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दुनिया

फुकुशिमा के लिए बड़े कदम उठाने होंगे

सूनामी और भूकंप के मारे फुकुशिमा के खतरे से लोगों को बचाने के लिए बड़े कदम उठाने की जरूरत है. जापान की परमाणु ऊर्जा नियामक एजेंसी ने संयंत्र की सुध लेने के बाद संचालकों से चर्चा की है.

जापान की परमाणु उर्जा नियामक संस्था ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के संचालकों से कहा है कि बिजली घर में हादसे को टालने के लिए "बड़े कदम" उठाने की जरूरत है. न्यूक्लियर रेगुलेशन अथॉरिटी के प्रमुख सुनिची तनाका ने टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी, टेपको के अध्यक्ष नाओमी हिरोसे को अपने दफ्तर बुला कर संयंत्र की बढ़ती समस्याओं पर चर्चा की. इस दौरान उन मानवीय गलतियों पर भी बात की गई जिसके कारण विषैले पानी का रिसाव हुआ. हालांकि मानवीय गलतियां हाल फिलहाल की ही हैं जो संकट से निबटने के लिए किए उपायों से पैदा हुई हैं. टनाका ने इससे पहले कहा था कि लगातार "छिटपुट गलतियां" इस बात का संकेत हैं कि कर्मचारियों में मनोबल और जिम्मेदारी का अहसास लगातार कम हो रहा है.

टेपको ने हाल ही में सिस्टम की समस्या को स्वीकार किया है. हाल ही में पेश की गई एक रिपोर्ट में उसने कहा है कि कर्मचारी समय सीमा को लेकर दबाव झेल रहे हैं और ऐसे में किनारे से निकलने की कोशिश हो रही है जो इस तरह की गलतियों की जगह बना रही हैं. इसके अलावा कई बार वो दिए गए काम या फिर प्रक्रिया को नहीं समझते. हिरोसे ने भी यह माना कि टेपको को संयंत्र के लिए उपयुक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने में दिक्कत आ रही है. हालांकि उन्होंने वादा किया है कि दूसरे संयंत्रों से पर्याप्त संख्या में कर्मचारी फुकुशिमा भेजे जाएंगे.

टेपको ने जानकारी दी है कि केवल पिछले साल ही 700 से ज्यादा कर्मचारी कंपनी छोड़ कर चले गए. उन्होंने यह भी बताया कि अगले दो तीन साल के लिए कर्मचारियों की व्य्वस्था करने में दिक्कत नहीं है लेकिन लंबे समय के लिए कर्मचारियों पर अनिश्चितता बनी हुई है. टेपको के उपाध्यक्ष जेंगो एइजावा ने कहा, "लंब समय के लिए कर्मचारियों की स्थिति के बारे में हम भरोसे के साथ कुछ नहीं कह सकते. क्योंकि आने वाले दिनों में कचरे को निकालना होगा और इसके लिए अलग तरह की योग्यता वाले लोगों की जरूरत होगी."

मार्च 2011 में भूकंप और सूनामी के बाद फुकुशिमा में तीन रिएक्टर पिघल गए. संयंत्र को ठंडा करने के लिए डाले गए पानी का एक बहुत बड़ा हिस्सा सागर में बहाया जा रहा है जिससे रेडियोधर्मी रिसाव आस पास के इलाकों में फैल रहा है.

तनाका ने टेपको से यह भी कहा है कि वह उस जगह रेडियोधर्मिता को घटाए और ऐसी स्थिति बनाए जिससे कि कर्मचारी चेहरे पर पूरा मास्क लगाए बगैर भी काम कर सकें. मास्क के कारण बातचीत कम हो जाती है और काम करने की स्थिति थोड़ी और मुश्किल हो जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जरूरी कामों के लिए पर्याप्त फंड की भी व्यवस्था करनी होगी.

हिरोसे ने माना कि टेपको खर्च में कटौती कर रहा है और संयंत्र की खराब हालत ने उसके कामकाज के स्तर को भी गिराया है.

परमाणु ऊर्जा की नियामक संस्था के अधिकारियों का कहना है कि इस मुलाकात से तनाका की चिंता के बारे में संकेत मिले हैं. तनाका और दूसरे आयुक्तों ने कहा है कि वे पहले से ही निर्देश मिलने के लिए योजना बना रहे हैं. तनाका ने हिरोसे से कहा कि समस्या को सुलझाने के लिए लंबे समय को ध्यान में रख कर कुछ "बड़े कदम" उठाने होंगे. सिर्फ प्रक्रिया में उन बदलावों से काम नहीं चलेगा जो टेपको ने सुझाई हैं. न्यूक्लियर रिएक्टर इंजीनियर और मेइजी यूनिवर्सिटी में लेक्चरर माराशी गोतो इस बात को लेकर आशंकित हैं कि टेपको और नियामक संस्था की बैठक से कोई हल निकलेगा. उनका कहना है, "अहम यह है कि उन्होंने किस बार में बात की. मुझे लगता है कि नियामक संस्था बस इस कोशिश में हैं कि चीजें आसान हो जाएं और इस तरह की स्थिति दिखाई जा सके कि हालात बेहतर हो रहे हैं."

एनआर/एएम (एपी)

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