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विज्ञान

प्लास्टिक के अनोखे घर

कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद जब आप बोतल फेंक देते हैं, तो क्या कभी सोचते हैं कि इसे गलने में कितना वक्त लगेगा? प्लास्टिक की एक बोतल गलने में कम से कम 450 साल लेती है. कैसा हो अगर आपका पूरा घर ही प्लास्टिक का बन जाए.

क्या घर भी भला प्लास्टिक की बोतलों से बन सकते हैं? यह बात सुनने में तो अजीब लगती ही है, लेकिन मेक्सिको से ले कर अफ्रीका तक ये घर लोकप्रिय हो रहे हैं. मेक्सिको जैसे खूबसूरत देश में भी कई जगह कूड़े के ढेर नजर आते हैं.

कूड़े के पहाड़ों में से दोबारा इस्तेमाल होने के लायक प्लास्टिक की थैलियां या बोतलें जमा करना मुश्किल काम है. लेकिन किसी तरह कूड़े में से प्लास्टिक को छांट कर अलग कर लिया जाता है और फिर उन्हें पिघला कर प्लास्टिक की दूसरी चीजें बनाई जाती हैं. 

सस्ते और टिकाऊ घर

मेक्सिको की कंपनी क्वाड्रो इको सॉल्यूशंस कूड़े से जमा हुए प्लास्टिक से प्लेट बनाती है. कंपनी के सीईओ रेमोन मार्टिन बताते हैं कि यह प्लास्टिक लकड़ी, धातु या फिर कंक्रीट की जगह इस्तेमाल हो सकते हैं. अगर इन प्लेटों से घर बनाया जाए तो 18 वर्ग फीट का घर बनाने के लिए करीब डेढ़ टन प्लास्टिक के कू़ड़े की जरूरत होगी, "हमारा लक्ष्य ऐसे सामान बनाना है जो आज की जरूरतें पूरी कर सकें. समाज के निचले तबके के लिए घर बनाना भी इसमें शामिल है क्योंकि उन्हें ऐसे घर पहले नहीं मिले." इस प्लास्टिक से 55 वर्ग मीटर का घर बनाने में करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है जो पारंपरिक तरीके से बनने वाले घर का महज एक चौथाई है.

ऐसा नहीं कि प्लास्टिक के घर मेक्सिको में ही बन रहे हैं. पहली बार इस तरह के घर देखने को मिले अफ्रीका के नाइजीरिया में. लेकिन वहां प्लास्टिक को पिघलाया नहीं गया, बल्कि बोतलों को ज्यूं का त्यूं इस्तेमाल में लाया गया. प्लास्टिक की खाली बोतलों को बालू या राख से भरकर एक दूसरे के ऊपर जमा कर दिया जाता है और फिर गारे से चुन दिया जाता है. इस ढांचे को नाइलॉन की रस्सी से पक्का किया जाता है ताकि वह गिरे नहीं. यह अनोखा विचार था जर्मनी के आंद्रेयास फ्रोएजे का, जो प्लास्टिक से होने वाली पर्यावरण समस्या को दूर करना चाहते थे. इस तरह के घर पर्यावरण की रक्षा तो कर ही रहे हैं, साथ ही गरीब लोगों के लिए भी सस्ते विकल्प बन कर उभर रहे हैं.

Symbolbild Energieeffizienz Haus

प्लास्टिक से 55 वर्ग मीटर का घर बनाने में करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है.

भूकंप भी बेअसर

फ्रोएजे की कंपनी इको-टेक ने दुनिया भर में प्लास्टिक के जो घर बनाए हैं, वे 7.3 की तीव्रता वाले भूकंप को भी झेलने में सफल रहे हैं. फ्रोएजे का कहना है कि प्लास्टिक की बोतल सामान्य ईंट से ज्यादा बोझ और धक्का सह सकती है. 2010 में फ्रोएजे इस योजना को अफ्रीका ले कर पहुंचे. उगांडा में उन्होंने पानी का एक टैंक बनाया और नाइजीरिया में अक्षय उर्जा संस्थान के साथ एक परियोजना शुरू की. कादूना में बना प्लास्टिक की बोतलों वाला अफ्रीका का पहला घर. घर बनाने के लिए बोतलें होटलों, दूतावासों और अन्य घरों से जमा की गईं. प्लास्टिक के इन घरों में बिजली सौर ऊर्जा से बनती है. पानी के निकास के लिए इन घरों में एक अलग ही तरीके का इस्तेमाल हो रहा है. साथ ही यहां पीने का पानी साफ करने की मशीन भी लगाई गयी है.

युवाओं का साथ

इस प्रोजेक्ट का फायदा अफ्रीका के युवाओं को भी मिला है. नाइजीरिया में युवा बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है. इस प्रोजेक्ट से युवाओं को हिंसा से दूर रखने में मदद मिली है. निर्माण के काम के लिए कई युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया. घरों के साथ साथ प्लास्टिक की बोतलों से स्कूल की इमारतें भी तैयार की गयी है. ईंट गारे के मकानों की तुलना में प्लास्टिक से घर बनाना सस्ता है. पर्यावरण और विकास को ध्यान में रखते हुए कई प्रायोजक भी इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़े हैं. साथ ही पिछले कुछ सालों में नाइजीरिया की सरकार भी मदद के लिए सामने आई है.

रिपोर्ट: ईशा भाटिया

संपादन: महेश झा

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