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दुनिया

फिर छिड़ा मंदिर मुद्दा, कांग्रेस ने चंदे का हिसाब मांगा

भारत के केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन इस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले या "आपसी सहमति" से मंदिर बनाने के नतीजे की प्रतीक्षा करेगी.

संस्कृति मंत्री शर्मा ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जल्दी से जल्दी राम मंदिर बनाए जाने को देश के लोगों का "सपना" बताया. बुंदेलखंड के एक आयोजन में दिए शर्मा के इस बयान ने खूब सुर्खियां बटोरीं. बाद में शर्मा ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर कोई फैसला लेंगे. उन्होंने अयोध्या में एक विशाल संग्रहालय बनाए जाने की भी बात कही. शर्मा ने बताया, "केंद्र ने भगवान राम के आदर्शों को दिखाने वाले राम वन गमन पथ योजना के लिए 170 करोड़ रुपए को मंजूरी दे दी है."

वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे एक गैरराजनीतिक विषय बताते हुए जोर देकर कहा है कि राम मंदिर मुद्दे पर कोई भी कदम कोर्ट के निर्देश पर ही उठाए जाएंगे.

दिसंबर में ही विश्व हिंदू परिषद द्वारा ट्रकों में भरकर पत्थरों को अयोध्या लाने की खबर से राम मंदिर निर्माण का मुद्दा फिर से चर्चा में आया. यूपी में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के एक नेता और राज्यमंत्री ओमपाल नेहरा के मंदिर के समर्थन में बयान देने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें हटा दिया. नेहरा ने 23 दिसंबर को एक समारोह में कहा था कि अयोध्या की विवादित भूमि और मथुरा में मंदिर बनाने के लिए मुसलमानों से आगे बढ़कर मदद करने का आह्वान किया था, जिससे विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का अस्तित्व ही ना रह जाए.

वहीं मुंबई में सक्रिय शिवसेना राम मंदिर निर्माण को "देश का काम" बताते हुए अपने मुखपत्र सामना में निर्माण कार्य शुरु करने की तारीख तय करने की मांग करती रही है. संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में भी कांग्रेस, बीएसपी और जेडीयू ने बीजेपी एवं आरएसएस पर मंदिर मुद्दे को हवा देने का आरोप लगाया था. विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में होने वाले 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले यह लोगों को बांटने की कोशिश है.

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने राम मंदिर के निर्माण के नाम पर जमा किए गए चंदे का हिसाब किताब देने की मांग की है.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अयोध्या में पत्थर भेजे जाने पर सफाई देते हुए बताया था कि वे पत्थर मंदिर के लिए नक्काशी होने भेजे गए थे, जो काम मुख्य विवादित स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक जगह सन् 1990 से ही होता आया है.

आरआर/एमजे (पीटीआई)

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