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जर्मन चुनाव

बनारसी अड़ीबाजी में मोदी केजरीवाल

बीजेपी के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी वड़ोदरा से भी चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन चर्चा में उनका बनारस चुनाव है क्योंकि यहां अरविंद केजरीवाल उन्हें चुनौती देने आए हैं. अक्खड़ फक्कड़ बनारस ने लड़ाई को चुनावी उत्सव में बदल दिया है.

उत्तर वाहिनी गंगा तट पर बसी काशी को दुनिया के चंद जीवित शहरों में से एक होने का गौरव प्राप्त है. बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को यहां का मैदान मारने के लिए उतारा ताकि उत्तर भारत के साथ हिंदुत्व का भी प्रतिनिधित्व हो जाए. अंतःपुर कहता है कि बीजपी ने दरअसल बिना किसी ऐलान के अयोध्या की जगह काशी को चर्चा में ला दिया है. काशी अब नव हिंदुत्व की परिभाषा गढ़ रहा है और नरेंद्र मोदी इसके शिखर पुरुष हैं. पूरे वाराणसी में सोमनाथ मंदिर और गुजरात की तीर्थ यात्रा के ऑफर वाले पैकेजों के होर्डिग्स और यूनीपोल उग आए हैं. काशी हिंदुत्व का गढ़ रहा है, 2004 को छोड़ 1991 से यहां बीजेपी ही जीतती रही है.

24 अप्रैल को भारी भीड़ के साथ नामांकन करने के करीब दो हफ्ते बाद नरेंद्र मोदी वाराणसी आए तो रैली करने और गंगा आरती में शामिल होने के विवाद से निपट ही रहे थे कि अरविंद केजरीवाल आरती में पहुंच गए. यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने मोदी के गंगा आरती में शामिल होने को विशुद्ध सियासी बताया. बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया और चिलचिलाती धूप में लंका पर जबर्दस्त प्रदर्शन किया. लंका से मोदी चुनाव कार्यालय स्वस्तिक अपार्टमेंट चले तो बनारस के लोगों ने उनका जबर्दस्त अभिनंदन किया. सात किलोमीटर का रास्ता साढ़े तीन घंटे में तय हुआ.

Indien Wahlen

बनारस में आम आदमी पार्टी की सभा की तस्वीर

काशी मोदी के रंग में रंग गई जो अब 35 लाख की आबादी और 16 लाख वोटर वाली हो गई है और नागरिक सुविधाओं के अभाव में कराह रही है. प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र होने के बावजूद हर ओर मुश्किलें हैं. नरेंद्र मोदी ने इसे बौद्धिक राजधानी बनाने का वादा किया है. रंगकर्मी गौतम चटर्जी इस बात पर व्यंग्यात्मक मुस्कुराहट बिखेर देते हैं.

अड़ीबाजी, राग, वैराग्य, प्रेम और प्राणायाम वाली काशी के घाटों की हालत खस्ता है. गंदगी का अंबार लगा है. कहावत है 'आधा बनारस हाट में आधा घाट में'. प्रीति जिंटा आईं, वापस जाकर घाट की गंदगी पर ट्वीट किया. लेखक चेतन भगत ने भी बनारस वालों की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई. घाट पर निषाद राज मंदिर के नीचे क्रिकेट चल रहा है. एक बिजली का खंभा व्यवधान है. मोदी के अंदाज में बॉलर कहता है 16 मई के बाद इसे हटना होगा.

भगवान शिव की मोक्ष प्रदायिनी काशी के बंगाली टोला, लंका, पांडेपुर, नदेसर, अस्सी 'वोट फॉर पीएम' वाली टोपी धूप से बचने के लिए नहीं बल्कि मोदी के समर्थन में लोग पहने हैं. बीमा एजेंट राजेश पांडेय का पूरा घर कांग्रेसी रहा है, लेकिन इस बार सभी मोदी को वोट देंगे. बीएचयू कैंपस सक्रिय नहीं है लेकिन आप के समर्थन में जेएनयू से आई छात्रों की कुमुक से मुकाबले में है. करीब हर दिन आप के कार्यकर्ता बीजेपी वालों से पिटे हैं. अस्सी पर कांग्रेस के अजय राय महिलाओं की सभा में स्थानीय होने की दुहाई दे रहे हैं. पिछले चुनाव में मुरली मनोहर जोशी से मात्र 17000 वोटों से हारे बाहुबली मुख्तार अंसारी का अजय राय को समर्थन फिजा में नजर नहीं आता. उनके लिए प्रचार के आखिरी दिन राहुल गांधी का रोड शो है.

