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दुनिया

फ्रांसीसी रेल पर नाजी फंदा

अमेरिका चाहता है कि फ्रांस की रेल कंपनी एसएनसीएफ होलोकॉस्ट पीड़ितों को मुआवजा दे. फ्रांस में नाजी शासन के दौरान एसएनसीएफ से 76,000 यहूदियों को यातना शिविर भेजा गया था.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि फ्रांस के साथ उसका समझौता हो सकेगा कि फ्रांस की रेल कंपनी एसएनसीएफ मारे गए यहूदियों के रिश्तेदारों को मुआवजा दे. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने पुष्टि की कि अमेरिका और फ्रांस इस मुआवजे पर बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "मामले से जुड़े लोग कोई ऐसा काम नहीं करें जिससे मुआवजे पर जारी बातचीत पर कोई असर पड़े. हमारा साझा लक्ष्य है कि ये बातचीत जितनी जल्दी हो सके पूरी हो."

लेकिन उन्होंने नाराजगी भी जताई कि मेरीलैंड और न्यू यॉर्क प्रांतों की एसेंबलियां इसमें अड़चन पैदा कर रही हैं. फ्रांस में जर्मनी की नाजी सत्ता के दौरान एसएनसीएफ ने करीब 76,000 यहूदियों को 1942 से 1944 के बीच यातना शिविर में भेजा. इनमें से सिर्फ 3,000 बच पाए.

एसएनसीएफ ने कहा कि वह "नाजी तंत्र में जकड़ा" हुआ था. इसलिए उसके पास कोई और विकल्प था भी नहीं तो मुआवजा फ्रांस की सरकार को देना चाहिए.

लेकिन इस संवेदनशील मुद्दे के साथ एसएनसीएफ और मेरीलैंड के बीच का एक अनुबंध फंस गया है. मेरीलैंड और फ्रांसीसी रेल कंपनी के बीच 2.2 अरब डॉलर का अनुबंध हुआ है, जिसके मुताबिक फ्रांसीसी रेल कंपनी अमेरिकी राज्य मेरीलैंड के स्थानीय प्रोजेक्ट में शामिल हो सकेगी. यह काम एसएनसीएफ की सहयोगी कंपनी केओलिस को करना है. लेकिन मेरीलैंड एसेंबली के सदस्यों का कहना है कि फ्रांसीसी कंपनी पहले मुआवजा दे, उसके बाद ही काम मिल सकता है. लेकिन इस पर कोई कानूनी राय नहीं बन पाई और समझा जाता है कि केओलिस को 25 किलोमीटर लंबी हल्की रेल परियोजना के लिए आवेदन भरने दिया जाएगा. हालांकि फ्रांस की दूसरी रेल कंपनियां भी इसके लिए निविदा भर रही हैं और फैसला इस साल के आखिर या 2015 के शुरू में होगा.

होलोकॉस्ट के फ्रेंच पीड़ितों को एसएनसीएफ पहले ही छह अरब डॉलर मुआवजे के तौर पर दे चुका है.

एएम/एजेए (एएफपी)

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