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मनोरंजन

बंद हो जाएगा आपका टीवी

भारत में डिश एंटीना के बढ़ते असर के बावजूद अब भी ज्यादातर केबल के जरिए ही टीवी देखा जाता है. सरकार और ऑपरेटरों के बीच विवाद में फंसे ग्राहकों को सूझ नहीं रहा कि वे आखिर क्या करें.

इस विवाद पर अंकुश लगाने के लिए पहले सरकार ने सेट टॉप बाक्स लगाना अनिवार्य कर दिया. लेकिन उसके बावजूद विवाद नहीं थमा है. अब विवाद का ताजा मुद्दा है सैफ यानी सब्सक्राइबर एप्लीकेशन फॉर्म और कैफ यानी चैनल एप्लीकेशन फॉर्म. दरअसल यह फॉर्म सेट टॉप बाक्स लेते समय ही भरवाए जाने थे. भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण ट्राई ने वह निर्देश दिया था, लेकिन उसकी अनदेखी की वजह से अब सरकार ने समयसीमा तय कर दी है.

टीवी कैसे देखेंगे

यह सारा विवाद टैक्स और इस धंधे के जरिए होने वाली बेहिसाब कमाई की चोरी को लेकर है. केबल ऑपरेटर एमएसओ को अपने ग्राहकों की सही तादाद नहीं बताते और एमएसओ सरकार को. इस तरह वे हर महीने करोड़ों की रकम बचा लेते हैं. अब उन दोनों फॉर्म को अपने डाटाबेस पर अपलोड करने से एमएसओ और सरकार को ग्रहकों की सही तादाद पता चल जाएगी. उस हालत में टैक्स की पूरी रकम चुकानी होगी.

सैफ में ग्राहक का नाम और पूरा पता लिखना होता है. ट्राई के नियमों के मुताबिक, सैफ जमा नहीं करने तक सेट टॉप बाक्स चालू नहीं हो सकता. लेकिन इस नियम की जमकर अनदेखी की गई है. मिसाल के तौर पर कोलकाता में केबल कनेक्शन वाले लगभग 28 लाख टेलीविजन सेटों में सेट टॉप बाक्स लगा है. लेकिन महज नौ लाख सैफ जमा किए गए हैं.

ट्राई का नया निर्देश

कोलकाता के अनिरुद्ध पाल कहते हैं, "पिछले साल दर्गुा पूजा से पहले अचानक केबल ऑपरेटर ने कहा कि सेट टॉप बाक्स नहीं लेने पर टीवी नहीं देख सकेंगें. तब 999 रुपए का भुगतान कर इस पर लगाया था लेकिन उसके बावजूद कई चैनल देखने को नहीं मिलते. अब कई नए फॉर्म जमा करने होंगे." एमएसओ के एक प्रवक्ता सुदीप घोष कहते हैं, "जिन केबल ऑपरेटरों ने हमें पैसे नहीं दिए हैं, उनके कुछ चैनलों का प्रसारण हमने बंद कर दिया है."

एमएसओ और केबल ऑपरेटरों के बीच जारी विवाद के बीच ही ट्राई ने नया निर्देश जारी कर दिया. उसने कहा है कि सभी ग्राहकों से चैनल एप्लीकेशन फॉर्म (कैफ) लेना होगा. जो लोग 30 अगस्त तक यह फॉर्म जमा नहीं करते वे 31 अगस्त से कोई चैनल नहीं देख सकेंगे. ट्राई के इस निर्देश से एमएसओ पर तो पहाड़ ही टूट पड़ा. इस निर्देश के बाद चार तरह के पैकेज बनाए गए और हड़बड़ी में कैफ फॉर्म छपवाया गया. लेकिन अब तक 80 फीसदी से ज्यादा ग्राहकों ने वह फॉर्म नहीं भरा है.

क्यों नहीं रखते हिसाब

महानगर के धीरेंद्र मान्ना सवाल करते हैं कि जब यह दोनों फार्म पहले ही भरवाए जाने थे ऐसा क्यों नहीं किया गया. इस सवाल का जवाब है, पैसा. दरअसल केबल टीवी के धंधे मे बेईमानी में सबसे बड़ी ईमानदारी है. केबल टीवी ऑपरेटर न तो एमएसओ को बताता है कि इलाके में उसके कितने ग्राहक हैं और न ही एमएसओ सरकार को इसकी जानकारी देता है. वजह यह है कि ग्राहकों की संख्या हिसाब से ही पैसे और कर चुकाने होंगे. मिसाल के तौर पर महज कोलकाता से मनोरंजन कर के तौर पर राज्य

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सरकार को साल में लगभग 35 करोड़ व केंद्र को सेवा कर के तौर पर लगभग 70 करोड़ रुपये मिलेंगे. लेकिन ग्राहकों की सही तादाद को छिपा कर केबल ऑपरेटर और एमएसओ बाकी रकम खुद डकार रहे हैं.

एमएसओ के प्रवक्ता सुरेश सेठिया कहते हैं, "हम ट्राई का निर्देश लागू करने के लिए कृतसंकल्प हैं. जो केबल ऑपरेटर कैफ व सैफ के मामले में सहयोग नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी." लेकिन केबल ऑपरेटर मृणाल चटर्जी कहते हैं कि यह पूरी समस्या एमएसओ की वजह से पैदा हुई है. वह कहते हैं, "अब तक हमें कैफ व सैफ फॉर्म ही नहीं मिला है. अब 30 अगस्त के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा करना संभव नहीं है." ट्राई की कोलकाता स्थित क्षेत्रीय शाखा की सलाहकार रूपा पाल चौधरी कहती हैं, "हमने एमएसओ को साफ बता दिया है कि डिजिटलाइजेशन पूरी तरह लागू करने का जिम्मा उनका है. सैफ व कैफ का जिम्मा एमएसओ का है. तय समयसीमा के भीतर वह काम नहीं होने पर हम कड़े कदम उठाएंगे."

डीटीएच की बिक्री बढ़ी

केबल टीवी देखने की राह में आई इस ताजा समस्या के बाद बंगाल समेत पूरे देश में डिश टीवी की मांग तेजी से बढ़ी है. यह केबल के मुकाबले कुछ महंगा जरूरी है, लेकिन इसमें दूसरी कोई समस्या नहीं है. केबल टीवी ऑपरेटर मृणाल चटर्जी कहते हैं कि केबल पर कई चैनलों का प्रसारण बंद हो चुका है. ऐसे में लोगों का डिश टीवी की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है. पिछले साल अक्तूबर तक कोलकाता में डीटीएच के ग्राहकों की तादाद साढ़े सात लाख थी जो अब बढ़कर 12 लाख से ज्यादा हो गई है. टालीगंज इलाके की कृष्णा बोस कहती हैं, "पहले ही काफी विवाद के बाद हमें सेट टॉप बाक्स मिला है. अब एक नई समस्या हुई तो काफी दिक्कत होगी. इसलिए हमने डिश एंटीना लगाने का फैसला किया है."

लेकिन क्या यह विवाद आसानी से सुलझेगा? केबल टीवी के धंधे के जानकारों को तो इसकी उम्मीद कम ही है. यानी 31 अगस्त तक इसके ग्राहकों की सांसें अटकी ही रहेंगी.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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