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दुनिया

बच्चों को भी इच्छा मृत्यु का अधिकार

बेल्जियम में किसी भी उम्र का नागरिक, चाहे वह बच्चा ही क्यों न हो, इच्छा मृत्यु का फैसला कर सकता है. लाइलाज बीमारी से पीड़ित बच्चों के मामले में मां बाप की सहमति और बच्चे को इच्छा मृत्यु की जानकारी जरूरी है.

देश की संसद में 86 सांसदों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया जबकि 44 इसके विरोध में रहे. बेल्जियम के राजा फिलिप को इस पर दस्तखत करने होंगे, तब यह कानून बन जाएगा. किसी भी उम्र के नागरिक को इच्छा मृत्यु का अधिकार देने के मामले में बेल्जियम पहला राष्ट्र बन गया है. नीदरलैंड्स में 12 साल के बच्चों तक को ये सुविधा उपलब्ध है. वहीं बेल्जियम में 2002 से इच्छा मृत्यु वयस्कों के लिए वैध है, जो अति पीड़ा और लाइलाज बीमारी के कारण इच्छा मृत्यु मांगते हैं.

नए बिल के मुताबिक 18 साल के कम उम्र का कोई भी "जिसे लगातार और असहनीय शारीरिक पीड़ा है, जिसे कम नहीं किया जा सकता और जो पीड़ा किसी गंभीर लाइलाज बीमारी के कारण हो रही है", वह अगर अपनी मृत्यु की मांग करता है, तो उसकी इच्छा पूरी की जा सकेगी.

एक मनोचिकित्सक तय करेगा कि मरीज अपना जीवन खत्म का फैसला स्वतंत्र रूप से लेने के लिए तैयार है या नहीं. फैसले को अंतिम रूप देने के लिए माता पिता की सहमति जरूरी होगी.

सीनेट ने इस प्रस्ताव को पहले ही पास कर दिया है. समाजवादी, सोशल और ग्रीन पार्टी ने यह प्रस्ताव संसद में गुरुवार को पास कर दिया, जिसमें 12 सांसद अनुपस्थित थे. बुधवार को इस बिल पर सात घंटे बहस हुई.

कई लोग इसके पारित होने से नाराज हैं. संसद के बाहर जमा विरोध प्रदर्शनकारियों की भीड़ में बच्चे भी थे. फैसला आने पर कुछ लोगों ने इन सांसदों को "हत्यारे" की भी संज्ञा दी. समाजवादी सांसद कारिन लाल्यू ने दलील दी, "यह किसी को भी या किसी भी बच्चे को इच्छा मृत्यु देने की बात नहीं है. बच्चों को अंतहीन पीड़ा से बचाने का मुद्दा है. सम्मानजनक मौत का अर्थ सभी अपने हिसाब से निकाल सकते हैं."

लेकिन विरोधियों का कहना है कि इसमें उम्र की न्यूनतम सीमा रखनी चाहिए और कि इस प्रस्ताव कई बिंदु धुंधले हैं, "जैसे कि अगर माता पिता में इच्छा मृत्यु को लेकर मतभेद हो तो". और उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या बच्चों में इतना बड़ा फैसला लेने की क्षमता होती है...

ग्रीन पार्टी की थेरेसे स्नोई ने पार्टी लाइन से हट कर कहा कि "यह विश्वास बढ़ाने वाला और जीवन के लिए लड़ने वाला बिल नहीं है." आजाद सांसद लॉरां लुइस ने कहा कि वह धार्मिक मान्यता के कारण इसका विरोध करते हैं. उन्होंने दलील दी कि बच्चों को मारा नहीं जाता. बेल्जियम के बिशप ने संसद के फैसले पर दुख जताया और टिप्पणी की है, "बच्चे को अपनी ही मौत के बारे में पूछना अति है."

समाजवादी सीनेटर और डॉक्टर फिलिपे माहोऊ ने इस बिल को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने इस प्रस्ताव की अपील की थी. वह उन डॉक्टरों के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना चाहते थे, जो बच्चों को भयानक पीड़ा के दौरान मदद करते हैं.

बेल्जियम में 2012 के दौरान 1,432 इच्छा मृत्यु के मामले दर्ज हुए, जो 2011 के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है. यह सभी मौतों का दो प्रतिशत था. वहीं नीदरलैंड्स में पिछले 10 साल में किशोर यूथेनेशिया के पांच ही मामले सामने आए.

एएम/एजेए (एएफपी, डीपीए)

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