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विज्ञान

प्राकृतिक आपदा के पहले एसएमएस

दुनिया के कई विकसित देशों में मोबाइल से भेजे जाने वाले एसएमएस का दौर भले ही खत्म हो रहा हो लेकिन अफ्रीका के बाढ़ क्षेत्र के गांवों में लोगों की जान बचाने के काम में यह महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों में मोबाइल फोन की बढ़ती पहुंच प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जैसी तरकीब बन गई है. जल्द ही इसका इस्तेमाल मोबाइल फोन ग्राहकों को बाढ़ या तूफान जैसी प्राकृतिक आपदा के बारे में चेतावनी देने के लिए किया जा सकता है. अफ्रीका में लाखों लोगों के पास टेलीविजन, रेडियो और इंटरनेट तक सीमित पहुंच हैं लेकिन मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. दूरदराज के गांवों में बाढ़ का खतरा बना रहता है. अब स्पेन की मोबाइल कंपनी एनविया ने गोआर्ड योजना तैयार की है. यह तकनीक जिओ टार्गेटेड अलर्ट पर आधारित है जो विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र को टेक्स्ट संदेश भेजती है.

बाढ़ से बचाएगा एसएमएस

DW.COM

सैटेलाइट नेटवर्क और मौसम केंद्र, खतरे का पता लगाने के बाद 15 मिनट के भीतर गांव वालों को मोबाइल पर संदेश भेजे सकते हैं. उम्मीद है कि गांव वालों इस समय का इस्तेमाल करते हुए अपनी जान बचा पाएंगे. अफ्रीका में एनविया के मैनेजर अल्बर्टो पेरेज कहते हैं, "तकनीक एक निश्चित क्षेत्र में सभी सक्रिय मोबाइल फोन की पहचान करने में सक्षम है. जैसे शॉपिंग मॉल, गांव या फिर पार्क और इसके बाद सीधे मोबाइल पर संदेश भेजे जा सकते हैं. इसी प्रणाली के तहत हम लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं जिससे जान बचाई जा सकती है और नुकसान को कम किया जा सकता है."

इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल विज्ञापन के उद्देश्य से दुनिया के कई हिस्सों में हो रहा है. उदाहरण के लिए खास तरह के शॉपिंग केंद्रों से विशेष ऑफर के साथ ग्राहकों पर इस तरह के संदेशों की बरसात हो रही है. अंतरराष्ट्रीय संचार संघ का अनुमान है कि मोबाइल फोन की पहुंच अफ्रीकी महाद्वीप में 63 फीसदी हो गई है. दक्षिण अफ्रीका में यह कहीं ज्यादा है.

पेरेज बताते हैं, "अफ्रीका में, खासकर गरीब इलाकों में आबादी के पास रेडियो, इंटरनेट या टेलीविजन तक पहुंच सीमित है. लेकिन हर किसी के पास मोबाइल फोन है. इसलिए यह प्लेटफॉर्म इस महाद्वीप में लाभकारी साबित हो सकता है."

उम्मीद है कि साल के आखिर में केन्या में इसका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा. केन्या में यह सेवा एयरटेल, वोडाफोन, ऑरेन्ज, एमटीएन और सेल-सी जैसे सभी नेटवर्कों पर मिल सकेगी. पेरेज का कहना है कि यह सेवा लोगों के लिए मुफ्त होगी लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि सरकार को इसके लिए कितना खर्च उठाना पड़ेगा या फिर इसे किस तरह से प्रायोजित किया जाएगा.

एए/ओएसजे (एएफपी)

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