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दुनिया

फर्जी डॉक्टरों के पीछे रूस

जब से जर्मनी के मंत्री और सांसद नकल के सामने आने के बाद अपना डॉक्टर टाइटिल खोने लगे हैं, रूस में भी नकली डॉक्टरों की खोज होने लगी है. कहते हैं कि रूस में कुछ सौ यूरो में टाइटिल खरीदा जा सकता है.

ठीक से काम किए बिना डॉक्टर की डिग्री चाहने वालों का जर्मनी में शिकार हो रहा है, और इसका असर अब रूस की राजनीति और शिक्षा संस्थानों पर भी पड़ रहा है. प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव ने हाल ही में माना है कि उनके देश में जाली, खरीदे हुए या नकली शोध प्रबंध के मामले सारी संभव सीमाएं पार कर चुके हैं. वे खुद डॉक्टरेट कर चुके कानूनविद हैं और विश्वविद्यालय में पढ़ाने का अनुभव भी रखते हैं. अब उन्होंने जर्मनी में शिक्षा मंत्री अनेटे शावान की डिग्री को अमान्य किए जाने के बाद चल रही बहस के सिलसिले में रूस में विज्ञान और शोध जगत की सफाई की मांग की है.

मॉस्को के जर्मनी विशेषज्ञ व्लादिस्लाव बेलोव कहते हैं कि पूर्व रक्षामंत्री कार्ल थियोडोर गुटेनबर्ग और शिक्षा मंत्री शावान के मामलों पर हंगामे ने रूस में भी बहुत से लोगों की आंखें खोल दी हैं, लेकिन फिलहाल धोखाधड़ी करने वालों को कोई डर नहीं सता रहा है. रूसी साइंस एकेडेमी में जर्मन शोध संस्थान के निदेशक कहते हैं, "हमारे यहां नागरिक समाज इतना मजबूत नहीं कि इस तरह की गलतियों के लिए सजा दी जा सके.

Russland Medwedew Brücke Eröffnung

कड़े कदमों का वादा

लेकिन यह हालत बहुत ज्यादा दिन तक नहीं रहेंगे. रूसी सरकार अब कदम उठाने जा रही है. प्रधानमंत्री मेदवेदेव ने सभी पीएचडी शोध ग्रंथों को इंटरनेट में प्रकाशित करने का सुझाव दिया है ताकि लोग उसे देख सकें और नकल का आसानी से पता चल सके. रूस में भी इस बीच नकल की जांच करने वाले लोग भी कम से कम प्रसिद्ध लोगों के शोध प्रबंधों की कड़ाई से जांच करने लगे हैं. खासकर उनकी नजरें रूस की सत्ताधारी पार्टी यूनाइटेड रशिया के सांसदों की थिसिस पर है.

रूसी शिक्षा मंत्री ने टेस्ट के तौर पर मॉस्को के राजकीय शिक्षा यूनिवर्सिटी के 25 थिसिस की जांच शुरू की है. उनमें से सिर्फ एक थिसिस शोध के नियमों पर खरा उतरता था. जो 24 थिसिस नकलबाजी के आधार पर लिखे गई थी उनमें से एक राजनीतिज्ञ आंद्रे आंद्रियानोव की भी थी. वे राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के भरोसे के आदमी हैं. नकल का पता चलने के बाद आंद्रियानोव ने प्रसिद्ध लोमोनोसोव यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया. ब्लॉगरों का ध्यान उन पर इसलिए गया कि चुनाव से पहले वे छात्रों के बीच सक्रिय थे.

उप शिक्षा मंत्री इगोर फेदयुकिन ने आश्वासन दिया है कि 25 थिसिसों की जांच में भारी पैमाने पर धांधली मिलने के बाद जांच आयोग अपना काम जारी रखेगा. लेकिन नेसाविसिमाया गजेटा अखबार का कहना है कि नामी शिक्षा संस्थानों और ऊंचे अधिकारियों की शायद ही कोई जांच करेगा. रूस में न तो जर्मनी जैसी विवाद और बहस की परंपरा है और न ही पकड़े जाने पर इस्तीफा देने की नैतिक परंपरा. लेकिन जर्मनी की ही तरह रूस में भी डॉक्टर टाइटिल को सरकारी नौकरी में करियर की पायदान चढ़ने की सीढ़ी माना जाता है. इसलिए मॉस्को और रूस के दूसरे शहरों में डिग्री का कारोबार धड़ल्ले से चलता है.

इस बीच तो हालत यह हो गई है कि मॉस्को में मेट्रो की ट्रेनों में रास्तों में हर तरह की डिग्री दिलाने वाले एजेंटों के टेलीफोन नंबर वाली पर्चियां चिपकी होती हैं. एजेंट या तो जाली डिग्री देते हैं या फिर भ्रष्ट कर्मचारियों की मदद से असली दिखने वाली नकली डिग्री दिलवाते हैं. विषय, थीम और विश्वविद्यालय आप चुनिए, डॉक्टरेट की डिग्री 36,000 रूबल में मिल जाएगी, जो करीब 63,000 रुपये के बराबर है. एक विज्ञापन में तो यहां तक कहा गया है कि पढ़ने में समय, दिमाग और पैसा लगाने की क्या जरूरत है. फर्जी डिग्री दिलवाने वाले मुफ्त में यह सलाह भी देते हैं कि विषय पर एक आर्टिकल पढ़ लें ताकि आप लोगों के साथ उस पर बात कर सकें.

एमजे/एएम (डीपीए)

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