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दुनिया

फ्रांस में हर साल 400 किसान करते हैं आत्महत्या

भारत के कई राज्यों में कर्ज और खराब फसल की समस्या से जूझते किसानों की आत्महत्या की खबरें सामने आती हैं. लेकिन फ्रांस जैसे विकसित देश में भी किसानों का आत्महत्या के लिए मजबूर होना हैरान कर देने वाला है. क्या वजह है.

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फ्रांस में स्वास्थ्य सर्वे इंस्टीट्यूट ने अपने एक अध्ययन में पाया है कि ऑफिस कर्मचारियों की तुलना में किसानों में आत्महत्या के तीन गुना मामले सामने आ रहे हैं. वैसे तो शहरों में रहने वाले लोग गांव के सरल जीवन के सपने देखते हैं लेकिन हर साल फ्रांस में 400 किसान आत्महत्या कर रहे हैं. यानी हर दिन एक आत्महत्या से भी ज्यादा.

ज्यां मेरी की उम्र 50 साल है और वह डुबस शहर में एक किसान हैं. कड़ाके की सर्दी में सारा दिन कंप्यूटर के सामने बिताने के बाद खचाखच भरी बस में ट्रैफिक जाम में फंसते हुए घर लौटने के मुकाबले शायद लोगों को ज्यां मेरी की जिंदगी पसंद आए. लोग सोचते हैं कि ज्यां मेरी दिन भर गायों को चराने के बाद उन्हें शाम को वापस तबेले में ले आते हैं और यह तो बिलकुल भी मुश्किल नहीं. लेकिन गांव की जिंदगी इतनी आसान भी नहीं है और ज्यां मेरी काफी तनावग्रस्त हैं.

उनकी मां की काफी उम्र हो चुकी है और काम करने में अब वह हाथ नहीं बंटा सकती. ज्यां मेरी की तीन बेटियां हैं लेकिन वह अभी इतनी बड़ी नहीं कि काम में उनकी मदद कर सकें. काम भी मुश्किल है. साफ सफाई करना, गाय को सुबह शाम दुहना, गोबर साफ करना, गायों को चारा डालना और भी न जाने क्या.

ज्यां मेरी लगातार काम से काफी थक जाते हैं. "मुझे घंटों तक काम करना होता है. मैं सो नहीं पाता क्योंकि मुझे अगले दिन का डर सताने लगता है. मैं बुरी तरह थक चुका हूं. मेरा वजन घट कर 69 किलो हो गया है. मैं कई बार सोचता हूं, क्या मैं खुद को गोली मार लूं. मैं कई बार डॉक्टर के पास जाने की भी सोचता हूं. लेकिन बाकी लोग इतना बर्दाश्त नहीं कर पाए. पास के एक किसान ने खुद को फांसी लगा ली. एक दोस्त ने सिर में गोली मार ली. वह अकेला था इसलिए उसकी परेशानी मैं समझ सकता हूं."

ज्यां मेरी ने अपना फार्म बेच दिया लेकिन आज वह जिंदा तो हैं. वह कहते हैं कि उनके पास उनकी पत्नी है. फ्रांस में किसानों की आत्महत्या के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि अधिकतर किसान अकेले रहते हैं और उन्हें भावनात्मक सहारा नहीं होता. किसान फ्रांसीसी समाज में अलग थलग पड़ता जा रहा है और पिछले 30 सालों में 3 लाख डेरी और भेड़ फार्म फ्रांस में बंद हो चुके हैं. किसानों पर वैसे काफी दबाव रहता है कि वे अपने पैतृक व्यवसाय को न छोड़ें. बेसनकोन यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफेसर दोमिनिक ज्याक कहते हैं किसान दबाव में जी रहे हैं.

"किसान के रूप में सफल होने के लिए काफी मेहनत की जरूरत है. अगर पैतृक व्यवसाय के रूप में आप किसान बनते हैं लेकिन विफल हो जाते हैं तो सारी जिम्मेदारी आपकी ही बनती है. इससे समाज में अच्छी नजर से नहीं देखा जाता. अगर लोग किसान बनना छोड़ देंगे तो फिर गांवों का जीवन पूरी तरह बदल जाएगा. हर तरफ जंगल ही होगा."

लेकिन किसान संघर्ष भी कर रहे हैं. 30 साल के डेरी किसान फिलिप का कहना है कि वह अपने काम से खुश हैं. लेकिन आसपास आत्महत्याओं की घटनाओं से परेशान हैं. इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने एक संगठन बनाया है जिसका नेतृत्व एक मनोवैज्ञानिक कर रहा हू. फिलिप मानते हैं कि गांवों में पुरुष कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन अपनी दिक्कतों पर चुप्पी लगा जाते हैं. इसके चलते उनका तनाव एक दिन गोली, फांसी या फिर जहर से आत्महत्या के रूप में सामने आता है. फ्रांस के कुछ इलाकों में आपातकालीन नंबर भी शुरू किए गए हैं जिन पर तनावग्रस्त किसान बात कर सकते हैं.

रिपोर्ट: जॉन लॉरेन्सन

संपादन: एस गौड़