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खेल

फुटबॉल विश्व कपः कौन बनेगा बादशाह

विश्व कप फुटबॉल रोमांच की हदों को पार करने वाला ऐसा उत्सव है, जिसकी दीवानगी विश्व को अपने आगोश में भर लेती है. महीने भर तक दुनिया के हर खेल प्रेमी की निगाह उस छोटे से मैदान में होने वाले रोमांच में सिमटकर रह जाती है.

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जहां हर दिन सनसनी होती है, दिलों की धड़कनें तेज होती हैं और पसंदीदा टीम के हार जाने पर आंसू बह निकलते हैं.

विश्व की सर्वश्रेष्ठ 32 टीमें दक्षिण अफ्रीका में 11 जून से खेले जाने वाले विश्व कप फुटबॉल के 19वें संस्करण के लिए अपने जूतों के लैस कस चुकी हैं. दुनिया के इस अनूठे महामेले से बस परदा उठने ही वाला है.

हर विश्व कप नए सितारों को जन्म देता है और पुराने सितारों को श्रेष्ठता की कसौटी पर तौलता है. मैच के कई यादगार लम्हे इतिहास बनते हैं, सो अलग. इस विश्व कप की बात की जाए तो पूरी दुनिया एक तरफ होगी और दूसरी तरफ होगी लैटिन अमेरिका की दो टीमें, ब्राजील और अर्जेंटीना. यदि लातिन अमेरिकी दंतकथाओं को जरा सा भी मान लिया जाए तो यह बात सिद्ध हो जाती है कि मनुष्य ने पहली बार फुटबॉल अपने वंशजों की खोपड़ी से ही खेलना सीखा था.
ग्वाटेमाला, मेक्सिको और पेरू की सीमा के बीच अमेजन के घने जंगलों में आज से हजारों वर्ष पहले दक्षिण अमेरिका की तीन सभ्यताएं पनपीं. पहली थी मायंस, दूसरी इंका और तीसरी एजटेक. इतिहास गवाह है कि मायंस के काल में फुटबॉल का आविष्कार हुआ. तीनों सभ्यताओं के चिह्न आज भी पेरू, कोलंबिया, ब्राजील, मेक्सिको, इक्वाडोर और कोस्टारिका में देखे जा सकते हैं.

Flash-Galerie WM 1970 Pele Sieg Brasilien gegen Italien

आज भी हम ब्राजील या अर्जेंटीना का फुटबॉल देखते हैं या फिर यूरोपियन देश का फुटबॉल देखते हैं, तो फर्क तत्काल समझ में आ जाता है कि फुटबॉल दिल से भी खेला जाता है और दिमाग से भी. जो सभ्यता दक्षिण अमेरिका में पनपी थी, उसीका नतीजा है कि ब्राजीलियन और अर्जेंटाइन नाचते गाते दर्शकों की उपस्थिति के बीच वैसा ही टच फुटबॉल खेलते हैं जो हम सिर्फ सपनों में ही सोच सकते हैं. गोल करना किसी भी फुटबॉलर का लक्ष्य होता है, किंतु विपक्ष के किसी खिलाड़ी को छूए बगैर किस प्यार से किया जाता है, यदि इसे सीखना हो तो आपको सीधे दक्षिण अमेरिका ही जाना होगा.

महान फुटबॉलर पेले ने ही ब्राजील की राष्ट्रीय टीम में आने से पहले सांतोस क्लब के लिए खेलते हुए बाइसिकल किक से गोल दागना सीख लिया था. जगालो जैसे दिग्गज के साथ खेलते हुए पेले ने दुनिया को लातिन अमेरिकी फुटबॉल की झलक दिखला दी थी.

ब्राजील या अर्जेंटीना विश्व चैंपियन बने, यह चर्चा का विषय नहीं है लेकिन यह भी अंतिम सच है कि कोई भी विश्व कप इन दो लातिन अमेरिकी टीमों के बिना पूरा नहीं हो सकता. आज भी यह हालत है कि ब्राजील के तमाम खिलाड़ी यूरोप में खेलते हैं. इतिहास गवाह है कि इंग्लैंड (1966) और फ्रांस (1998) के बाद कोई भी यूरोपीय देश मेजबान होते हुए चैंपियन नहीं बन सका है.

1994 में अमेरिका में हुए विश्व कप फाइनल में भी ब्राजील चैंपियन बना जबकि 1998 में फाइनल में वह पेरिस में फ्रांस से हार गया. लेकिन उसकी भरपाई ब्राजील ने 2002 में जर्मनी को हराकर पूरी कर ली.
यदि ब्राजील रिकॉर्ड पांच बार विश्व कप जीता है तो अर्जेंटीना भी पीछे नहीं रहा है. 1986 के मेक्सिको विश्व कप में चैंपियन बनने के बाद वह इटेलिया-90 के फाइनल में जर्मनी से अंतिम मिनटों में 0-1 से हार गया था, लेकिन यह वह विश्व कप था, जिसने उस जीनियस मेराडोना की बिगड़ी हुई छवि देखी थी जो कि 1986 के विश्व कप के बाद फुटबॉल का भगवान बन चुका था.

