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विज्ञान

फर्जी मानव कंकाल की जांच

सौ साल पहले नकली हड्डियों के आधार पर पांच लाख साल पहले के इंसानों की "खोज" की जांच शुरू हो गई है. लंदन के विज्ञानी पता लगा रहे हैं कि इस फर्जी सिद्धांत के पीछे कौन लोग थे.

जांच के लिए लंदन में टीम बनाई गई है. 1912 के पिल्टडाउन मैन सिद्धांत आया था, जिसमें पांच लाख साल पुरानी हड्डियों के मिलने का दावा किया गया. पर बाद में पता चला कि बंदर के जबड़े में अलग से मानव खोपड़ी फिट करके स्वांग भरा गया. मामले का खुलासा 1953 में ही हो गया.

इस धोखाधड़ी को वैज्ञानिक 40 साल के समय की बर्बादी मानते हैं. इसके पीछे किन किन लोगों का हाथ था, यह पता लगाने के लिए लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में मानव जाति के उद्भव और विकास के विशेषज्ञ क्रिस स्ट्रिंगर की अध्यक्षता में 15 सदस्यों की टीम बनाई गई है.

धोखे से चेतावनी

विज्ञान की प्रतिष्ठित पत्रिका 'नेचर' में स्ट्रिंगर ने लिखा, "इस तरह की धोखाधड़ी चेतावनी देती है कि वैज्ञानिकों को अपनी रिसर्च के समय तर्क वितर्क नहीं छोड़ना चाहिए." साथ ही उन्होंने कहा, "दूसरी तरफ यह इस बात की तरफ भी इशारा करती है कि वैज्ञानिक तरीके कैसे पुराने हो जाते हैं और अपनी अहमियत खो देते हैं."

Neandertaler

निएंदरथाल कंकाल

कौन था फर्जी विज्ञानी

चार्ल्स डॉसन नाम के फर्जी विज्ञानी ने 48 साल की उम्र में पिल्टडाउन मैन का सिद्धांत दिया, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने पांच लाख साल पुराने कंकाल खोजे हैं. उस वक्त नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ने भी उनका डंका पीटा और कहा कि यह मानव उद्भव की दिशा में बड़ी खोज है.

ससेक्स में पैदा हुए डॉसन ने वकालत की पढ़ाई की थी और शौकिया तौर पर जीवाश्म जमा करते थे. उन्होंने जीवाश्मों में फर्जीवाड़ा करके कई पुराने कंकालों को खोज निकालने का दावा किया, जिसमें मानव के अलावा डायनासोर की एक प्रजाति और एक पौधा भी शामिल है.

बंदर और इंसान

पिल्टडाउन मैन के उस फर्जी कंकाल में इंसानी खोपड़ी में कपाल तो मानव का था लेकिन जबड़ा बंदर का, जिसके दांत इंसानों जैसे दिखते थे. आधुनिक विज्ञानियों का मानना है कि इंसानों के दांत और जबड़े दिमाग से पहले बदले.

जर्मनी और आस पास के देशों में 19वीं सदी में निएंदरथाल के कंकाल मिल रहे थे. निएंदरथाल आधुनिक मानव की बेहद करीबी प्रजाति मानी जाती है. इसी दौरान यूरोप के दूसरे हिस्सों में भी प्राचीन मानव के अवशेष मिल रहे थे. लेकिन ब्रिटेन में ऐसी कोई चीज नहीं मिल पाई थी. इसलिए शक के बावजूद ब्रिटिश विज्ञानियों ने 1912 की "खोज" को मान लिया.

इस पूरी धोखाधड़ी के लिए डॉसन को जिम्मेदार माना जा रहा है. खुद को बड़ा विज्ञानी साबित करने के चक्कर में उन्होंने ऐसा किया. उनकी दूसरी खोजों में भी धोखेबाजी पाई गई.

जांच के लिए तैयार टीम को पता लगाना है कि अगर यह सच है तो डॉसन के साथ और कौन लोग शामिल थे. जिन लोगों पर शक है, उनमें शरलॉक होम्स किरदार के जन्मदाता आर्थर कॉनन डॉयल भी हैं.

एसएम/एजेए (डीपीए)

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