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खेल

फिर शुरू हो रहा है फुटबॉल सीजन

जर्मन फुटबॉल लीग बुंडेसलीगा के इस सीजन का रिटर्न राउंड शुरू हो रहा है. हालांकि बायर्न म्यूनिख के पक्ष में फैसला हो गया लगता है लेकिन दूसरी टीमों के लिए बहुत कुछ दांव पर है. साथ ही निगाहें 2014 के वर्ल्ड कप पर भी हैं.

बायर्न और मोएंशनग्लाडबाख के बीच परंपरागत मैच के साथ शुरू हो रहे रिटर्न राउंड से पहले तालिका को देखें तो तुरंत कई इलाकों पर नजर जाती है जहां सीजन के अंत तक होने वाले 17 राउंड में मुकाबला रोमांचक होगा. बायर्न लेवरकूजेन के 37 अंक हैं, बोरुसिया मोएंशनग्लाडबाख के 33, डॉर्टमुंड के 32 और वोल्फ्सबुर्ग के 30 और ये सारी टीमें चैंपियंस लीग में जगह पाने की भिडंत में हैं.

बेल्जियम के केविन डे ब्रून के लिए वोल्फ्सबुर्ग ने 2.2 करोड़ यूरो खर्च किया है. डॉर्टमुंड इस दौड़ में ठहर नहीं पाया. टीम में शामिल होने पर ब्रून ने कहा था कि वोल्फ्सबुर्ग इस सीजन यूरोप कप में जगह पाने के लिए खेल सकता है. "अगले साल यूरोपीय मंच पर खेलने की मेरी भी ख्वाहिश है." इस लिहाज से पिछले साल ब्रिटिश टीम चेल्सी के लिए खेलने वाले 22 वर्षीय खिलाड़ी के लिए अच्छा चुनाव था.

शाल्के को करना होगा इंतजार

पिछले सालों में एक और टीम नियमित रूप से चैंपियंस लीग के लिए क्वालिफाई करती रही है. एफसी शाल्के जर्मनी की चोटी की टीमों में शामिल रहा है और इस सीजन में भी है. क्वार्टर फाइनल में उसका मुकाबला रियाल मैड्रिड और क्रिस्टियानो रोनाल्डो से है. लेकिन उसके बाद शाल्के एरेना में चैंपियंस लीग की धुन बजने में समय लग सकता है. फिलहाल तो उसकी कोशिश यूरोप कप में क्वालिफाई करने की होगी. यहां उसकी टक्कर जर्मन टीमों हैर्था बर्लिन, ऑग्सबुर्ग और माइंस से है.

बुंडेसलीगा में शुरू से ही शामिल रहा हैम्बर्ग शाल्के से एक मंजिल नीचे है. 1963 में बुंडेसलीगा शुरू होने के बाद से वह कभी लीग से बाहर नहीं हुआ है, लेकिन इस समय वह 14वें स्थान पर है और अपनी ही उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है. सीजन के बीच में ट्रेनर बदलने के बाद जगी उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं. टीम को देखने से नहीं लगता कि वह स्थिति को समझ रही है. ट्रेनर का मंत्र है, "महत्वपूर्ण यह है कि 17 मैचों में इतने प्वाइंट बनाए जाएं कि आराम से सांस ले सकें."

लीग से बाहर निकलने का खतरा हैम्बर्ग से पीछे चल रहे चार क्लबों को भी है. फ्रैंकफुर्ट, फ्राइबुर्ग, न्यूरेमबर्ग और इस साल लीग में आनेवाला ब्राउनश्वाइग. यहां सवाल यह नहीं है कि कौन लीग से बाहर होगा, बल्कि यह कि न्यूरेमबर्ग अपना पहला मैच कब जीतेगा? न्यूरेमबर्ग के ट्रेनर गेर्ट्यान फेरबेक ने कुछ समय से दाढ़ी बढ़ा ली है और कहा है कि उसे जीत के बाद ही शेव करेंगे. जर्मन चैंपियनशिप से ज्यादा अहम दाढ़ी कटने या न कटने का फैसला हो गया है.

VfL Wolfsburg Neuzugang Kevin de Bruyne

वोल्फ्सबुर्ग टीम से जुड़े केविन डे ब्रून

जर्मन चैंपियनशिप का फैसला तो यूं भी हो गया लगता है. बायर्न म्यूनिख को अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर सात प्वाइंट की बढ़त है. बायर्न यदि श्टुटगार्ट के खिलाफ पहले राउंड का मैच जीत लेता है तो बढ़त 10 प्वाइंट की हो जाएगी. कौन पाट पाएगा इस अंतर को? डॉर्टमुंड के आम तौर पर महात्वाकांक्षी ट्रेनर युर्गेन क्लॉप ने घुटने टेक दिए हैं, "यदि मैं कहूं कि हम बायर्न को पछाड़ देंगे, तो यह बकबास होगा."

उधर बायर्न के अधिकारियों की मुख्य चुनौती यह होगी कि वे जर्मन राष्ट्रीय टीम में शामिल अपने खिलाड़ियों का रिटर्न राउंड में इस तरह इस्तेमाल करें कि वे बिना घायल हुए और पूरे जोशोखरोश के साथ वर्ल्ड कप में भाग लेने ब्राजील जा सकें. नहीं तो जर्मनी के चौथे टाइटल का कुछ नहीं होगा. आने वाले दिनों में बुंडेसलीगा के रिटर्न राउंड का मुख्य मुद्दा वर्ल्ड कप ही होगा. हर कहीं चर्चा यह होगी कि कौन खिलाड़ी वर्ल्ड कप में खेल पाएगा? कोई घायल हो जाए तो पूछा जाएगा, वर्ल्ड कप तक खिलाड़ी ठीक हो पाएगा या नहीं. कोई खिलाड़ी अच्छा खेलेगा तो सवाल होगा, उसे टीम में नहीं होना चाहिए क्या?

ब्राजील ही ब्राजील

वर्ल्ड कप ही वर्ल्ड कप. लेकिन बुंडेसलीगा भी वर्ल्ड कप से फायदा उठाता है. विश्व चैंपियनशिप से पहले यहां खिलाड़ियों को अच्छी ट्रेनिंग का मौका मिलता है. इसलिए ऐसे खिलाड़ियों को ज्यादा समय खिलाने की इच्छा जोर पकड़ती है जो कहीं और बैंक पर बैठे होते. केविन डे ब्रून का मामला ऐसा ही है. नीदरलैंड्स के ओला जॉन बेनेफिका लिसबन से हैम्बर्ग और दक्षिण कोरिया के डोंग वोन जी संडरलैंड से ऑग्सबुर्ग आ गए हैं.

महीने के अंत में ट्रांसफर सीजन खत्म होने तक और खिलाड़ी बुंडेसलीगा के क्लबों में शामिल हो सकते हैं. लेकिन इस सिलसिले में स्वीडिश स्टार जलाटान इब्राहीमोविच भी बुंडेसलीगा में आ सकते हैं, इसकी संभावना कम है. हालांकि पेरिस सां जरमैं के स्ट्राइकर ने युर्गेन क्लॉप से पूछा था कि वे कब उनकी टीम के खेल सकते हैं, लेकिन यह बस मजाक ही था. वे वर्ल्ड कप में भी नहीं खेल रहे, क्योंकि स्वीडन ने क्वालिफाई ही नहीं किया है.

रिपोर्ट: आंद्रेयास श्टेन सीमोंसएमजे

संपादन: ए जमाल

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