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दुनिया

प्रधानमंत्री ने कहा, घर से ही काम करो

जापान में कई कंपनियां अपने कर्मचारियों से एक दिन घर पर रहकर काम करने को कह रही हैं. प्रधानमंत्री की अपील के बाद देश की कार्य संस्कृति बदलती दिख रही है.

जापान में युवाओं की आबादी घट रही है. कर्मचारी दफ्तरों में कई घंटे बिताते हैं, लेकिन उनकी उत्पादक क्षमता बहुत बेहतर नहीं है. दफ्तर में फेसटाइम और सीनियरिटी आधारित सिस्टम होना जापान में बेहद आम है. हाल ही में जापान की सबसे बड़ी विज्ञापन कंपनी के एक कर्मचारी की अत्यधिक काम के चलते मौत हो गई. वहीं कामकाजी मां बाप के बच्चों की देखभाल भी एक बड़ी चुनौती है. कुल मिलाकर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के सामने मुश्किलों का अंबार है. ऐसे में प्रधानमंत्री ने देश के कॉरपोरेट कल्चर को बदलने की अपील की. प्रधानमंत्री ने कंपनियों से अपील करते हुए कहा कि वे थोड़ी नरमी दिखाएं और कर्मचारियों को दफ्तर से दूर बैठकर भी काम करने का मौका दें.

आबे की अपील का असर होता दिख रहा है. ज्यादा से ज्यादा कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को होम ऑफिस (घर से काम करने) या फिर रिमोट वर्क का विकल्प देने लगी हैं. टोक्यो की सोफिया यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट की प्रोफेसर पारिसा हाघिरियान कहती हैं, "सरकार इस बारे में काफी गंभीर है. समस्या यह है कि कंपनियों में कुछ परंपराएं हैं और वे इन पंरपराओं को जारी रखना चाहती हैं. टेलिकम्युटिंग जापान में लोकप्रिय नहीं है. जापानियों को दफ्तर जाकर काम करना ज्यादा पंसद है."

प्रधानमंत्री आबे के आर्थिक सुधारों के ब्लूप्रिंट को आबेनोमिक्स भी कहा जा रहा है. अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो 2020 तक जापान में 10 फीसदी से अधिक कर्मचारी हफ्ते में एक दिन घर से काम करेंगे. फिलहाल होम ऑफिस करने वालों की संख्या चार फीसदी है. सरकार के मुताबिक 2014 में 11.4 फीसदी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ऐसा विकल्प दिया, वहीं 2015 में यह संख्या बढ़कर 16.2 फीसदी हो गई.

कंपनियों का कहना है कि घर से काम करने पर कर्मचारियों का समय भी बचता है. हालांकि फिलहाल करीब 5 फीसदी कर्मचारी ही इसका फायदा उठा रहे हैं. गैलप पोल के मुताबिक अमेरिका में 43 फीसदी कर्मचारी रिमोट वर्क विकल्प का इस्तेमाल कर रहे हैं. अमेरिका में अक्सर लोग कैफे में बैठकर लैपटॉप पर काम करते हुए दिख जाते हैं. वहीं जापान के कई कैफेज में आज भी मुफ्त वाई फाई सुविधा नहीं है.

जापान में 2020 में ओलंपिक खेल भी होने हैं. सरकार को लगता है कि होम ऑफिस को बढ़ावा देकर वह ट्रैफिक और भीड़ भाड़ की समस्या से भी निजात पा सकेगी.

(जापानी तकनीक का 'उगता सूर्य' )

ओएसजे/एमजे (एएफपी)

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