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खेल

फिक्सिंग में फंसा यूरोपीय फुटबॉल संघ

मैच फिक्सिंग के आरोपों ने यूरोपीय फुटबॉल संघ, यूएफा की हालत खस्ता की. यूएफा ने जर्मन क्लब बार्यन म्यूनिख के खिलाफ लगे मैच फिक्सिंग के आरोपों की जांच शुरू की. बायर्न म्यूनिख ने जांचकर्ताओं पर मानहानि का मुकदमा ठोंका.

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विवादों में बायर्न म्यूनिख और यूरोपीय फुटबॉल संघ

आरोपों के मुताबिक 2008 में खेले गए यूएफा कप में मैच फिक्सिंग हुई. जर्मन टीम बायर्न म्यूनिख पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगाए गए हैं. कहा जा रहा है कि सेमीफाइनल में हारने के लिए बायर्न म्यूनिख को पैसा दिया गया था. सेमीफाइनल में बायर्न रूसी क्लब जेनित सेंट पीटर्सबर्ग से 5-1 से हार गया था. मामले का खुलासा एक जर्मन पत्रिका स्टैर्न ने किया.

बायर्न इन आरोपों से इनकार कर रहा है. क्लब ने आरोपों का खंडन करते हुए यूएफा के दो अधिकारियों पर मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया है. मुकदमे यूएफा के अनुशासन सेवाओं के प्रमुख पीटर लीमाखर और रॉबिन बोकसिक के खिलाफ दर्ज कराए गए हैं.

मैगजीन रिपोर्ट के मुताबिक बोकसिक ने लीमाखर को जांच के लिए सहमत किया. एक गुप्त व्यक्ति ने मामले की सूचना दी. रिपोर्ट कहती है कि इन आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ ने एक डोजियर तैयार किया है. फीफा के डोजियर में उस गुप्त व्यक्ति को कोनमान कहा गया है. लेकिन अब फुटबॉल संघ का कहना है कि उनके पास मैच फिक्सिंग का कोई सबूत नहीं है. जांच एक आरोप के आधार पर की जा रही है.

बढ़ते विवाद के बीच गुरुवार को यूएफा के अध्यक्ष मिचेल प्लातिनी ने बायर्न के अध्यक्ष कार्ल हाइन्ज रुमेनिगे मुलाकात की. दोनों पक्षों ने मुलाकात को 'खुली और सकारात्मक' बताया. आरोप लगाने वालों पर बरसते हुए रुमेनिगे ने कहा, ''हम कूल्हों से शॉट नहीं मार रहे थे. हम किसी को खेल और बार्यन की छवि पर कीचड़ नहीं उछालने देंगे.'' अब लीमाखर का भी कहना है कि उन्होंने बायर्न पर कभी ऐसे आरोप नहीं लगाए. वह यह तक कह रहे हैं कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

बोकसिक के हवाले से छापी गई रिपोर्ट में कुछ बेहद बड़े और संगीन आरोप भी हैं. फीफा के अध्यक्ष जोसेफ ब्लाटर पर भी एक अरब यूरो की रिश्वत लेने के आरोप लगाए हैं. बोकसिक के मुताबिक अब वह जांच में जर्मन इंटेलिजेंस एजेंसी की मदद कर रहे हैं. हालांकि बोकसिक के दावों पर शक भी जताया जा रहा है. स्टैर्न का कहना है कि बोकसिक सनसनी फैलाने वाले आरोप तो लगा देते हैं लेकिन कभी कोई ठोस सबूत नहीं देते हैं.

रिपोर्ट: एजेसियां/ओ सिंह

संपादन: उज्ज्वल भट्टाचार्य

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