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खेल

फिर से लड़ेंगे स्पेन के सांड

परंपरा के नाम पर स्पेन में खूनी बुलफाइट यानी सांडों की लड़ाई को फिर से शुरू किया जा सकता है. काटालोनिया प्रांत में पाबंदी हटाने के प्रस्ताव को स्पेनी संसद ने स्वीकार कर लिया है.

इस तरह के प्रस्ताव आम तौर पर संसद में नहीं आते. लेकिन इसे स्वीकार करते समय वोटिंग में दिलचस्प आंकड़े देखने को मिले. कुल 180 सांसदों ने इसे स्वीकार करने का फैसला किया, जबकि 40 ने विरोध में, पर कुल 107 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

इस प्रस्ताव को मानने के साथ ही सदियों पुरानी परंपरा को "सांस्कृतिक हित की विरासत" घोषित कर दिया जाएगा. देश के प्रधानमंत्री मारियानो राखोय भी इस मामले का समर्थन करते हैं. इस प्रस्ताव को संसद में लाने के लिए 5,90,000 लोगों ने दस्तखत किए थे, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक मारियो वरगास योसा और अभी के प्रधानमंत्री राखोय भी शामिल हैं. इस तरह के लोकप्रिय प्रस्तावों को संसद में लाने के लिए पांच लाख लोगों के दस्तखत जरूरी होते हैं.

पॉपुलर पार्टी के सांसद खुआन मानुएल अलबेंदेया ने कहा, "हमारा लक्ष्य किसी पर कोई चीज थोपना नहीं, बल्कि समझौते तक पहुंचना है. हम नहीं चाहते कि काटालोनिया के खिलाफ काम हो, बल्कि हम चाहते हैं कि समझौते के मुताबिक वहां फिर से बुलफाइट शुरू की जा सके."

वीडियो देखें 04:34

बार्सिलोना के कुछ छिपे राज

काटालोनिया प्रांत ने 2012 से सांडों की लड़ाई पर रोक लगा रखी है, जो काफी हिंसक होता था. पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के दबाव और लगातार गिरती लोकप्रियता के बाद यह कदम उठाया गया. स्थानीय विधानसभा ने जुलाई 2010 में इस पर वोटिंग की थी. इसके लिए करीब 1,80,000 लोगों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया था. काटालोनिया के अलावा सिर्फ कैनेरी द्वीप में ही सांडों की लड़ाई पर रोक है. वहां 1991 से सांडों की लड़ाई नहीं हो रही है.

राज्य के वामपंथी धड़े के नेता अल्फ्रेड बॉश का कहना है, "हम समर्पण नहीं करेंगे और उस फैसले के लिए संघर्ष करेंगे, जो हमारे राज्य के लोगों के प्रतिनिधियों ने लिया है."

किसी जमाने में स्पेन की बुलफाइट पूरी दुनिया में मशहूर थी. लेकिन धीरे धीरे इसकी लोकप्रियता गिरती गई. इसमें लोगों के घायल होने और पशुओं के साथ खराब बर्ताव को मुद्दा बनाया गया. पिछले साल सांडों की करीब 2000 लड़ाइयां हुई लेकिन दर्शकों की संख्या लगातार कम होती गई. 2006 के बाद से इसका लाइव टेलीविजन प्रसारण भी रोक दिया गया क्योंकि इसमें बहुत पैसा लगता था और दर्शकों की संख्या को देखते हुए विज्ञापन नहीं मिलते थे.

सांडों की लड़ाई रोकने में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की भी बड़ी भूमिका रही है. ताजा घटनाक्रम के बाद एनिमानेचुरलिस के आदिया गासकन कहते हैं, "हम हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेंगे. इस तरह के प्रस्ताव से पूरे देश में प्रदर्शन हो सकते हैं."

स्पेन के सर्वे बताते हैं कि बुलफाइट का अब पहले जैसा जलवा नहीं रह गया है और खास तौर पर युवा वर्ग इसे पसंद नहीं करता है. हालांकि धार्मिक वजह और छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए अभी भी कई जगह बुलफाइट होती है. अब इस प्रस्ताव पर इस साल किसी समय वोटिंग हो सकती है.

एजेए/एमजी (एएफपी, डीपीए, एपी)

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