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दुनिया

फेसबुक के जरिए कानपुर में पहली एफआईआर दर्ज

कानपुर पुलिस ने जेनरेशन एक्स के जमाने में जगह बनाने की ओर कदम बढ़ा लिए हैं. उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर मिली जानकारी के आधार पर पहली शिकायत दर्ज कर ली है.

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कानपुर के कोहना थाने में पुलिस का एक जवान कंप्यूटर पर फेसबुक अकाउंट खोले बैठा था. नहीं, वह सोशल नेटवर्किंग के जरिए दोस्त नहीं बना रहा था. वह अपनी ड्यूटी कर रहा था. और फिर एक मेसेज मिला तो थाने में हलचल मच गई. यह फेसबुक पर आई पहली शिकायत थी.

उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर का कोहना थाना फेसबुक प्रोफाइल से मिली शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने वाला पहला पुलिस स्टेशन बन गया है. कोहना थाना इंचार्ज आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि ताबिश अहमद ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक जरिए शिकायत दर्ज कराई. अहमद का एक बैग खो गया है जिसमें उनके कई जरूरी दस्तावेज थे. पुलिस के फेसबुक अकाउंट पर जाकर अहमद ने यह जानकारी दी और अपना पता और फोन नंबर दर्ज करा दिया.

त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस को जैसे ही शिकायत मिली, अहमद से फोन पर संपर्क किया गया और जरूरी जानकारी हासिल की गई. इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और एक सब इंस्पेक्टर को मामले की जांच का काम सौंप दिया गया. फिर फेसबुक के जरिए ही अहमद को पूरी जानकारी दे दी गई.

कानपुर के डीआईजी अशोक जैन ने कहा कि कोहना थाने में दर्ज की गई यह शिकायत इस बात का संदेश देती है कि पुलिस अब फेसबुक के जरिए फौरन मामला दर्ज करेगी. शहर में कानून और व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए कानपुर पुलिस ने हाल ही में फेसबुक प्रोफाइल बनाया है. शहर के तीना थानों को इस प्रोफाइल से जोड़ा गया है.

लेकिन क्या फेसबुक पर दर्ज कराई गई शिकायत का कानूनी आधार है? इस सवाल के जवाब में कोहना थाने के इंचार्ज त्रिपाठी ने बताया, "चूंकि यह एक छोटी घटना है इसलिए हमने ताबिश अहमद की शिकायत का प्रिंट लेकर उसी के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली. लेकिन किसी बड़ी घटना की सूरत में हम पहले शिकायत करने वाले से बात करेंगे और तब कागज पर ही एफआईआर दर्ज करेंगे."

अब पुलिस फेसबुक पर अपराधियों के फोटो चस्पा करने के बारे में सोच रही है ताकि उन्हें जल्दी पकड़ा जा सके. डीआईजी जैन ने बताया कि लोग रिश्वत लेने वाले पुलिस अफसरों की जानकारी भी फेसबुक पर दे सकते हैं और उनका नाम जाहिर नहीं किया जाएगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एन रंजन

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