अर्जेंटीना ने इसके बाद भी अमेरिका से लेकर कोरिया जापान तक (2002 विश्व कप) अपनी दावेदारी में कोई कमी नहीं आने दी. तब गैब्रियला बातिस्तुता और क्लाडियो कनीजिया जैसे धुरंधर स्ट्राइकरों की मदद से अर्जेंटीना ने यूरोपीय ताकतों को हिलाकर रख दिया था.

यूरोप के देशों को देखें तो उसमें से एक भी यह दावा नहीं कर सकता कि वह दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 19वें विश्व कप को जीतने का हकदार है. दुर्भाग्य इंग्लैंड के साथ 1966 से ही जुड़ा है. जर्मनी ने जरूर एक दो बार चमत्कार दिखाए हैं लेकिन इसके सिवाय और कुछ बाकी नहीं रह जाता.

Flash-Galerie WM 1986 Diego Maradona Argentinien Sieger

इसके अलावा 40 के दशक में इटली दो बार जीता और फिर उसे यह सौभाग्य 1982 के बाद सीधे 24 बरस बाद 2006 में जर्मनी में आयोजित विश्व कप में प्राप्त हुआ. इस विश्व कप से पहले खेले गए अब तक के 18 विश्व कप मुकाबलों में खिताब 9 बार लातिन अमेरिकी देशों के पाले में ही गया है.

2010 के दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हो रहे 19वें विश्व कप में ब्राजील की टीम कोच डुंगा की पसंद की है, जिसमें युवाओं की भरमार है. पिछले विश्व कप के ब्राजीली सितारे रोनाल्डो, रोनाल्डिनो, राबर्टो कार्लोस तथा काफू की चौकड़ी अफ्रीका में नजर नहीं आएगी. अलबत्ता सुपर स्टार काका और रोबिन्हो पर सबकी निगाहें होंगी.

ब्राजील या अर्जेंटीना को यदि कोई यूरोपीय देश चुनौती दे सकता है उसमें सबसे पहला नाम स्पेन का, दूसरा जर्मनी का होगा. वैसे तो इंग्लैंड, हॉलैंड, क्रोएशिया, डेनमार्क, इटली भी इस दौड़ में शामिल हैं. स्पेन व जर्मनी के पास प्रतिभाओं का कभी अकाल नहीं रहा लेकिन दो समस्याओं ने इन दोनों टीमों का पीछा कभी नहीं छोड़ा. पहली फिटनेस और दूसरी दुर्भाग्य.

Flash-Galerie WM 1994 Dunga Brasilien gegen Italien Finale Sieger

इंग्लैंड के साथ भी दुर्भाग्य ने चोली दामन का साथ निभाया. 1966 में एक विवादास्पद गोल के बाद विश्व चैंपियन (इतिहास में सिर्फ एक बार) बनने वाले इंग्लैंड ने अभी तक विश्व कप फाइनल में स्थान नहीं बनाया है. यह उस देश की त्रासदी का परिचायक है, जिसकी प्रीमियर लीग दुनिया की सबसे महंगी और आकर्षक मानी जाती है फिर भी उसका स्टार खिलाड़ी डेविड बेकहम स्पेन जाकर खेलना पसंद करता है.

मौजूदा इंग्लिश टीम की धुरी वेन रूनी के आसपास ही घूमती है. उनके अलावा फारवर्ड एमिली हेस्की पीटर क्राउच को अहम किरदार अदा करना होगा. मिडफील्ड का दारोमदार जेकोले पर है.

जनाब, यह विश्व कप है जहां किसी की भी बादशाहत चंद सेकंड में खत्म हो जाती है. लिहाजा फिलहाल तो हम सितारा टीमों के इतिहास के साथ साथ अभ्यास मैचों के फॉर्म को देखकर अनुमान भर लगा सकते हैं.
दक्षिण अफ्रीका में 11 जून से शुरू होने वाला फुटबॉल का यह महासमर 11 जुलाई तक चलेगा जिसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ 32 टीमों के 736 खिलाड़ियों पर दुनिया के अरबों लोगों की निगाहें लगी होंगी. अफ्रीका के मैदानों पर होने वाले फुटबॉल घमासान को देखने के गवाह 28 लाख होंगे और दुनिया की पूरी आबादी के 70 से 80 प्रतिशत लोग किसी न किसी माध्यम से रोमांच के इस समुद्र में गोता लगाएंगे.

विश्व कप टूर्नामेंट का आगाज किस तरह होने जा रहा है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 11 जून को इसके उद्‍घाटन समारोह को देखने के लिए स्टेडियम में 94 हजार दर्शक मौजूद रहेंगे और साथ ही इसे पूरी दुनिया में कोई पौने तीन अरब लोग अपने अपने तरीके से निहारेंगे.

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