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दुनिया

फिर नाकेबंदी की चपेट में मणिपुर

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में है. पहले सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला की रिहाई और गिरफ्तारी, फिर बॉक्सर मेरी कोम पर बनी फिल्म के यहां रिलीज नहीं होने और अब आर्थिक नाकेबंदी की वजह से.

फिलहाल चार सितंबर से ही इस नाकेबंदी के कारण मणिपुर देश के बाकी हिस्सों से कट गया है. राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले दोनों राजमार्गों पर वाहनों की आवाजाही ठप है. नतीजतन राज्य में जरूरी चीजों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. यह देश का अकेला ऐसा राज्य है जिसे हर साल कई-कई बार यह नाकेबंदी झेलनी पड़ती है. नगा संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने 30 अगस्त को राज्य के उखरुल जिले में पुलिस की गोली से दो नगा युवकों की मौत के विरोध में इस बेमियादी नाकेबंदी की अपील की है.

जरूरी चीजों की किल्लत

ईबोबी सिंह की अगुवाई वाली राज्य सरकार का दावा है कि राज्य में चावल और चीनी समेत तमाम जरूरी सामानों का दो महीने का स्टॉक है. लेकिन हकीकत इसके उलट है. राजधानी इम्फाल समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में जरूरी सामान की भारी किल्लत हो गई है और इनके दाम आसमान छूने लगे हैं. व्यापारियों की दलील है कि जरूरी स्टॉक कम होने की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं. असम और नगालैंड से लगी राज्य की सीमा पर खाद्यान्नों और दूसरे सामानों से लदे सैकड़ों ट्रक हाइवे पर खड़े हैं. राजधानी इम्फाल में पेट्रोल 200 रुपए लीटर बिक रहा है. केंद्र सरकार ने नाकेबंदी को ध्यान में रखते हुए राज्य में अतिरिक्त केंद्रीय बलों को भेजा है. लेकिन उससे भी हालत सुधरती नहीं नजर आ रही है.

राज्य के लोगों का कहना है कि सरकार को यूएनसी के साथ बातचीत कर इस नाकेबंदी को खत्म करने की पहल करनी चाहिए. लेकिन सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है. मुख्यमंत्री ओकराम ईबोबी सिंह कहते हैं, सरकार नाकेबंदी खत्म करने की पूरी कोशिश कर रही है.

सिसकती जीवनरेखा

इस सुदूर पर्वतीय राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली दो सड़कों- नेशनल हाइवे-39 और 53 को मणिपुर की जीवनरेखा कहा जाता है. खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की जरूरत की तमाम वस्तुएं इन सड़कों के जरिए ही राज्य में पहुंचती हैं.आंदोलनकारियों का सबसे आसान हथियार समझी जाने वाली यह सड़कें अक्सर उनके निशाने पर रही हैं. फिलहाल राज्य की सीमा से बाहर इन दोनों सड़कों पर जरूरी सामानों से लदे हजारों ट्रक नाकेबंदी खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं.

सबसे अहम हथियार

पिछले कुछ वर्षों से मणिपुर को हर साल सालाना औसतन 100 दिनों से ज्यादा की नाकेबंदी झेलनी पड़ी है. वर्ष 2012 में यह नाकेबंदी सबसे ज्यादा 103 दिनों तक चली थी. इससे पहले वर्ष 2005 में अखिल नगा छात्र संघ ने राज्य में 52 दिनों तक आर्थिक नाकेबंदी की थी. उसके बाद वर्ष 2010 में जब सरकार ने अलगाववादी नगा नेता और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड के महासचिव टी मुइवा के मणिपुर में प्रवेश पर पाबंदी लगाई थी तो नगा संगठनों ने 68 दिनों तक नाकेबंदी की थी.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः आभा मोंढे

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