्योग की है. इसके अलावा शहर के नोएकोल्न या फ्रीडरिषसहाइन इलाकों में अनगिनत क्लब, बार और छोटे बड़े डिजाइनरों की दुकानें लोगों को अपनी तरफ खींच रही हैं.

2005 से बर्लिन की आर्थिक भूमिका में 17 फीसदी इजाफा हुआ है. जो बवेरिया जैसे पारंपरिक तौर पर अमीर राज्यों से भी ज्यादा है. शहर अपनी उन खूबियों का फायदा अब उठा रहा है जो उसके पास हमेशा से मौजूद थीं.

नुकसान भी

अक्सर अच्छे बदलाव के साथ कुछ दूसरे बुरे प्रभाव भी जुड़े होते हैं. जैसे जैसे शहर की स्थिति बेहतर हो रही है, यहां किराये बढ़ रहे हैं. जमीनों और मकानों के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. मेंग कहते हैं, "शहर की हालत जितनी बेहतर होगी, यह बहस बढ़ जाती है कि कौन यहां आना चाहता है. जिनके पास ज्यादा पैसा है वे यहां आएंगे, और फिर वे लोग यहां रहने से घबराने लगेंगे जो यहां के पुराने शहरी हैं लेकिन उनके पास इतना पैसा नहीं."

शहर में रहने वाले पुराने लोग अब छोटे सस्ते मकानों में जाने लगे हैं. जगह जगह नए अपार्टमेंट भी बन रहे हैं. मेंग मानते हैं अब जबकि ज्यादा पैसा है, सरकार को चाहिए कि इस पैसे को सस्ते घर मुहैया कराने में लगाए. उन्होंने बताया दूसरी बड़ी समस्या है बच्चों के खेलने के लिए शहर में पार्क और स्कूल भी आबादी के हिसाब से कम हैं.

विकास की दौड़ में हो सकता है शहर में रहने वालों के बीच सामाजिक खाई बन जाए. ज्यादा से ज्यादा अमीरों के घर शहर के बीचों बीच खड़े होते जा रहे हैं और गरीबों को शहर के बाहरी हिस्से में जगह मिल रही है. बार्के कहते हैं कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि कामयाबी का फायदा बर्लिन वालों के हिस्से में जाए.

रिपोर्ट: यॉनेट जाइफर्ट/एसएफ

संपादन: ए जमाल

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