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जर्मन चुनाव

प्रभाकरन हमारा दुश्मन नहीं थाः चिदंबरम

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि लिट्टे नेता प्रभाकरन भारत का दुश्मन नहीं था. अगर वह 1987 में राजीव गांधी के भारत-श्रीलंका समझौते को स्वीकार कर लेता तो वह श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी राज्यों का बेताज बादशाह होता.

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प्रभाकरन को दुश्मन नहीं मानते चिदंबरम

शनिवार रात चिदंबरम तमिलनाडु के विरुधुनगर शहर में एक जनसभा में बोल रहे थे. रैली में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री कामराज की 108वीं जयंती मनाई जा रही थी. चिदंबरम ने कहा कि वह प्रभाकरन से मिले थे और घंटों बातें की थीं. गृह मंत्री कहते हैं, “वह हमारा दुश्मन नहीं था. बस हम उस रास्ते के खिलाफ थे जो उसने चुना था.”

विरुधुनगर एमडीएमके नेता वाइको का चुनाव क्षेत्र है. वाइको लिट्टे के कट्टर समर्थक हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के माणिक टैगोर ने 15 हजार वोटों से हराया था.

वाइको के इलाके में बोलते हुए चिदंबरम ने कहा कि किसी भी देश की तरक्की के लिए सबसे पहली जरूरत शांति होती है. दंगों और हिंसा के जरिए देश की तरक्की नहीं हो सकती. चिदंबरम ने दावा किया कि अब श्रीलंका में शांति लौट आई है. उन्होंने कहा कि भारत ने विस्थापित तमिलों की मदद के लिए 3,600 करोड़ रुपये दिए हैं. इसके अलावा उत्तरी श्रीलंका में 50 हजार घर बनाने के लिए भी एक हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं. चिदंबरम ने बताया कि पलाली एयरपोर्ट और कांगेसंथुराई बंदरगाह के पुनर्निर्माण के लिए भी काम किया जा रहा है.

भारतीय गृह मंत्री को यकीन है कि दो साल में ढाई लाख विस्थापित तमिलों को घर मिल जाएंगे.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार