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विज्ञान

फौलाद से ताकतवर लेकिन वजन में आधा

जर्मन कार कंपनी बीएमडब्ल्यू अपनी नई आई3 के साथ राह दिखा रही है कि कार्बन फाइबर जैसे हाइ टेक मैटेरियल के साथ कॉम्पैक्ट सिटी कार बनाना संभव है. और सबसे बड़ी बात है कि कार की कीमतें भी आसमान नहीं छुएंगी.

यह सच है कि आई3 कोई किफायती मिनी कार नहीं है. उसमें अत्यंत हल्के और अत्यंत मजबूत कार्बन फाइबर का इस्तेमाल होता है जिसे अब तक कारों के नियमित मॉडलों में नहीं लाया गया है. अब तक इसका व्यापक इस्तेमाल सिर्फ फॉर्मूला वन की कारों या एक्सक्लूसिव स्पोर्ट कार बनाने के लिए होता है. विशेष रूप से बनी स्पोर्ट कार निर्माताओं को ज्यादा मुनाफा दिलवाती हैं क्योंकि वे ऐसे ग्राहकों की मांग पूरी करते हैं जो स्टेट ऑफ आर्ट मैटेरियल वाली सुपर कार रखना चाहते हैं.

कार विशेषज्ञों का कहना है कि कार्बन फाइबर का बहुत ही अच्छा भविष्य है, हालांकि कार के मॉडलों में इस्तेमाल होने वाले कार्बन फाइबर की मात्रा खास मॉडल की ख्याति और ईंधन बचाने के लिए वजन घटाने की जरूरत पर निर्भर करेगी. कार में जिस कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया जाता है वह कार्बन फाइबर रीइंफोर्स्ड प्लास्टिक यानि सीएफआरपी है. हीट ट्रीटमेंट के जरिए इस मैटेरियल को सख्त और उच्च दबाव प्रतिरोधी सतह वाला बनाया जाता है. आई3 के मामले में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल कार की भारी बैटरी पैक के भार की भरपाई करने के लिए होता है.

बीएमडब्ल्यू के प्रवक्ता साइप्सेलुस फॉन फ्रांकेनबर्ग का कहना है कि कार्बन फाइबर के इस्तेमाल के पीछे यही मकसद था. वे कहते हैं, "सीएफआरपी का उपयोग हमारी वजन घटाने की रणनीति का अहम हिस्सा है." कार निर्माता का मानना है कि कार्बन फाइबर एकमात्र मैटेरियल है जो कार सुरक्षा की संशोधित शर्तों को पूरा करने की हालत में है. विशेषज्ञों का कहना है कि कार्बन फाइबर एल्युमिनियम से 20 फीसदी हल्का है और स्टील का आधा है. प्रतिद्वंद्वी कार निर्माता ऑडी कारों का वजन घटाने के लिए दशकों से एल्यूमिनियम पर जोर देती आई है.

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कार्बन फाइबर के दूसरे फायदे भी हैं. म्यूनिख टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रो. क्लाउस ड्रेक्सलर कहते हैं, "गाड़ी के हल्के वजन का मतलब है कि ब्रेक को छोटा किया जा सकता है और छोटी मशीन भी वही परफॉर्मेंस देगी." लेकिन कार्बन फाइबर का एक नुकसान यह है कि इसकी मरम्मत करना स्टील के मुकाबले मुश्किल है, जिसे वेल्ड किया जा सकता है. पूरे पार्ट को बदलना ज्यादा आसान है लेकिन वह खर्चीला होता है. ये भी वजह है कि कार्बन फाइबर आम इस्तेमाल में नहीं आ पाए हैं. ड्रेक्सलर को उम्मीद है कि पांच साल में कार्बन फाइबर का खर्च आधा हो जाएगा.

बीएमडब्ल्यू का कहना है कि पिछले पांच साल में उसने कार्बन फाइबर का खर्च आधा कर दिया है. उसके अमेरिका के कार्बन फाइबर प्लांट में उत्पादन बढ़ाया जा रहा है. आखेन यूनिवर्सिटी के लुत्स एकश्टाइन का कहना है कि आने वाले सालों में कार्बन फाइबर बनाने का खर्च स्टील बनाने के खर्च से ज्यादा रहेगा. यही वजह है कि प्रीमियम सेक्टर में बीएमडब्ल्यू के कुछ प्रतिद्वंद्वी अभी भी कार्बन फाइबर का इस्तेमाल करने से हिचक रहे हैं.

एमजे/ओएसजे (डीपीए)

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