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मंथन

प्लाज्मा से इलाज

ऐसे कई घाव होते हैं जो जल्दी नहीं भरते, ऐसा अक्सर बैक्टीरिया के कारण होता है. क्रीम लगाने या एंटीबायोटिक दवाएं खाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता.

म्यूनिख के त्वचा रोग विशेषज्ञ गेऑर्ग इसबारी इलाज के लिए एक इस उपकरण का इस्तेमाल करते हैं. इस मशीन में छह इलेक्ट्रोड मिल कर प्लाज्मा बनाते हैं. इससे गर्म हवा के साथ आवेशित कण सीधे घाव पर पड़ते हैं. गेऑर्ग इसबारी कहते हैं, "प्लाज्मा गैस जैसी अवस्था को कहते हैं. इसलिए क्रीम की तुलना में यह बहुत ही छोटे हिस्से पर भी काम करता है. यानि हम उन बैक्टीरिया को भी मार सकते हैं जो बिलकुल छोटे से हिस्से में हैं. प्लाज्मा इलाज की खासियत है कि बैक्टीरिया पर कई तरफ से हमला होता है."

अंतरिक्ष में प्रयोग

गार्शिंग में माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल फिजिक्स विभाग में ये प्लाज्मा तकनीक बनाई गई. कई साल से भौतिकशास्त्री यहां कृत्रिम प्लाज्मा बना रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर शोध के लिए काम आता है. वैज्ञानिक वहां देखते हैं कि प्लास्टिक के कण आवेशित होने पर किस तरह का व्यवहार करते हैं. इसी प्रयोग के दौरान उन्हें प्लाज्मा का साइड इफेक्ट पता चला कि वो जबरदस्त कीटाणुनाशक है. तब से इंस्टीट्यूट में तरह तरह के प्लाज्मा उपकरणों पर प्रयोग हो रहा है. 30 सेकंड तक एक बैक्टीरिया कल्चर पर ये किरणें डाली जाती हैं. रात भर नतीजे का इंतजार किया जाता है.

अगले दिन नतीजा साफ है, प्लाज्मा ने सभी बैक्टीरिया कोशिकाओं को नष्ट कर दिया. सिर्फ कोने पर कुछ कॉलोनियां बचीं. उम्मीद की जा रही है कि यह उपकरण 100 यूरो यानि करीब साढ़े आठ हजार रुपये में मिलने लगे. इंस्टिट्यूट की ही युलिया जिमरमान कहती हैं, "कोशिश की जा रही है कि इस उपकरण को त्वचा की बीमारियों, जैसे कील मुहांसों और दाद खाज के इलाज में इस्तेमाल किया जाए. इस्तेमाल बिलकुल आसान है. इसे त्वचा पर रखें और प्लाज्मा ऑन कर दें. कुछ सेकंड बाद त्वचा या घाव के सारे बैक्टीरिया खत्म."

कीटाणु खत्म करने की तरकीब

आगे चल कर शोधकर्ता इलेक्ट्रोड की जाली बना कर ऐसे उपकरण तैयार करना चाहते हैं जो सब कुछ डिसइन्फेक्ट कर दे. चाहे खाना हो या ऑपरेशन टेबल. सिर्फ अंधेरे में ही प्लाज्मा देखा जा सकता है. आवेशित कण हवा से मिली ऑक्सीजन के कारण गहरे बैंगनी रंग के दिखाई देते हैं. ये डिसइन्फेक्ट करते हैं. जिमरमान कहती हैं, "ये उपकरण ठंडा प्लाज्मा बनाता है. यानि एक गैस जो आयोनाइज्ड है. आप बस हाथ अंदर डालें और फिर गैस पूरे हाथ, नाखून के नीचे बाजू में सब डिसइन्फेक्ट कर देती है. फिर त्वचा पर चाहे बैक्टीरिया हो या वायरस, सब खत्म."

श्वाबिंग के क्लीनिक में इस तरह के उपकरण काफी पसंद किए जा रहे हैं क्योंकि दुनिया भर के अस्पतालों में सुपरबग का बोलबाला है. ये उपकरण अस्पताल में यहां वहां से फैलने वाले इन्फेक्शन के लिए बढ़िया इलाज हो सकता है.

रिपोर्टः सारा सीरुल/एएम

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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