1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

खेल

फिर डोपिंग में फंसी सानामाचा चानू

भारत की मशहूर भारोत्तोलक डोपिंग टेस्ट में फेल हो गई हैं. सानामाचा चानू पिछले महीने हुए नाडा टेस्ट को पास नहीं कर पाई हैं. हाल में भारतीय भारोत्तोलन संघ अंतरराष्ट्रीय बैन से बचा है.

default

मणिपुर की 31 वर्षीय चानू भारत की सबसे कामयाबी महिला भारोत्तलकों में हैं. लेकिन डोपिंग टेस्ट में उनके नमूने में प्रतिबंधित मिथाइल-हेक्सानेमाइन दवा पाई गई है. इससे पहले 2004 ओलंपिक के दौरान भी वह डोपिंग में पकड़ी जा चुकी हैं. अब अगर चानू का बी सैंपल भी पॉजीटिव पाया गया, तो उन पर उम्र भर के लिए बैन लग सकता है.

पूर्व एशियाई और 2002 कॉमनवेल्थ खेलों की चैंपियन चानू को दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों के लिए पिछले महीने हुए डोपिंग टेस्ट में पॉजीटिव पाया गया है. एक अहम सूत्र ने पीटीआई को बताया, "हां, चानू के नमूने में मिथाइल-हेक्सानेमाइन पाया गया है. अगर दूसरा नमूना भी पॉजीटिव पाया गया तो उन पर उम्र भर के लिए प्रतिबंध लगाया जा सकता है."

भारतीय भारोत्तोलन संघ के महासचिव सहदेव यादव ने भी एक भोरोत्तोलक के डोपिंग में फेल हो जाने की बात कही है लेकिन बी सैंपल का नतीजा आने तक वह उस खिलाड़ी का नाम नहीं बता सकते हैं. लेकिन उन्होंने यह साफ किया कि यह खिलाड़ी कॉमनवेल्थ टीम का हिस्सा नहीं है.

पिछले साल विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी के टेस्ट में छह भारतीय भारोत्तलक फेल हो गए, जिसके चलते भोरोत्तलन संघ को पांच लाख डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा. इससे पहले भी चानू 2004 में एथेंस ओलंपिक के दौरान डोपिंग में पकड़ी जा चुकी है. ओलंपिक में उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया लेकिन बाद में प्रतिमा कुमारी के साथ डोपिंग की दोषी पाई गईं. दोनों पर दो साल का प्रतिबंध लगा जबकि डोपिंग के चलते भारतीय भारोत्तलन संघ को एक साल का निलंबन झेलना पड़ा.

2000 में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली चानू को पिछले साल कॉमनवेल्थ खेलों के लिए भारोत्तोलकों के मुख्य ग्रुप में शामिल किया गया. लेकिन वह कॉमनवेल्थ टीम का हिस्सा नहीं बन पाईं क्योंकि ट्रायल के दौरान 53 किलोग्राम वर्ग में 172 किलो उठाने के बाद वह तीसरे और आखिरी स्थान पर रहीं. ट्रायल में सिर्फ तीन ही महिला प्रतियोगी थीं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः आभा एम

DW.COM

WWW-Links