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दुनिया

फंसे लोगों को अलेप्पो से निकालने में और देरी

सीरियाई शहर अलेप्पो में सरकारी सेना और विद्रोहियों के बीच फंसे आम लोगों को वहां से बाहर निकालने में कम से कम एक और दिन देरी होगी. रूस और तुर्की की पहल पर हुए युद्धविराम समझौते के बाद अलेप्पो में शांति की उम्मीद जगी थी.

विद्रोहियों के कब्जे वाले पूर्वी अलेप्पो से लोगों को सकुशल बाहर निकाले जाने की कार्रवाई बुधवार सुबह शुरु होनी थी लेकिन अब कम से कम गुरुवार तक शुरु ना हो पाने की आशंका है. विपक्ष इसके लिए ईरान और उसके शिया मिलिशिया को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जो राष्ट्रपति बशर अल असद के सहयोगी हैं. कारण यह माना जा रहा है कि चूंकि युद्धविराम और निकासी का समझौता रूस की पहल पर हुआ है इसीलिए ईरान इसे सफल नहीं होने देना चाहता.

विद्रोही लड़ाकों और सीरियाई सरकार के बीच युद्धविराम समझौता होने से पूर्वी अलेप्पो में हालात सुधरने की उम्मीद की जा रही थी. सीरियाई शासन के सबसे शक्तिशाली सहयोगी रूस और तुर्की ने शहर में सालों से चल रही आपसी लड़ाई रोकने पर सहमति बनाई और इसी से युद्धविराम समझौते का रास्ता साफ हुआ. इसे पिछले पांच सालों से चल रहे गृहयुद्ध में असद सरकार को मिली सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है.

असद समर्थक सेना से फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है कि लोगों को पूर्वी अलेप्पो से निकाले जाने की प्रक्रिया क्यों थम गई है. विद्रोही सेना के सूत्रों ने बताया है कि निकासी की योजना में देरी के बावजूद इलाके में युद्धविराम लागू है. पूर्वी अलेप्पो से समाचार एजेंसी रॉयटर्स से टेलिफोन पर बात करते हुए विद्रोही गुट नूर-अल-जिंकी के एक कमांडर ने बताया, "इस समझौते को रोकने में ईरान की जिद आड़े आ रही है. समझौता अपनी जगह है, युद्धविराम भी अब तक लागू है."

एक दिन पहले निकासी के समय को लेकर थोड़ी अस्पष्टता थी. असद समर्थक एक अधिकारी ने इसके सुबह 5 बजे शुरु होने की बात कही थी, तो वहीं विपक्ष उम्मीद जता रहा था कि घायल लोगों के पहले समूह को और पहले निकलने दिया जाएगा. लेकिन असल में किसी को भी निकलने नहीं दिया गया है. युद्ध की स्थिति पर नजर बनाए रखने वाले संगठन सीरियन ऑब्जर्वेटरी ने निकासी ना होने की पुष्टि करते हुए कहा, "निश्चित तौर पर इसमें देरी हो रही है."

पूर्वी अलेप्पो के लोगों ने शहर छोड़ने की तैयारी में अपना सामान बांध लिया था और अपने कई निजी दस्तावेजों को जला दिया था ताकि वो किसी सेना के हाथ ना लगे. दूसरी ओर, रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से सूचना दी गई है कि इस निकासी की योजना से अलग पिछले 24 घंटों में करीब 6,000 नागरिकों और 366 लड़ाकों ने अलेप्पो छोड़ा है.

इस निकासी की योजना तक पहुंचने से पहले करीब दो हफ्ते से पूर्वी अलेप्पो पर सीरियाई और उसकी सहयोगी सेनाओं के हमले तेज होने से विद्रोही शहर के एक बेहद छोटे इलाके में सिमट गए थे. विद्रोहियों के कब्जे वाले अलेप्पो पर असद के नियंत्रण में उनके सहयोगी रूस के हवाई हमलों और ईरान के शिया मिलिशिया की अहम भूमिका रही. दूसरी ओर, अमेरिका, तुर्की और खाड़ी देशों से समर्थन प्राप्त विद्रोही सेना असद समर्थक सैनिक शक्ति के सामने नहीं टिक सकी. विश्व भर में अलेप्पो की स्थिति पर चिंता जताई जाती रही है. दो हफ्ते पहले तक पूर्वी अलेप्पो में करीब 250,000 नागरिकों के फंसे होने का अनुमान था, जब सरकारी सेनाओं ने उन पर हमले तेज किए थे. इसके पहले कई लाख लोग शहर के इस हिस्से में अपने घरों को खाली कर के दूसरी जगहों पर शरण लेने जा चुके हैं.

आरपी/एमजे (रॉयटर्स, डीपीए)

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