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मनोरंजन

फीकी हैं नई फिल्में

शोले और डीडीएलजे जैसी फिल्मों ने सालों तक सिनेमा घर में टिककर रिकॉर्ड तोड़ दिए. लेकिन अब बॉलीवुड की फिल्में 10-15 दिन से ज्यादा पर्दे पर नहीं टिक पातीं. फारूख शेख के मुताबिक नई फिल्मों में वो चुंबक भी नहीं है.

साफ सुथरी और मनोरंजक फिल्मों में अभिनय के लिए मशहूर अदाकार फारूख शेख कहते हैं, "आज, हमारे पास 100 गुना बेहतर तकनीक है, हम वित्तीय तौर पर 50 गुना आगे हैं और दर्शकों के मामले में 200 गुना आगे हैं. दर्शकों की संख्या बढ़ी है, हमारे पास अंतरराष्ट्रीय दर्शक हैं. मुझे लगता है कि ऐसे में लेखन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, चाहे कहानी हो, संवाद हों या फिर गाने."

64 साल के फारूख शेख मानते हैं कि कमजोर कहानी और डॉयलॉगों की वजह से फिल्में ढीली पड़ रही हैं, "लेखक फिल्म की रीढ़ की हड्डी हैं, ऐसे में अगर रीढ़ की हड्डी ही कमजोर हो तो कितना मांस और खून आप चढ़ा सकते हैं. यह बहुत जल्द या कुछ देर में ढह जाएगा."

वह मानते हैं कि स्क्रिप्ट के प्रति उदासीनता की वजह से फिल्में अब पटाखे की तरह आती और चली जाती हैं, "आज फिल्मों का जीवन छोटा हो गया है. आज फिल्म आती और जाती है. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं होता जिसे याद रखा जा सके. मदर इंडिया 1956 में बनी, आज उसे 50-60 साल हो चुके हैं लेकिन फिल्म अब भी हर किसी को अपनी तरफ खींचती है. आपको पता ही नहीं चलता कि उसमें 14 गाने हैं, जिन्हें फॉरवर्ड किया जा सकता है या उन्हें देखने के बजाए कुछ और किया जा सकता है."

Szenenbild aus dem Film Solange ich lebe

कहानी में दम नहीं, लेकिन मसाला भरपूर

फिल्म बनाने के मौजूदा मुंबइया तरीके से दिग्गज अभिनेता खुश नहीं हैं. वो मान रहे हैं कि आज अगर फिल्म की कहानी बेकार हो तो उसमें गाने और डांस नंबर डाल दिए जाते हैं, ताकि वह लोगों का ध्यान खींच सके. फिल्मों में गाने के बहाने हीरोईन का बदन दिखाने की होड़ पर तंज करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब आपके पास अच्छी कहानी नहीं होती तो आपको फाइट सीक्वल, आईटम नंबर और बहुत कम कपड़े में हीरोइन को दिखाना पड़ता है."

इन सब मुश्किलों के बावजूद फारूख मानते हैं कि मौजूदा दौर भारतीय सिनेमा का सर्वश्रेष्ठ समय है, "सिनेमा के लिए यह समय इसलिए अच्छा है क्योंकि आज हर तरह की फिल्म के लिए जगह है. नई पीढ़ी कुछ अलग करना चाह रही है."

वैसे फिल्मों की वजह से फारूख शेख लंबे अरसे बाद फिर सुर्खियों में आ रहे हैं. उनकी पुरानी फिल्म चश्मे बद्दूर अब नए रूप में सामने आ रही है. नए निर्देशक अविनाश कुमार सिंह ने फिल्म को 'लिसन अमाया' नाम दिया है. फिल्म में फारूख अपनी पुरानी जोड़ी दीप्ति नवल के साथ होंगे. फिल्म में दीप्ति नवल एक विधवा की भूमिका में हैं, जिसकी एक बेटी है. फारूख 60 साल के फोटोग्राफर बने हैं, जिसे विधवा से प्यार हो जाता है.

ओएसजे/एमजे (पीटीआई)

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