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मनोरंजन

बच्चे की रुलाई पहचानने में माहिर

अक्सर सुनते आए हैं कि मांएं अपने बच्चों की रुलाई पिता से बेहतर पहचानती हैं. लेकिन फ्रांस के रिसर्चरों ने इन मान्यताओं को गलत पाया है कि बच्चे की रोने की आवाज को पहचानने में मां पिता से बेहतर हैं.

मां की सहज प्रवृत्ति की बात को तीन दशक पहले तब वैज्ञानिक समर्थन मिला जब दो परीक्षणों में इस बात की पुष्टि हुई. एक परीक्षण में पाया गया कि अपने बच्चे की रोने की आवाज पहचानने में महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुना ज्यादा सटीक थीं.

लेकिन फ्रांसीसी वैज्ञानिकों के नए सर्वे का कहना है कि इस मामले में पुरुष और महिलाएं दोनों ही बराबर क्षमता रखती हैं. बच्चों की रुलाई पहचानने की सटीकता बच्चों के साथ बिताए जाने वाले समय पर निर्भर करती है. माता-पिता में से जो अपने बच्चे के साथ ज्यादा समय गुजारता है, वह उसके रोने की आवाज को बेहतर ढंग से पहचान सकता है.

फ्रांस के सेंट एटिएन यूनिवर्सिटी में निकोला मैथेवों की टीम ने 58 से 153 दिन के 29 शिशुओं की रोने की आवाज तब रिकॉर्ड की जब उन्हें नहलाया जा रहा था. उनमें से 15 बच्चे फ्रांस में थे जबकि 14 कॉन्गो में थे. परीक्षण में अफ्रीका और यूरोप के बच्चों को सैंपल इसलिए किया गया कि नतीजे पर स्थानीय संस्कृति और पारिवारिक आदतों के असर को परखा जा सके.

इस परीक्षण में भाग लेने वाली सभी मांएं और करीब आधे पिता हर दिन अपने बच्चे के साथ 4 घंटे से ज्यादा समय गुजारते थे. बाकी पिता अपने बच्चे के साथ 4 घंटे से कम समय रहते थे. माता पिता को एक उम्र के पांच बच्चों की तीन तरह की रोने की आवाजें सुनवाई गईं, जिनमें से एक उनके अपने बच्चे की थी. यह परीक्षण दो बार किया गया और उनसे अपने बच्चे की आवाज पहचानने को कहा गया.

औसत रूप से 90 प्रतिशत मामलों में माता-पिता अपने बच्चे की आवाज पहचानने में कामयाब रहे. मांओं ने इसमें 98 प्रतिशत सटीकता दिखाई जबकि बच्चे के साथ 4 घंटे से ज्यादा समय बिताने वाले पिताओं ने 90 प्रतिशत की सटीकता दिखाई. अपने बच्चों के साथ चार घंटे से कम समय गुजारने वाले पिता सिर्फ 75 प्रतिशत मामलों में उनकी आवाज पहचान पाए.

इस सर्वे में भाग लेने वाले माता-पिताओं में ऐसे लोग भी थे, जिन्हें हर दिन दूसरे बच्चों की रोने की आवाज भी सुननी पड़ती थी. अफ्रीका में यह आम है जहां संयुक्त परिवारों में एक से ज्यादा बच्चे होते हैं. ऐसे मामलों में सटीकता का अनुपात 82 प्रतिशत था.

नेचर कम्युनिकेशन पत्रिका में प्रकाशित होने वाले सर्वे में कहा गया है कि मां की स्वाभाविक प्रवृत्ति का सिद्धांत सही नहीं है क्योंकि 1970 और 1980 के दशक में हुए परीक्षणों में पिताओं द्वारा बच्चों के साथ बिताए गए समय पर ध्यान नहीं दिया गया है.

सर्वे का कहना है कि जैविक रूप से पुरुष और महिला सहयोगी जनक हैं, इसलिए बच्चे की रक्षा करने के बुनियादी तंत्र में किसी एक का दूसरे से बेहतर होना असंगत है. सर्वे कहता है, "मां और बाप दोनों अपने बच्चे की रोने की आवाज यकीन के साथ और समान रूप से पहचान सकते हैं."

उनकी क्षमता को प्रभावित करने वाला एकमात्र कारक बच्चे के साथ बिताया गया समय है और आधुनिक पिता अपने बच्चे के साथ पहले की तुलना में कहीं ज्यादा समय गुजारने लगे हैं. दुनिया के जिन हिस्सों में ऐसा नहीं है, वहां भी आदतें बदल रही हैं.

एमजे/एनआर (एएफपी)

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