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मनोरंजन

बर्लिनाले में भारत की लघु फिल्में

जर्मनी की राजधानी में इन दिनों बर्लिनाले की धूम है. दस दिन तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में दुनिया भर से 400 से भी ज्यादा फिल्में दिखाई जाती हैं. भारत की लघु फिल्में भी इनका हिस्सा हैं.

बर्लिन में फिल्म जगत से जुड़े बीस हजार लोगों के बीच भारतीय खोए हुए से दिखे. लेकिन शॉर्ट फिल्म की श्रेणी में भारत से दो फिल्में बर्लिनाले पहुंच पाई हैं. अमित दत्ता के निर्देशन में बनी फिल्म चित्रशाला को बर्लिनाले के दूसरे दिन दिखाया गया. 19 मिनट की यह फिल्म नल और दमयंती की कहानी सुनाती है. एक महल में लगे चित्रों के जरिए यह कहानी कही गयी है. फिल्म का कैमरावर्क अनोखा है. शुरुआती हिस्से में दर्शकों को एक चित्रशाला दिखाई जाती है, एक ऐसा महल जिसकी दीवारों पर कई चित्र टंगे हैं. इन्हें देखने आए लोग तो नहीं दिखते, पर उनका शोर और उत्साह सुना जरूर जा सकता है. रात में, जब म्यूजियम बन चुकी इस चित्रशाला में कोई कदम नहीं रखता, तो ये तस्वीरें जिंदा हो उठती हैं. नल और दमयंती का प्यार, उनकी जुदाई के भाव तस्वीरों में जान डाल देते हैं.

Deutschland Berlinale 2015 Kamakshi EINSCGHRÄNKUNG

फिल्म कामाक्षी का एक चित्र

जहां अमित दत्ता ने प्यार का विषय चुना, वहीं सतिंदर सिंह बेदी ने गरीबी के दर्द भरे विषय पर काम किया है. उनकी फिल्म कामाक्षी भी शॉर्ट फिल्मों की श्रेणी में चुनी गयी है. फिल्म एक वृद्ध महिला के इर्द गिर्द घूमती है. चित्रशाला की तरह कामाक्षी में भी कोई डायलॉग नहीं हैं. 25 मिनट की इस ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म में पानी के लिए महिला के संघर्ष को दिखाया गया है. जिंदगी भर एक एक सिक्का जमा कर वह पैसे जुटाती है. इसी से वह मजदूरों को एक कुआं खोदने के काम पर लगा पाती है. मजदूरों के चले जाने के बाद, वह कुएं की खुदाई का काम अपने हाथों में ले लेती है. दिन रात एक कर वह आखिरकार पानी तक पहुंचने में सफल तो रहती है, लेकिन इसके लिए उसे अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ती है.

जहां लघु फिल्मों की श्रेणी में दिखाई गयी अधिकतर अंतरराष्ट्रीय फिल्में सेक्स और अहिंसा के चित्रों से लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश में लगी हैं, वहीं भारतीय फिल्मों ने एक अलग छाप छोड़ी है. बर्लिनाले शॉर्ट्स श्रेणी में भारत के अलावा इस्रराएल, कोरिया, स्वीडन, स्पेन, फ्रांस और जर्मनी की भी फिल्में दिखाई हैं.


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