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दुनिया

फेसबुक, ट्विटर पर लड़ता गाजा

"मैं पूरी जिंदगी गाजा में रहा हूं. युद्ध मेरे लिए नया नहीं है. लेकिन इस बार हमारी जिंदगी का सबसे डरावना लम्हा है." गाजा के मुहम्मद सुलेमान ने ट्विटर पर बार बार अपनी कहानी लिखी है.

इस्राएल ने जब हमले तेज किए, तो सुलेमान के ट्वीट भी तेज हुए, "मैं सोच रहा हूं कि बच जाऊंगा. लेकिन अगर नहीं बच पाया, तो याद रखना. मैं हमास नहीं और ना ही मैं आतंकवादी हूं. मुझे मानव ढाल भी नहीं बनाया गया. मैं तो घर पर हूं."

करीब 20 साल के सुलेमान के 35,000 फॉलोअर हैं. गाजा से लगातार ट्वीट करके उसने ट्विटर पर इतने लोग जुटाए हैं. उसके ट्वीट बताते हैं कि गाजा में लोगों का मूड कैसा है. वह बताता है कि मिस्र और इस्राएल ने गाजा में जो बैरिकेड लगाए हैं, उन्हें हटाने की जरूरत है. वह बता रहा है कि स्थिति अब बहुत खराब हो चुकी है, "खुली जेल में जीने की बजाय मैं इज्जत के साथ मरना चाहूंगा."

फरहा बाकर तो सिर्फ 16 साल की हैं. उन्होंने इस्राएली हमलों के बीच एक रात लगातार ट्वीट करना शुरू कर दिया. उनके कुछ हजार फॉलोअर थे लेकिन इस रात के बाद फॉलोवरों की संख्या 30,000 पार कर गई. उनके ट्वीट किसी किशोरी की डायरी है, जो मिनट दर मिनट के हालात को बयान कर रही है. एक पोस्ट में उसने लिखा, "यह मेरा इलाका है. मैं खुद को रोने से रोक नहीं पा रही हूं. शायद आज रात मैं मारी जाऊं." यह ट्वीट एक बजे रात का था, जिसके साथ इस्राएली विस्फोट के बाद लगी आग की तस्वीर भी थी. इससे पहले उसने ट्वीट किया था, "जंग की सबसे खराब रात".

Gazastreifen Nahostkonflikt 30.7.2014

गाजा में आधी रात को हुए हमले की तस्वीर

चीख कर मारती रॉकेट

उसने विस्फोट के वीडियो और साउंडक्लिप भी पोस्ट किए हैं. कुछ तस्वीरों में तो रोशनी इतनी ज्यादा है कि लग रहा है आधी रात नहीं, बल्कि दोपहर है. उसने अपनी खिड़की के बाहर हुए विस्फोट की आवाज कैद करके ट्वीट किया, "सैकड़ों बमों में से एक बम यह भी है. गाजा. आपको इसे सुनना पड़ेगा." उसका एक ट्वीट है, "जब भी मेरी छह साल की बहन रॉकेट गिरने की आवाज सुनती है, वह जोर से चिल्लाती है. वह अपनी चिल्लाहट में रॉकेट की आवाज दबाना चाहती है." उसके ज्यादातर ट्वीट अंग्रेजी में हैं.

पिछली बार जब इस्राएल ने 2008-09 में गाजा पर बड़ा हमला किया था, तो सोशल मीडिया इतना मजबूत नहीं था. लेकिन अब फेसबुक, ट्विटर और दूसरे माध्यमों से पल भर में बातें तेजी से फैल सकती हैं. कुछ जानकारों का कहना है कि इस्राएल पहले अपने पब्लिक रिलेशन से कई बातों को दबा लेता था. लेकिन इस बार युवाओं से उसे बड़ी चुनौती मिल रही है. इन युवाओं को दुनिया भर का साथ मिल रहा है.

कौन किसके साथ

ट्विटर पर #गाजाअंडरफायर का रोजाना तीन लाख बार जिक्र होता है, इसके मुकाबले #इस्राएलअंडरफायर का जिक्र सिर्फ 10,000 बार. इससे वैज्ञानिक तौर पर कोई बात साबित नहीं हो सकती लेकिन सोशल मीडिया के ट्रेंड का पता जरूर लगता है. संकटग्रस्त इलाकों में सलाहकार के तौर पर काम करने वाले अलबेनी एसोसिएट्स के पॉल बेल लिखते हैं, "अंतरराष्ट्रीय लोगों की नजर में इस्राएल युद्ध हार चुका है."

अमेरिका में गैलप सर्वे बताता है कि इस्राएल को वहां के लोगों का समर्थन जरूर है लेकिन दरार बढ़ रही है. सर्वे में शामिल 42 फीसदी लोगों ने कहा कि इस्राएल का कदम सही है, जबकि 39 फीसदी लोगों ने इसे गलत बताया. लेकिन 65 साल से ऊपर के 55 फीसदी लोगों ने इस्राएल को सही ठहराया, जबकि 18-29 उम्र के सिर्फ 25 फीसदी लोगों ने इसे सही कहा. सोशल मीडिया पर ज्यादा समय युवा लोग ही बिताते हैं.

एजेए/एमजे (डीपीए)

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