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दुनिया

फिर हुआ रैंसमवेयर का साइबर अटैक

इस अटैक के जरिए कंप्यूटर की सभी फाइलों को लॉक कर लिया जाता है. मुंबई स्थित भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी भी इस साइबर हमले की जद में आ गया है.

बीते दिनों हुए एक साइबर अटैक के बाद दुनिया भर के देश एक बार फिर रैंसमवेयर की चपेट में आ गए हैं. इस रैंसमवेयर को पेट्या कहा जा रहा है. इस अटैक में सबसे ज्यादा नुकसान रूस और यूक्रेन को हुआ है. इससे दवा उत्पादक मर्क और मोंडेलेज, ओरियो और नैबिस्को जैसी कंपनियों को भी नुकसान हुआ है. विश्व की सबसे बड़ी एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस कंपनी कही जाने वाली डब्ल्यूपीपी ने ट्वीट करके भी इस बारे में जानकारी दी. अस्पताल, सरकारी दफ्तर और कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां ताजा साईबर अटैक रैंसमवेयर की चपेट में रहीं. इस अटैक के जरिये कंप्यूटर की सभी फाइलों को लॉक कर लिया जाता है और उन्हें रिलीज करने के बदले में एक बड़ी फिरौती की मांग होती है.

अभी तक इस साइबर अटैक का मकसद साफ नहीं हो पाया है. इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि इस अटैक के पीछे आर्थिक वजह न हो. यह नया अटैक भी पिछली बार की तरह का है. यह अटैक डिजिटल लॉक के सहारे किया गया है. जिसे एक ग्रुप शैडोब्रोकर्स ने एक वेबसाइट पर पब्लिश किया था. अभी तक शैडोब्रोकर्स के बारे में कोई जानकारी नहीं है और यह रहस्यमयी बना हुआ है. और कंप्यूटर पर निर्भरता के इस दौर में यह साबित हो रहा है कि इस तरह के साइबर अटैक कितने भयानक साबित हो सकते हैं.

साइबर सिक्योरिटी फर्म कासपर्स्की के मुताबिक इस हमले में सबसे ज्यादा नुकसान यूक्रेन और रूस को हुआ. हालांकि इसमें यूरोप के भी कई देश शामिल हैं. पोलैंड, इटली और जर्मनी भी रैंसमवेयर की जद में हैं. मुंबई स्थित भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी भी इस साइबर हमले की जद में आ गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जीटीआई का काम रोक दिया गया था क्योंकि साइबर अटैक के चलते सारे सिस्टम को बंद कर दिया गया है. अमेरिका में पेंसिल्वेनिया में दो अस्पताल रैंसमवेयर की चपेट में रहे. कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया कि उनके ऑपरेशन की तारीखें बदल दी गयी हैं.

एसएस/एमजे (एपी)

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