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मनोरंजन

फिल्में और राजनीति, दोनों ही मेरे सपनेः चिराग

भारत में नेताओं की संतानों का राजनीति में आना आम बात है लेकिन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे रितेश देशमुख के अलावा उभरते हुए कलाकार चिराग पासवान फिल्मों का रुख करने वाले दूसरे नेतापुत्र हैं.

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चिराग पिछली कई सरकारों में मंत्री रहे दलित नेता रामविलास पासवान के बेटे हैं. डॉयचे वेले से खास बातचीत में चिराग ने फिल्मों के प्रति अपने रुझान और बिहार में इन दिनों चल रहे विधानसभा चुनाव के बारे में बेबाक राय रखी. बॉलीवुड के इस उभरते हुए कलाकार की रगों में खून तो सियासत का बह रहा है लेकिन फिल्मी पर्दे का ग्लैमर उन्हें खींच लाया मायानगरी मुंबई की ओर. पेश है उनसे हुई बातचीत.

मुंबई की मायानगरी में रहकर बिहार की सियासत में भी मशगूल होना दो अलग अलग बातें है. फिल्म और सियासत के बीच कैसे तालमेल बिठा पाते हैं?

मैं अपने आप को बहुत लकी मानता हूं कि जो सपने मैंने बचपन में देखे, वह पूरे हो रहे हैं. एक सपना था फिल्मों में करना का और दूसरा राजनीतिक का जो मेरी रगों में दौड़ती है. दोनों अगर आपके पसंद के फील्ड हैं तो फिर तालमेल बिठाने में दिक्कत नहीं आती. ऐसा नहीं है कि इसमें तालमेल बिठाने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पडे़. राजनीति में जितना हो सकता है मैं समय देता हूं और साथ ही फिल्में भी कर रहा हूं. दोनों अच्छे से बैलेंस हो रहे है. फिलहाल बड़े बैनर वाली मेरी पहली फिल्म वन एंड ऑनली की शूटिंग चल रही है जो कि कंगना रनाउत के साथ है और यह फिल्म अगले साल फरवरी तक रिलीज होने की उम्मीद की जा सकती है.

बिहार में चुनाव हो रहा है जिसमें आपके पिता एक महत्वपूर्ण घटक के तौर पर चुनावी मैंदान में हैं. आप भी इसमें प्रचार के लिए गए. क्या लगता है आपको चुनावी फैसले के बारे में?

चुनाव प्रचार अभियान में खुद शामिल होने के बाद मैं पूरी तरह से निष्पक्ष होकर कहूंगा कि बिहार में इस बार विकास एक अहम मुद्दा है ही, लेकिन सरकार विरोधी लहर की हकीकत से भी इनकार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि इस बार आरजेडी-एलजेपी गठजोड़ भारी मतों से जीत कर बिहार में सरकार बनाने जा रहा है.

युवाओं के राजनीति में आने को आप कितना सही मानते हैं और युवाओं को इस दिशा में आगे आने के लिए क्या करना चाहिए?

हकीकत में इस बार के चुनाव प्रचार में मेरे शामिल होने का एकमात्र मकसद युवाओं को राजनीति से जुड़ने के लिए प्रेरित करना ही है क्योंकि यह हकीकत है कि युवाओं का राजनीति से विश्वास उठता जा रहा है. अगर युवाओं का राजनीति में विश्वास नहीं रहेगा, तो फिर हम तानाशाही की तरफ जाएंगे. इसलिए युवाओं का इस दिशा में आगे आना बहुत जरूरी है.

एक सवाल बार बार मन में उठता है कि राहुल गांधी से लेकर चिराग पासवान तक सभी नेता पुत्र राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए राजनीति में आ रहे हैं. लेकिन सामान्य परिवारों से आने वाले युवाओं को राजनीति में आने के लिए कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, कभी इस बात का अहसास आपने किया है?

मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं कि जो भी लोग प्रभावशाली परिवारों से आते हैं, उनके लिए राजनीति, फिल्म या किसी भी क्षेत्र में एंट्री करना आसान होता है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है क्योंकि यह हकीकत है, शाश्वत सत्य है. लेकिन यह भी एक हकीकत है कि अगर आप में प्रतिभा नहीं है तो एक बार इजी एंट्री पाने के बाद अगली बार आप नकार दिए जाएंगे. अपने क्षेत्र में टिके रहने के लिए आपके अंदर काबलियत होनी जरूरी है. अगर आप गलती से चुनाव जीत भी गए तो अगली बार जनता आपको नकार भी देगी.

युवाओं के मन में यह बात बैठ गई है कि राजनीति में उनके लिए कोई जगह नहीं है क्योंकि सिर्फ बड़े नेताओं के बेटे ही सामने आते हैं. जब आप लोगों के बीच होते हैं तो इस धारणा को दूर करने के लिए क्या दलीलें देते हैं?

इसके लिए कोई दलील देने की जरूरत नहीं है. लोग इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि कार्यकर्ता आपके साथ तभी जुड़ते हैं, जब उन्हें आपके साथ जुड़ने में कोई स्कोप दिखता है. अगर मैं अपनी ही बात करूं, तो मैं पार्टी में सिर्फ एक मामूली कार्यकर्ता की हैसियत से जुड़ा हूं. मैं चाहता हूं कि अगर मेरी पार्टी से युवा जुड़ें तो उन्हें वह पोजीशन मिलनी चाहिए जिसके लिए वे राजनीति में आ रहे हैं और पार्टी से जुड़ रहे हैं.

चिराग पासवान रामविलास पासवान के बेटे हैं ऐसे में उन्हें फिल्मों में महानायक अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन को कैसे टक्कर दे पाते हैं और अपने लिए सुनहरे भविष्य का तानाबाना कैसे बुनते हैं?

हकीकत यह है कि मैं किसी भी क्षेत्र में किसी को टक्कर देने के लिए नहीं जा रहा हूं. अगर मैं राजनीति में हूं तो मेरी टक्कर राहुल गांधी से नहीं है या फिल्मों में आ रहा हूं तो अभिषेक जी से मुकाबला नहीं कर रहा हूं. मेरी जंग और मेरी टक्कर खुद से है. मैं इस क्षेत्र में खुद को आजमा रहा हूं. मैं किसी को ट्कर देने के लिए नहीं बल्कि जो मैं करूं दिल से करूं अच्छा करूं, बस यही मेरी ख्वाहिश है.

रिपोर्टः निर्मल यादव

संपादनः वी कुमार

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