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दुनिया

प्रधानमंत्री मोदी की तथाकथित गौरक्षकों को चेतावनी

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गौहत्या के शक में मुसलमानों पर हमला करने वाले तथाकथित गौरक्षकों की निंदा की है. उनकी यह टिप्पणी देश भर के कई शहरों में मॉब लिंचिंग के विरोध में हुए प्रदर्शनों के एक दिन बाद ही आयी है.

अपने गुजरात दौरे पर महात्मा गांधी के पूर्व निवास साबरमती आश्रम से बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि गायों की रक्षा के नाम पर किसी की भी हत्या अस्वीकार्य है. उन्होंने कहा कि देश में किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह कानून अपने हाथ में ले. उन्होंने कहा, "गौभक्ति के नाम पर हो रही हत्याएं स्वीकार्य नहीं है. यह ऐसी चीज नहीं है जिससे महात्मा गांधी सहमत होते." गौरक्षा पर बयान देते हुए मोदी ने कहा, "हम कैसे लोग हैं गाय के नाम पर इंसान को मारते हैं." 

प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं. वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने प्रधानमंत्री के बयान का स्वागत करते हुए ट्वीट किया कि अब इस संबंध में ठोस कदम उठाते हुए सभी राज्यों में दिशा निर्देश जारी किये जाने चाहिए.

एक हफ्ते पहले ही हरियाणा के बल्लभगढ़ में ट्रेन में गौमांस ले जाने के आरोप में जुनैद नामके एक युवक की पीट पीटकर हत्या कर दी गयी थी. भारतीय हिंदुओं में गाय को पवित्र माना जाता है और कई राज्यों में गौहत्या और गौमांस की बिक्री पर प्रतिबंध है. 2014 में हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से देश में मुसलमानों और दलितों की तथाकथित गौरक्षा समूहों द्वारा मारपीट और हत्या की घटनाएं बढ़ी हैं. ऐसे कई भारतीय समुदायों के लिए गोमांस और भैंस का मांस मुख्य भोजन का हिस्सा रहा है.

यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने तथाकथित गौरक्षकों की निंदा की हो. पिछले साल अगस्त में भी मोदी ने कथित गौरक्षकों की आलोचना करते हुए धर्म के नाम पर अपराध करने वाले समूहों के खिलाफ कार्यवाही की बात की थी. लेकिन गौहत्या और गौमांस खाने के शक में मुसलमानों को निशाना बनाये जाने की घटनाएं तब भी जारी रहीं. हाल ही में जुनैद खान हत्याकांड के बाद हजारों भारतीयों ने सड़कों पर उतर कर "नॉट इन माई नेम" नारे के साथ मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

इस मामले पर एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारत के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने कहा कि जिस तरह से मुसलमानों के खिलाफ लगातार हमले बढ़ रहे हैं और आरोपी बिना किसी सजा के आजाद हैं, वह डरावना है. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि अप्रैल माह से अब तक घृणा अपराध के तहत कम से कम 10 मुसलमानों की या तो हत्या कर दी गयी है या भीड़ ने उन्हें पीट पीट कर मार डाला है.

इन तथाकथित गौरक्षा समूहों के जगह जगह अंजाम दिये गये अपराधों में कई समानताएं हैं. ये समूह देश के कई राज्यों में हाइवे पर जानवरों की जांच करते हुए घूमते हैं. इसी साल अप्रैल में राजस्थान में एक मुसलमान व्यक्ति की भीड़ ने पीट कर हत्या कर दी थी. मृतक एक डेयरी किसान था, जो ट्रक में अपनी दुधारू गायों को ले जा रहा था. एक महीने बाद ही दो मुसलमानों को गाय की चोरी के शक में पीट पीट कर मार डाला गया. इन दोनों ही मामलों में पुलिस पर आरोप लगा कि उन्होंने पीड़ितों को बचाने में देरी की. राजस्थान के हमले में 200 गौरक्षक ट्रक पर टूट पड़े थे. पुलिस ने आरोपियों पर मामला दर्ज करने के बजाय 11 लोगों पर परमिट न होने से जुड़े मामले दर्ज किये थे.

एसएस/आरपी (डीपीए, एएफपी)

 

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