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विज्ञान

बच्चे पैदा करो, मिलेंगे ढेरों सरकारी फायदे

दुनिया में ऐसे मुल्कों की तादाद बढ़ रही है जो बच्चे पैदा करने पर सुविधाएं और इनामों की खैरात बांट रहे हैं. पहले जापान, फिर यूरोपीय देश और अब दक्षिण कोरिया भी इस कतार में आ गया है. इसकी वजह इन देशों में घटती आबादी है.

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बच्चे का जन्म हो, तो खुशियां हर जगह मनती हैं लेकिन दक्षिण कोरिया की सरकार लोगों को खुशी मनाने की कुछ और वजहें भी देना चाहती है. घर लेने के लिए आसान कर्ज, मां बनने वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश का अधिकार, दफ्तर में बच्चों की देखरेख की सुविधा और इसके लिए सरकारी इमारतों के इस्तेमाल की छूट, जवान लोगों को बुजुर्गों की जिम्मेदारी से मुक्त करने के लिए बुजुर्गों को काम, पेंशन और दूसरी सहूलियतें, नौकरीपेशा लोगों के लिए काम की परिस्थितियां ऐसी कि वे परिवार को वक्त दे सकें. ये सारी कवायद इसलिए कि लोग ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करें और देश में घटते जन्मदर को बढ़ाया जा सके.

इन सब के लिए पैसे की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने करीब 31 सौ अरब रुपये की रकम अलग से निकाल कर दे दी है. दक्षिण कोरिया में औसत जन्मदर महज 1.15 फीसदी है जो आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों की औसत जन्मदर 1.71 से काफी कम है. देश के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या 1970 के

Flash-Galerie Sechs Babies

मुकाबले बस आधी रह गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय को उम्मीद है कि अगर उनकी योजना कामयाब रही तो 2020 तक दक्षिण कोरिया का औसत जन्मदर ओईसीडी के जन्मदर के बराबर हो जाएगी.

वैसे सुविधाएं देकर जन्मदर बढ़ाने में जुटा दक्षिण कोरिया अकेला देश नहीं है. जापान और यूरोपीय देश पहले से ही ऐसा कर रहे हैं. नए जमाने के ढर्रे पर चल रहा जीवन लोगों को परिवार बनाने का मौका नहीं दे रहा. इन देशों की चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि बुजुर्गों की तादाद बढ़ रही है और जवान कम हो रहे हैं. अब जब काम करने वाले जवान हाथ ही नहीं होंगे तो बुजुर्गों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा और हां, आर्थिक स्थिति को भी तो संभालना है. डर सिर्फ अपनी नस्ल के घटने का ही नहीं है बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर होने की चिंता भी इन्हें परेशान कर रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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