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ताना बाना

बंगाल में एक और सिंगूर की तैयारी

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर सिंगूर और नंदीग्राम दोहराने की तैयारी चल रही है. इस बार माकपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक लड़ाई का मैदान बन रहा है राजधानी कोलकाता से सटा राजारहाट कस्बा.

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यहां उपनगरी बसाने के लिए सरकार ने कुछ साल पहले बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण किया था. ममता बनर्जी ने सरकार पर जबरन अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए कम से कम दस फीसदी जमीन किसानों को लौटाने की मांग में आंदोलन शुरू किया है. पार्टी ने उन किसानों को साथ लेकर धरना और प्रदर्शन शुरू किया है जिनकी जमीन का कथित तौर पर जबरन अधिग्रहण किया गया था. तृणमूल ने राजारहाट में जमीन अधिग्रहण में हुए कथित वित्तीय घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है.


माकपा और तृणमूल आमने-सामने

राजारहाट के सवाल पर तृणमूल और माकपा में तलवारें खिंच गई हैं. एक ही मुद्दे पर दोनों दलों ने एक ही दिन उस इलाके में रैली कर अपने इरादे जता दिए हैं. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजारहाट का जमीन अधिग्रहण एक बड़े मुद्दे के तौर पर उभर सकता है. ममता बनर्जी ने राजारहाट के उपनगरी बनने से प्रभावित किसानों को सिंगूर व नंदीग्राम की तरह न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाने का ऐलान किया है.

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इसी खेती की जमीन पर नए घर उगाए जाएंगे

लेकिन अबकी माकपा ने भी कमर कस ली है. ममता की रैली और जमीन के जबरन अधिग्रहण के आरोपों के बाद सरकार ने अगले दिन तमाम अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन देकर दावा किया कि राजारहाट के लोगों ने अपनी मर्जी से सरकार को जमीन दी है और इसके एवज में उनको बेहतरीन पुनर्वास पैकेज दिया गया है. इस विज्ञापन में कुछ दर्जन ऐसे लोगों की तस्वीरें भी छपी थी जिन्होंने कथित तौर पर अपनी मर्जी से जमीन दी है.

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