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दुनिया

बंधक कांड: गम में डूबा ऑस्ट्रेलिया

बंदरगाह वाले शहर सिडनी में मंगलवार को लिंड्ट कैफे में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देने जनसैलाब उमड़ पड़ा. आम तौर पर आराम पसंद इस शहर में सदमे और शोक की लहर है.

सिडनी के मार्टिन प्लेस में लिंड्ट कैफे के पास ही फूल की दुकानों में फूलों की इतनी मांग है कि दुकानदार ग्राहकों को संभाल नहीं पा रहे हैं. वारदात वाली जगह के पास ही लोग फूल रखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. नम आंखों के साथ लोग 16 घंटे तक चले बंधक संकट में मारे गए लोगों को याद कर रहे हैं. सिडनी हार्बर ब्रिज में काम करने वाले टॉम हैरिस कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ और यह हमें बहुत दुखी कर रहा है." हैरिस भी अस्थायी स्मारक पर एक गुलदस्ता लेकर आए हैं. वे कहते हैं, "मैं बहुत दुखी महसूस कर रहा हूं और मैं असहाय लोगों के लिए दुखी महसूस कर रहा हूं."

सिडनी के वित्तीय जिले में सोमवार सुबह को लिंड्ट कैफे में बंदूकधारी द्वारा लोगों को बंधक बनाए जाने के बाद से ही पूरे ऑस्ट्रेलिया में भावनाएं उछाल मार रही थीं. ज्यादातर बंधक लिंड्ट कैफे से भागने में कामयाब हुए लेकिन कैफे का 34 वर्षीय मैनेजर और तीन बच्चों की मां इस संकट में मारी गईं. वारदात में छह लोग भी घायल हुए, जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं.

बंधक प्रकरण खत्म होने के साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिम समुदाय के प्रति एकजुटता दिखाने का संदेश वायरल हो गया. हॉलीवुड के जाने माने फिल्म अभिनेता रसल क्रुक समेत कई जानी मानी हस्तियों ने भी हर धर्म के लोगों के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को बढ़ाने वाले इस अभियान से जुड़ कर इसे और गति दी है. रसल का बचपन सिडनी में गुजरा है और यहां उनका मकान भी है.

मुस्लमानों के साथ एकजुटता

ट्विटर हैशटैग #illridewithyou वाले अभियान की शुरुआत यहां की एक महिला रशेल जैकब्स के फेसबुक वॉल पर एक संदेश लिखने से हुई. बंधक संकट के बाद रशेल ने अपने फेसबुक पर लिखा था, "स्टेशन पर एक मुस्लिम महिला अपने सिर से कपड़े को हटा कर ट्रेन की ओर बढ़ रही थी. मैं दौड़ कर उसके पास गई और कहा कि सिर को ढंक लो. मैं तुम्हारे साथ चलूंगी." इसके बाद यह वाकया ट्विटर पर वायरल हो गया.

इस अभियान से एशिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका समेत विश्व के कई देश जुड़ गए हैं. इस हैशटैग को कम से कम 30 लाख लोगों ने फॉलो किया है और यह संख्या समय बीतने के साथ बढ़ रही है.

लिंड्ट कैफे में बंधक बनाने वाले की पहचान ईरानी मूल के मन हारून मोनिस के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक हारून का आपराधिक इतिहास रहा है. हारून यौन शोषण और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के परिजनों को धमकी भरे पत्र भेजने का दोषी रहा है. सिडनी के समाचारपत्र द डेली टेलीग्राफ ने अपने पहले पन्ने पर हेडलाइन "बुराई का हमारे दिलों पर हमला" लगा कर राष्ट्रीय मिजाज जाहिर किया. सरकारी इमारतों पर झंडे आधे झुका दिए गए हैं. श्रद्धांजलि सभा के पास खड़े न्यू साउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त एंड्रयू पी स्किपियोन ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं दुखी हो सकता हूं."

मार्टिन प्लेस के पास इकट्ठा हुए लोगों में से एक टेरी लुसिया कहती हैं, "मार्टिन प्लेस एक खूबसूरत इलाका है लेकिन मैं आज सन्न हूं. मुझे लगता है कि हमने कुछ चीज खो दी है, वह चीज जो हमें अहसास दिलाती थी कि हम सुरक्षित हैं... यह बहुत परेशान करने वाला है... मुझे लगता है कि हमने कल अपनी मासूमियत को खो दिया." एंजेलकिा हैफा कहती हैं, "वह कोई भी हो सकता था और... उन्होंने कुछ नहीं किया है. वे लोग बिलकुल बेगुनाह हैं और अपनी जान गंवा दी. उन अभागे परिवारों के लिए उदास कर देने वाला है."

घटनास्थल पर मौजूद मुस्लिम समुदाय के कई प्रतिनिधियों में से एक मरियम वइसजदेह कहती हैं कि वे आम ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की प्रतिक्रिया देखकर प्रेरित हैं. फूल अर्पित करने के बाद मरियम कहती हैं, "सिडनी में कल जो हादसा हुआ, उसने पृष्ठभूमि, धर्म या फिर जातीय पहचानों को विचार किए बिना ऑस्ट्रेलियाइयों को वास्तव में साथ लाया है."

एए/एजेए(एएफपी, रॉयटर्स, एपी)

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