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मनोरंजन

बदल जाएगी कोलकाता की पहचान

कोलकाता में पीले रंग की एंबेसडर टैक्सियां दशकों से इस महानगर की पहचान रही हैं. यहां मीटर वाली सभी टैक्सियां इसी ब्रांड की चलती रही हैं. अब इसमें बदलाव होने जा रहा है.

राज्य सरकार ने दूसरी कंपनियों की ऐसी कारों को भी मीटर वाली टैक्सियों के तौर पर चलाने की योजना को हरी झंडी दिखा दी है जिनमें पांच लोग बैठ सकते हैं. इससे शहर में मीटर वाली टैक्सियों की तस्वीर बदल जाएगी.

सरकार का फैसला

क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी) के उपाध्यक्ष सब्यसाची बागची कहते हैं, "ममता बैनर्जी की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने अब तकनीकी तौर पर उन्नत टैक्सियों के लिए बाजार खोलने का फैसला किया है. इसके तहत सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए नई टैक्सियां खरीदने वालों को 25 हजार रुपए का इन्सेंटिव देगी." अब तक यह सुविधा हिंदुस्तान मोटर्स की बनाई एंबेसडर कारों तक ही सीमित थी. वैसे पहले मारूति की वैगन आर और टाटा मोटर्स की इंडिगो को टैक्सी के तौर पर महानगर में चलाने की इजाजत दी गई थी. लेकिन यह दोनों एंबेसडर टैक्सियों के एकाधिकार तोड़ने में नाकाम रही थीं. अब 1050 से 1150 सीसी इंजन क्षमता वाली तमाम कारें राज्य में टैक्सी के तौर पर पंजीकरण करा सकती हैं.

ध्यान रहे कि मुंबई में महाराष्ट्र सरकार ने 20 साल से ज्यादा पुरानी प्रीमियर पद्मिनी कारों के सड़कों पर चलने पर पांबदी लगा दी है. कोलकाता में सरकार का यह फैसला ठीक उसके बाद ही आया है.

एंबेसडर कारों का निर्माण तो अब तक जारी है. लेकिन फिएट ने प्रीमियर पद्मिनी कारों का निर्माण वर्ष 2000 में बंद कर दिया था. 50 साल से भी लंबे अरसे से बन रही एंबेसडर कारों का स्वरूप मॉरिस आक्सफोर्ड की मूल कारों की तरह ही है.

कड़ी प्रतियोगिता

कोलकाता में हिंदुस्तान मोटर्स की बनाई एंबेसडर कारों को अब कई कंपनियों से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है. कोलकाता से दस किमी दूर उत्तरपाड़ा के कारखाने में बनने वाली कारें इस मुकाबले में कितना टिक सकती हैं, इस सवाल के जवाब पर ही उक्त कारखाने के तीन हजार कामगारों का भविष्य निर्भर है. हिंदुस्तान मोटर्स के प्रबंध निदेशक उत्तम बसु कहते हैं, "हमें पहले भी दूसरी कंपनियों से कड़ी चुनौती मिलती रही है. लेकिन प्रतिद्वंद्वी अब तक हमको पछड़ाने में नाकाम रहे हैं." हालांकि बसु भी मानते हैं कि एंबेसडर कारों के दिन अब गिने-चुने ही हैं. कंपनी की जुलाई में आई तिमाही रिपोर्ट में उनका सवाल था कि अब सड़कों पर कितनी एंबेसडर कारें नजर आती हैं ?

नए मानदंड

राज्य में बनने की वजह से इन कारों को राज्य सरकार की ओर से लंबे अरसे से काफी छूट मिलती रही है. सरकार ने हिंदुस्तान मोटर्स को भारत स्टेज 3 (बीएस 3) टैक्सियों को बेचने की अनुमति दी है जबकि देश के दूसरे शहरों के निर्माताओं को बीएस 4 जैसे कड़े मानकों का पालना करना पड़ रहा है. वैसे, एंबेसडर कारों ने भी इस साल की शुरूआत में इसे बीएस 4 के अनुरूप बनाया है. कारों की यह नई खेप जल्दी ही बाजारों में उतरने वाली है. बंगाल टैक्सी एसोसिएशन के महासचिव बिमल गुहा कहते हैं, "अब हमारे पास कई विकल्प हैं. यह एक अच्छी बात है."

Verkehr in Kolkata

होगा एकाधिकार खत्म

दूसरी कंपनियों की पेशकश

इस बीच मारुति आर इंडिगो कार के निर्माताओं ने टैक्सी मालिकों से बातचीत के जरिए कारों की खरीद के मामले में कई नई तरह की योजनाओं और छूट देने की पेशकश की है. राज्य सरकार जल्दी ही लगभग दो हजार नई टैक्सियों के लिए परमिट जारी करने वाली है. आरटीए के बागची कहते हैं, "इसका मतलब है कि हर साल हजारों नई टैक्सियां खरीदी जाएंगी. कई पुरानी टैक्सियों के मालिक भी नई कारें खरीद रहे हैं." दूसरी ओर, टाटा मोटर्स ने कहा है कि सरकार का यह फैसला उनके लिए एक सुअवसर है. हम कोलकाता में टैक्सी के तौर पर चलने के लिए कई नई रेंज पेश करेंगे. मारुति के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमें बंगाल सरकार के नए फैसले की जानकारी मिली है. हम इस मौके का हरसंभव फायदा उठाने का प्रयास करेंगे."

एसी टैक्सियां

बंगाल सरकार जिन दो हजार टैक्सियों को नए परमिट जारी करने जा रही है उनमें से आधी वातानुकूलित (एअरकंडीशंड) होंगी. लेकिन टैक्सी मालिक भी इस मौके का फायदा उठाने की सोच रहे हैं. कलकत्ता टैक्सी एसोसिएशन के सचिव तारक नाथ बारी कहते हैं, "हमें जो कंपनी सबसे ज्याद छूट देगी, हम उसकी कारें ही खरीदेंगे." हिंदुस्तान मोटर्स कंपनी अब तक पुरानी कारों के बदले में 40 हजार रुपए देने के अलावा एक्साइज ड्यूटी जैसी कई अन्य छूट भी देती रही है. लेकिन गुहा कहते हैं कि अब कबाड़ी इस कार के उससे ज्यादा पैसे दे रहे हैं. इसलिए कंपनी की पेशकश अब आकर्षक नहीं रह गई है

आम लोग खुश

सरकार के फैसले से आम लोगों में खुशी है. यादवपुर के धीरेंद्र सेनगुप्ता कहते हैं, "अब हम इंडिगो कार को भी टैक्सी के तौर पर किराए पर ले सकते हैं. पहले हमारे पास एंबेसडर के सिवा किसी कार का विकल्प नहीं था." दमदम इलाके की एक गृहिणी सुनंदा घोष कहती हैं, "अब कई कंपनियां एंबेसडर से ज्यादा आरामदेह कारें बना रही हैं. उनको भी महानगर में टैक्सी के तौर पर चलने का मौका मिलना चाहिए."

परिवहन विभाग के जानकारों का कहना है कि नई कंपनियों की कारों को टैक्सी के तौर पर चलाने की अनुमति देने से हिंदुस्तान मोटर्स का एकाधिकार भले खत्म हो जाए. लेकिन इससे आम लोगों को ही फायदा होगा.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता
संपादनः आभा मोंढे

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