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दुनिया

फालूजा में फंसे हैं हजारों मजबूर बच्चे

संयुक्त राष्ट्र बाल फंड ने बताया है कि इराक के फालूजा में जारी युद्ध में कम से कम 20,000 बच्चे अब भी फंसे हैं. यूएन ने बच्चों समेत सभी आम नागरिकों को वहां से निकालने के लिए 'सेफ कॉरिडोर' खोले जाने की मांग दोहराई है.

इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के इराक में प्रमुख गढ़ फालूजा में 20,000 से भी अधिक बच्चों के फंसे होने की आशंका है. इन बच्चों को तमाम कमियां झेलनी पड़ती हैं और इस्लामिक लड़ाके उन को अपने दल में शामिल करने के लिए दबाव डालते हैं. यूएन चिल्ड्रेन फंड की ओर से उनके इराक प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, "ये बच्चे जबरन लड़ाई में शामिल किए जाने का दबाव झेलते हैं, सुरक्षा जांच की कड़ी प्रक्रियाओं से गुजरते हैं और अपने परिवारों से दूर रखे जाते हैं."

इराकी सेना ने फालूजा में आईएस के खिलाफ 22-23 मई को आक्रमण कर दिया था. जो नागरिक वहां से भाग निकलने में कामयाब हुए हैं उन्होंने फालूजा में खाने-पानी की गंभीर कमी के बारे में बताया है. आईएस के अधिकार क्षेत्र से भाग निकले फालूजा के कुछ सौ परिवार शहर के बाहरी हिस्से में कैंपों में टिके हैं. जो अब भी शहर में फंसे हैं उन्होंने फोन पर बातचीत में और भी कठिन स्थिति में जीने की बात कही है.

यूनिसेफ ने नागरिकों के लिए 'सेफ कॉरिडोर' खोले जाने की मांग दोहराते हुए कहा है कि फालूजा के आम नागरिकों को वहां युद्ध के हालात से निकलने का मौका दिए जाने की जरूरत है. संयुक्त राष्ट्र ने आशंका जताई है कि आईएस अपने बचाव के लिए वहां के आम नागरिकों को मानव शील्ड बना कर इस्तेमाल कर सकता है.

अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना के हवाई हमलों और मुख्यतया शिया मिलिशिया से बनी पैरामिलिट्री फोर्स की मदद से इराकी सरकार ने एक हफ्ते से फालूजा को आईएस से छुड़ाने की मुहिम छेड़ रखी है. फालूजा पिछले दो सालों से आईएस के कब्जे में है. सुन्नी बहुल शहर फालूजा में करीब 50,000 लोगों के फंसे होने की आशंका है. राजधानी बगदाद से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर आईएस के नियंत्रण में आने वाले पहले कुछ प्रमुख इराकी शहरों में शामिल है.

इसके अलावा सुन्नी-मिलिशिया ने देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल में भी कब्जा जमाया हुआ है.

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