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दुनिया

फिर शुरू आयाराम-गयाराम की राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी के विधायकों ने अरुणाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के बागी विधायकों की मदद से मुख्यमंत्री नबाम टुकी को हटा दिया है. विधायकों की बैठक एक होटल में हुई.

राजनीतिक अस्थिरता के लिए कुख्यात पूर्वोत्तर के अपेक्षाकृत शांत राज्य अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर आयाराम-गयाराम की राजनीति शुरू हो गई है. अबकी तो विपक्ष और बागियों ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पहले विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया और फिर बृहस्पतिवार को राज्य में नबाम टुकी की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करते हुए सदन का नया नेता भी चुन लिया. कांग्रेस के 20 बागी विधायकों ने इसा मुद्दे पर विपक्षी भाजपा के 11 विधायकों के साथ हाथ मिला लिया है. दो निर्दलीय विधायक भी उनके साथ हैं.

पूरा मामला

पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार दूसरे दिन जारी नाटकीय घटनाक्रम के तहत विपक्षी भाजपा और कांग्रेस के बागी विधायकों ने राज्य में नबाम टुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर एक बागी कांग्रेस विधायक को नया मुख्यमंत्री चुन लिया. इससे पहले कल एक कम्युनिटी हॉल में इन विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया था. आज विपक्ष व बागी नेताओं की बैठक शहर के एक होटल में हुई. कानून व व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के अंदेशे से विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर जिला प्रशासन ने कल से ही विधानसभा परिसर सील कर दिया है. आज की बैठक की अध्यक्षता विधानसभा उपाध्यक्ष डी. नोरबू थोंगडाक ने की, जो खुद बागी कांग्रेस विधायक हैं. 60 सदस्यीय विधानसभा के 33 सदस्यों ने इसी बैठक में एक अन्य कांग्रेसी कालिखो पुल को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना. मुख्यमंत्री टुकी और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने इन दोनों बैठकों को गैरकानूनी व असंवैधानिक करार देते हुए इनका बहिष्कार किया है.

दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष की इस कार्रवाई को राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा का समर्थन हासिल है. विधानसभा का शीतकालीन अधिवेशन पहले जनवरी में शुरू होना था. लेकिन राज्यपाल ने सरकार की सहमति के बिना ही सदन का विशेष सत्र बुला लिया है. सदन की अध्यक्षता करने वाले थोंगडाक ने कहा है कि अब आज विधानसभा की इस बैठक की कार्यवाही राज्यपाल को भेजी जाएगी जो नए मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल को शपथग्रहण का न्योता देंगे.

दिल्ली तक पहुंची गूंज

राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा की कार्रवाई के चलते संवैधानिक संकट के कगार पर खड़े इस राज्य के राजनीतिक संकट की गूंज संसद और राष्ट्रपति भवन तक भी पहुंच गई है. राजखोवा ने तय समय से पहले विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुला कर सत्तारुढ़ कांग्रेस के बागी विधायकों की सहायता से पहले विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित करने और फिर आज अविश्वास प्रस्ताव पारित कर नया मुख्यमंत्री भी चुनने में मदद दी. सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उनसे जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है. दूसरी ओर, इस मुद्दे पर कई बार संसद की कार्यवाही भी ठप हो चुकी है. सोनिया का आरोप है कि केंद्र के इशारे पर अरुणाचल में निर्वाचित कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने की साजिश हो रही है. पार्टी ने राज्यपाल को तुरंत वहां से हटाने की मांग भी उठाई है.

कल और आज हुई विधानसभा की इस कथित बैठक में न तो अध्यक्ष मौजूद थे और न ही मुख्यमंत्री नबाम टुकी समेत उनका मंत्रिमंडल. यही नहीं, विधानसभा परिसर सील कर देने की वजह से कल की बैठक एक कम्युनिटी सेंटर में आयोजित की गई थी तो आज राजधानी ईटानगर के एक होटल में इसका आयोजन किया गया.

बगावत की वजह

भाजपा के 11 विधायकों के अलावा दो निर्दलीय विधायकों ने अध्यक्ष के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था. विधानसभा की बैठक अगले महीने होनी थी. लेकिन राज्यपाल राजखोवा ने इस मामले में अतिरिक्त सक्रियता दिखाते हुए यह बैठक महीने भर पहले ही बुला ली. राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 47 विधायक है, हालांकि उनमें से 20 ने मुख्यमंत्री नाबाम टुकी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर रखा है. विधानसभा अध्यक्ष ने इनमें से 14 विधायकों को पहले अयोग्य करार दे दिया है. इन लोगों ने अब भाजपा से हाथ मिला लिया है और राज्य में टुकी सरकार का तख्ता पलटने में जुटे हैं. राज्यपाल ने महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान के लिए मुख्यमंत्री की सलाह के बिना ही विधानसभा का विशेष तीन-दिवसीय सत्र बुला लिया.

अब तक दिल्ली के चुप्पी साधे रहने की वजह से राज्य में भारी संवैधानिक संकट पैदा हो गया है. राज्य में पहले से एक मुख्यमंत्री होने के बावजूद बागियों ने विपक्ष के साथ मिल कर अब एक नया मुख्यमंत्री चुन लिया है. यह एक अभूतपूर्व स्थिति है. लेकिन पूर्वोत्तर की राजनीति के जानकारों के मुताबिक, इलाके के छोटे राज्यों में आयाराम-गयाराम की राजनीति का इतिहास बहुत पुराना है. अब तथ्य यह है कि विधानसभा के 60 में से 33 सदस्य, जिनमें दो निर्दलीय भी शामिल हैं, नबाम टुकी सरकार के खिलाफ खड़े हैं. ऐसे में देर-सबेर सरकार का बदलना तय माना जा रहा है.

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