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विज्ञान

फुकुशिमा से दोबारा रेडियोएक्टिव पानी लीक

जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के ऑपरेटर ने बताया कि संयंत्र से अति रे़डियोएक्टिव प्रदूषण वाला 100 टन पानी लीक हुआ है. अगस्त 2013 से अब तक का यह सबसे बुरा लीकेज है.

टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर कोऑपरेशन टेपको ने पत्रकारों को बयान दिया है कि इस पानी के समंदर में पहुंचने की आशंका नहीं के बराबर है हालांकि 2011 में भूकंप और सुनामी के बाद टूटे इस परमाणु बिजली घर में कई बार पानी लीक हुआ और जापान सरकार सहित संयंत्र की संचालक कंपनी टेपको इसे काबू में नहीं कर सकी है. गुरुवार को टेपको के प्रवक्ता ने बताया, "हम अलग अलग उपाय कर रहे हैं और हम इस लीक के कारण जनता में फैली घबराहट के लिए भी माफी चाहते हैं. ये प्रदूषित पानी शायद ही समंदर तक पहुंचा होगा क्योंकि टैंक के इलाके में कोई ड्रेनेज नहीं है.

टेपको ने जानकारी दी कि बुधवार देर शाम एक द्वार के खुले रह जाने से बड़े स्टोरेज टैंक से लीकेज हुआ और इस गलती के कारण काफी पानी बह गया. समंदर से 700 मीटर की दूरी पर स्थित इलाके में निगरानी कर रहे कर्मचारी ने टैंक से जुड़ी एक नाली में गिरता हुआ ये पानी देखा. सुनामी के बाद इस परमाणु बिजली संयंत्र में हुई दुर्घटना को न संभाल पाने की वजह से टेपको की कड़ी आलोचना हुई है.

पिछले सप्ताह एक परमाणु नियामक अधिकारी ने कहा कि टेपको ने स्ट्रोन्टियम-90 की बहुत ज्यादा मात्रा भूजल में नहीं डाली जब कि नियामक इसका बार बार अनुरोध करते रहे. इस घटना की शुरुआती जांच के मुताबिक लीक पानी में 23 करोड़ बेकेरेल बीटा इमिटिंग रेडियोएक्टिव आइसोटोप प्रति लीटर पाए गए. इसमें स्ट्रोन्टियम-90 भी था. बेकेरेल किसी भी पदार्थ की रेडियोधर्मिता को नापने का जरिया है. एक बेकेरेल किसी भी अणु के न्यूक्लियस के खत्म होने में लगे वक्त को कहते हैं. यानी एक सेकेंड में यूरेनियम अणु का न्यूक्लियस किस हद तक खत्म होगा, वह यूरेनियम की रेडियोधर्मिता यानी उसका बेकेरल अंक होगा.

यह स्तर पिछले साल लीक हुए 300 टन प्रदूषित पानी जितना गंभीर है. अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार रेडियोलॉजिकल रिलीज के मानक में तीसरे नंबर पर है. समंदर में स्ट्रोन्टियम-90 को रिलीज करने की वैधानिक सीमा सिर्फ 30 बेकेरेल प्रति लीटर की है. जिस टैंक में लीकेज हुआ वह परमाणु बिजली संयंत्र में लगे कई सौ टैंकों में से एक है, जिसमें टूटे संयंत्र को ठंडा करने में निकला रेडियोएक्टिव पानी जमा किया जा रहा है.

स्ट्रोन्टियम-90 सहित अन्य बीटा रेडिएशन इंसानी शरीर के लिए बहुत खतरनाक होते हैं और यह डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं. हालांकि इससे बचना तुलनात्मक रूप से आसान है क्योंक ये एल्यूमिनियम की पतली चादर को भेद नहीं सकते. स्ट्रोन्टियम हड्डियों में जमा हो जाता है और शरीर में समाने पर यह कैंसर पैदा करता है. पानी में जाने के बाद अगर यह इंसानी शरीर में पहुंचे तो काफी मुश्किल पैदा होगी.

टेपको के प्रवक्ता ने बताया कि वह लीक पानी को समेट रहे हैं और उस जमीन को साफ कर रहे हैं, जहां ये पानी फैल गया था. बुधवार को टेपको ने बताया था कि दो नंबर से रिएक्टर प्रेशर वेसल के दो थर्मामीटर खराब हो गए हैं. इसमें कुल नौ थर्मामीटर थे. कंपनी ने कहा कि बचे हुए थर्मामीटर से वह आस पास का तापमान देख पा रहे हैं.

एएम/एमजी (एएफपी, रॉयटर्स)

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