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बछेड़ों की टीम म्योंचेनग्लाडबाख

म्योंचेनग्लाडबाख कोलोन के उत्तर में एक छोटा सा नगर है. यहां का क्लब है बोरुसिया म्योंचेनग्लाडबाख, जिसके 42 हज़ार से अधिक सदस्य हैं.

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क्लब के खिलाड़ी करीम मतमूर

किसी बड़े उद्यम या बड़े शहर से जुड़े न होने के कारण इस क्लब की वित्तीय संभावनाएं तो बहुत अधिक नहीं हैं, लेकिन जर्मनी की फ़ुटबॉल संस्कृति में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

1899 के 17 नवंबर को म्योंचेनग्लाडबाख के एक रेस्त्रां में खेल क्लब गैर्मानिया के कुछ खिलाड़ियों की एक बैठक हुई, और उन्होंने फ़ुटबॉल क्लब बोरुसिया के नाम से एक नया क्लब बनाने का फ़ैसला किया. यह शहर उस समय प्रशिया का हिस्सा था, और प्रशिया को लातिन भाषा में बोरुसिया कहा जाता है. क्लब के पास कोई मैदान न होने के कारण वे अगले साल कैथलिक युवा संगठन में शामिल हुए और 1 अगस्त, 1900 को उनके विलय से बना नया फ़ुटबॉल क्लब बोरुसिया म्योंचेनग्लाडबाख.

1965 में यह क्लब बुंडेसलीगा में आया और उसके बाद से उसे पांच बार बुंडेसलीगा चैंपियनशिप, तीन बार जर्मन फ़ुटबॉल संघ का डीएफ़बी कप और दो बार उएफ़ा कप मिल चुका है. पिछले साल उसे बुंडेसलीगा की तालिका में 12वां स्थान मिला था. ख़ासकर 1970 का दशक म्योंचेनग्लाडबाख के लिए अत्यंत सफल रहा. दस साल के अंदर वह पांच बार बुंडेसलीगा चैंपियन बना. नए युवा खिलाड़ियों के साथ आक्रामक खेल की वजह से उसे बछेड़ों की टीम कहा जाता था.

1998-99 के सत्र में तालिका में आखिरी स्थान के साथ म्योंचेनग्लाडबाख दूसरी लीग में उतरा, जहां उसे दो साल रहना पड़ा. 2006-07 में भी वह दूसरी लीग में खिसक गया था, लेकिन अगले ही साल दूसरी लीग के चैंपियन के तौर पर वह बुंडेसलीगा में वापस आया. पिछले दो सीज़न में 15वें और 12वें स्थान के साथ वह बुंडेसलीगा में फिर से पक्की जगह बना रहा है. सबसे बड़ी बात कि उसके खेल का आकर्षक अंदाज़ बना हुआ है.

लेख - उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन - ए जमाल