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दुनिया

फिलहाल काला धन भूल जाए भारत

भारत में ब्लैक मनी पर भले ही बहस छिड़ी हो लेकिन 2012 तक उसे इस बारे में स्विट्जरलैंड से कोई जानकारी नहीं मिलने वाली. दूसरी ओर लिश्टेनश्टाइन ने तो साफ कह दिया कि वह अपने यहां जमा काले धन पर भारत को कुछ नहीं बताएगा.

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काला धन कैसे बेदाग हो

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच ऐसी कोई संधि नहीं है, जिसके आधार पर बैंकों में जमा रकम के बारे में एक दूसरे देश को जानकारी दी जा सके. अगर दोनों देश चाहेंगे तो इस साल के आखिर तक ही यह संधि बन पाएगी और संसदों तथा दूसरे संगठनों से पुष्टि होने में भी इसे काफी वक्त लगेगा. भारत में एक अप्रैल को वित्तीय वर्ष की शुरुआत होती है और अगले साल (2012) उस वक्त से पहले ऐसी संधि की कोई संभावना नहीं है.

वैसे स्विस बैंकों में काला धन रखने वाले भारतीयों के नामों की जानकारी शायद ही बाहर आ पाए क्योंकि प्रस्तावित संधि में इसके लिए जगह नहीं रखी गई है. भारत में विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर दबाव बना रखा है कि काला धन रखने वालों के नाम सामने आएं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सरकार को लताड़ा है.

500 Rupien Scheine

बरसों से ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं कि कुछ रईस भारतीयों ने कई सौ अरब डॉलर स्विस बैंकों में रखे हुए हैं. हालांकि आंकड़े अभी तक सामने नहीं आए हैं और किसी को नहीं पता कि भारतीय नागरिकों का कितना पैसा स्विट्जरलैंड के बैंकों में रखा है. कुछ जानकार तो यहां तक मानते हैं कि कोई जरूरी नहीं कि स्विस बैंकों में भारतीय नागरिकों का सभी पैसा गैरकानूनी ही हो.

भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और स्विट्जररलैंड के फेडरल काउंसिलर मिचेलिन काल्मी-रे ने अगस्त 2010 में एक प्रोटोकॉल पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत दोहरी टैक्स पॉलिसी का जिक्र किया गया है. हालांकि यह प्रोटोकॉल अभी लागू नहीं हुआ है क्योंकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

इस बीच यूरोप के छोटे से देश लिश्टेनश्टाइन ने भारत को ब्लैक मनी पर कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया. लिश्टेनश्टाइन का कहना है कि इस मामले में दोनों देशों के बीच कोई संधि नहीं है और इसलिए वह ऐसी कोई जानकारी भारत को नहीं दे सकता.

लिश्टेनश्टाइन ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत सरकार ने उससे भारतीय ग्राहकों के नाम मांगे हैं लेकिन लिश्टेनश्टाइन सरकार के प्रवक्ता ने कहा, "इस वक्त हम भारत के अनुरोध का जवाब नहीं दे सकते हैं क्योंकि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. हमारे बीच कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं है."

पिछले साल जर्मनी की सरकार ने भारत को इस बात की जानकारी दी कि लिश्टेनश्टाइन के बैंकों में भारतीयों का भी पैसा भरा है. इसके बाद टैक्स विभाग ने इस बारे में जानकारी लेनी चाही. लिश्टेनश्टाइन एक बेहद छोटा सा देश है, जिसकी सरहद स्विट्जरलैंड से मिलती है. यहां सिर्फ 35,000 लोग रहते हैं लेकिन यह दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल है. यहां प्रति व्यक्ति आय सबसे ज्यादा है

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः एमजी

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