बच्चे के लिए पिता को नहीं मिलती छुट्टी | दुनिया | DW | 14.06.2018
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दुनिया

बच्चे के लिए पिता को नहीं मिलती छुट्टी

बच्चा होने पर क्या पिता को उसके पास रहने की जरूरत नहीं होती? क्या बच्चे के लिए पिता का होना, उतना ही जरूरी नहीं, जितना मां का होना? तो फिर पिता को बच्चे की देखरेख के लिए काम से छुट्टी क्यों नहीं मिलती?

कामकाजी माओं को बच्चा पैदा होने के बाद दफ्तर से छुट्टी मिलती है. कितने दिन की छुट्टी मिलेगी, यह हर देश में अलग अलग है लेकिन मां का बच्चे के साथ रहना जरूरी है, इस पर कहीं कोई शक नहीं है. लेकिन जब बात पिता की आती है, तो आज भी समाज के बड़े हिस्से में यह सोच दिखती है कि पिता को बच्चे के पास रहने की क्या जरूरत है.

बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ के आंकड़े भी यही दिखाते हैं. यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में दो तिहाई पिता ऐसे हैं जिन्हें बच्चा होने पर एक भी छुट्टी नहीं मिलती. एक साल से कम उम्र के करीब नौ करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिनके पिता को "पेड लीव" यानी काम से बिना तन्खाव कटे छुट्टी नहीं मिली. ये आंकड़े 92 देशों के हैं, जहां बच्चा होने पर पुरुषों के लिए पेड लीव का कोई प्रावधान नहीं है. यूनिसेफ ने इन देशों से गुजारिश की है कि वे परिवार के हक में नीतियां बनाएं. यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फोरे ने एक बयान में कहा है, "शुरू से ही माता और पिता के साथ सकारात्मक और सार्थक संपर्क जीवन भर के लिए बच्चों के दिमागी विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है, इससे वे ज्यादा स्वस्थ और सुखी रह पाते हैं और उनकी सीखने की क्षमता भी बढ़ती है,"

दुनिया भर में 109 देश ऐसे हैं जहां पैटर्निटी लीव यानी बच्चा होने पर पुरुषों को छुट्टी दी जाती है. जर्मनी इनमें सबसे आगे है. हालांकि छुट्टी लेने पर पिताओं को पूरा वेतन नहीं मिलता. कुल 14 महीने की छुट्टी में माता पिता आपस में मिल कर निर्धारित कर सकते हैं कि कौन कितना वक्त दफ्तर से दूर रहना चाहता है. इसके बाद फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, दक्षिण कोरिया और स्वीडन का नंबर आता है. इसके विपरीत अमेरिका में ना ही महिलाओं को पेड लीव मिलती है और ना पुरुषों को. नौकरी से छुट्टी लेने पर माता पिता को वेतन नहीं दिया जाता. वहीं भारत उन देशों में से है, जहां पैटर्निटी लीव का कोई प्रावधान नहीं है. भारत में महिलाओं को काम से 12 हफ्ते की छुट्टी मिला करती थी. साल 2017 में आए मैटरनिटी अमेंडमेंट बिल के बाद इसे बढ़ा कर 26 हफ्ते कर दिया गया है. इसके बाद महिलाओं के लिए घर से काम करने का भी विकल्प दिया गया है. लेकिन पुरुषों के लिए ऐसी कोई नीति अब तक देश में नहीं बनाई गई है.

यूनिसेफ पुरुषों के लिए 16 हफ्ते की पेड लीव दे कर एक मिसाल कायम कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र की बाकी सभी एजेंसियों में पुरुषों को चार हफ्ते की ही छुट्टी दी जाती है.

ईशा भाटिया (डीपीए)

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