'हमन हैं इश्क मस्ताना, हमन से होशियारी क्या' कबीर की जन्म स्थली पर 'काशी का अस्सी' के लेखक काशी नाथ सिंह भी 'साम्प्रदायिक फासीवाद' के खिलाफ सांस्कृतिक मार्च में शामिल हुए जिसमें जलेस, प्रलेस, जसम सभी के लेखक और रंगकर्मी थे. पीपली लाइव वाली अनुषा रिजवी और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भी आए. ये सभी केजरीवाल के समर्थक हैं. इनमें से कईयों ने सड़कों, घाटों पर आप का प्रचार किया. आलोचक वीरेंद्र यादव ने इसे ऐतिहासिक बताया. बोले फासीवादी ताकतों के खिलाफ अंत तक लड़ना है.

महमूर गंज की शिवाजी नगर कालोनी की 11 नंबर की कोठी में आप के चुनाव कार्यालय की डोनेशन डेस्क के प्रसून पांडे रोजाना औसतन 15 हजार रुपए चंदा आने की बात कहते हैं. रोज आने वालों की संख्या 400-500 है जिसे ये आप के समर्थक बताते हैं. ऑरेकल बेंगलुरु में कार्यरत राजकिरन दो हफ्ते की छुट्टी पर आए हैं. बताते हैं कि स्थानीय लोगों के साथ घर घर जाकर हम लोग सबसे मिल रहे हैं. उनके अनुसार बनारस वालों को आप की 'राजनीतिक शिष्टता' भा रही है. राजकिरन प्रोसेस मैनेजमेंट विशेषज्ञ हैं, 100 लोगों का काम 10 लोग कैसे करें, का फार्मूला आप के लिए लागू कर रहे हैं. सामने टैम्पू से आनंद पटवर्धन उतरे, किराया देते हुए ड्राइवर से बतियाए और उसे आप की टोपी पहना कर विदा किया.

राजकिरन बताते हैं कि ब्रिटेन से मनोरोग विशेषज्ञ अनुराधा यादव समेत कनाडा, अमेरिका, लंदन, पेरिस से करीब 30 एनआरआई अरविंद के प्रचार में आए हैं. करीब इतने ही गुजराती एनआरआई मोदी के लिए यहां अड्डा जमाए हैं. आप का मुखपत्र 'आप की क्रांति' बंट रहा है. शहरी पार्टी कही जाने वाली आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल की ग्रामीण सभाओं में भी भीड़ उमड़ रही है. रेवड़ी तालाब और आजाद पार्क की उनकी सभाएं ऐतिहासिक भीड़ वाली हुईं. पांडेपुर चौराहे से मदनपुरा तक मुस्लिम मोहल्लों में सफेद दुपल्ली और आप की सफेद टोपियां आपस में गडमड हो गई हैं. अरविंद हर दिन करीब 22 नुक्कड़ सभाएं करते हैं. मुस्लिम मोहल्लों में उनके लिए हर रोज कार्यक्रम हो रहा है.

'तीन लोकों से न्यारी काशी' से बुनकरों का पलायन हो रहा है. करीब सवा तीन लाख बुनकर हैं. लगभग 30 हजार शिया मुसलमानों ने मोदी के समर्थन की घोषणा की है. पारंपरिक रूप से यहां के सवा तीन लाख वणिक और दो लाख ब्राह्मण बीजेपी के समर्थक रहे हैं. इस बार केजरीवाल मैदान में हैं, वह भी वणिक हैं तो वणिक वोटों में सेंध लगने की आशंका बीजेपी को है. बीजेपी का प्लस प्वाइंट सवा लाख कुर्मी हैं, क्योंकि अपना दल से बीजेपी का गठबंधन है, पोस्टर में मोदी, अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल और सरदार पटेल के फोटो चस्पां हैं. दलित सिर्फ 90 हजार हैं, इसीलिए बीएसपी प्रत्याशी विजय जायसवाल के बारे में कोई बात नहीं करता. सवा लाख यादव हैं और सपा के कैलाश चौरसिया मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं.

इन धार्मिक और जातीय आंकड़ों पर बनारसी मन, मूड और मस्ती हमेशा हावी रहा है. कब किसका पांसा पलट जाए कहना मुश्किल है. बीजेपी की गढ़ कही जाने वाली काशी में आप की राजनीतिक शिष्टता का लोहा हर कोई मान रहा है. इसके चमत्कार की उम्मीद फिजूल नहीं है.

रिपोर्ट: सुहैल वहीद, वाराणसी

संपादन: महेश झा