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दुनिया

बंदूक होगी पर हिंसा नहीं

हाल के सालों में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें किसी किशोर ने स्कूल में गोलीबारी की, या सुपर मार्केट में गोलियां चलाई. घरों में बंदूक हो या न हो, इस बहस के बीच अब एक नई तकनीक भी चर्चा में है. जो इसे रोक सकती है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी तकनीक होनी चाहिए जिसमें बंदूक का ट्रिगर किसी बच्चे के हाथों से चल ही न सके. ऐसे नए तरीके भी निकालने की कोशिश हो रही है जिसमें घरेलू हिंसा के आरोपों के चलते जिस व्यक्ति पर कानूनी प्रतिबंध लगे हों, उसकी बंदूक जब्त की जा सके. विवादित होने के बावजूद इस तरीके को पहली बार अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में आजमाया गया है. अमेरिका में बंदूकों के कारण होने वाली हिंसा काफी आम है.

कभी स्कूलों, कभी सिनेमाघरों तो कभी किसी और सार्वजनिक स्थान पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं. समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार बंदूकों की संख्या के मामले में अमेरिका में औसतन हर एक आदमी पर एक बंदूक है. साथ ही यह भी माना जाता है कि वहां काफी शक्तिशाली गन लॉबी होने और हथियार रखने वालों के संवैधानिक अधिकारों के चलते भी इस पर नियंत्रण कठिन हो जाता है.

भीड़ पर गोली चलाने की घटनाओं में अक्सर मानसिक बीमारियों से ग्रसित लोगों की ओर इशारा जाता है. उत्तरी कैरोलाइना के ड्यूक विश्वविद्यालय में मनोरोग-विज्ञान के प्रोफेसर जेफरी स्वानसन कहते हैं, "हमारे देश में बंदूकों का अकूत भंडार है. करीब 31 करोड़ बंदूकें तो निजी हाथों में हैं."

Barack Obama Waffengesetze in den USA

अमेरिका में जितने लोग हैं उतनी ही बंदूकें भी

अमेरिकन एसोसिएशन फॉर दि एडवांसमेंट ऑफ साइंस में बोलते हुए प्रोफेसर स्वानसन ने कहा कि पूरे देश में दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाली दुर्घनाओं में ऐसी घटनाएं सिर्फ पांच फीसदी हैं. ऐसे में बंदूकों को गलत हाथों में पड़ने से रोकना और जरूरी हो जाता है. ऐसे में 'चाइल्डप्रूफ ट्रिगर' जैसी तकनीकें मददगार साबित हो सकती हैं. अगर इस तकनीक को बंदूकों में जोड़ दिया जाए तो बंदूक का ट्रिगर सिर्फ लाइसेंसधारी व्यक्ति ही दबा पाएगा. कुछ यूरोपीय देशों में इन 'स्मार्ट-ट्रिगर' तकनीकों का इस्तेमाल होने लगा है.

अमेरिका के न्याय विभाग की एक टास्क फोर्स ने हाल ही में कहा कि वह यह तकनीक अमेरिका में व्यापक स्तर पर लाने के लिए तैयार है. अमेरिका में हर साल करीब 23,000 लोगों की बंदूक से गोली मारकर हत्या होती है, जबकि 38,000 से भी ज्यादा लोग गोली मारकर आत्महत्या कर लेते हैं.

अमेरिका के मैरीलैंड में स्थित जॉन्स हॉप्किन्स सेंटर फॉर गन पॉलिसी एंड रिसर्च के निदेशक डेनियल वेबस्टर कहते हैं, "यह भविष्य है, लेकिन यही वर्तमान भी है." वेबस्टर को लगता है कि इससे किशोरों में होने वाली आत्महत्याओं, बच्चों की गैर इरादतन हत्याओं और चोरी की हुई बंदूकों से अंजाम दिए गए अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी. वैसे अभी ये तकनीक काफी मंहगी है. इसे एक बंदूक में लगाने के लिए ही हजारों डॉलर का खर्च आता है. वेबस्टर को उम्मीद है कि जैसे जैसे 'स्मार्ट-ट्रिगर' तकनीकें बाजार में फैलेंगी, उन्हें लगाना सस्ता हो जाएगा. पिछले साल अमेरिका का न्यू जर्सी वह पहला प्रांत बना जिसने कानून पास कर चाइल्डप्रूफ तकनीक को बंदूकों के लिए जरूरी बना दिया.

आरआर/एएम (एएफपी)

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