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विज्ञान

प्रदूषण से एक चौथाई मौतें

विकासशील देशों में एक चौथाई मौत प्रदूषण की वजह से है. पर्यावरण पर नजर रखने वाली संस्थाओं के मुताबिक एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे महाद्वीपों में कई जगह हालत बहुत बुरी है. रिपोर्ट ने भारत के कदमों की तारीफ की है.

पर्यावरण संस्था ग्रीन क्रॉस और ब्लैकस्मिथ इंस्टीट्यूट की नई रिपोर्ट के मुताबिक गरीब देशों में 20 करोड़ लोगों की जिंदगी प्रदूषण के कारण जोखिम में है. संगठनों ने दुनिया के 10 सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाकों की सूची तैयार की है. ये इलाके अर्जेंटीना, बांग्लादेश, घाना, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, रूस, यूक्रेन और जाम्बिया में हैं.

रिपोर्ट ने पानी में घुलते पारे को और हवा में घुलती जहरीली गैसों को खास तौर पर मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया है. इन देशों में मलेरिया और टीबी जैसी बीमारियां भी बढ़ी हैं. ग्रीन क्रॉस के विशेषज्ञ स्टीफन रॉबिन्सन कहते हैं, प्रदूषण एक वैश्विक दिक्कत है और हमें "जल्द से जल्द इस बारे में कार्रवाई करनी होगी."

ग्रीन क्रॉस का कहना है कि प्रदूषण के मामले में भारत ने बीते सालों में सकारात्मक कदम उठाए हैं. 2006 और 2007 की सूची में टॉप 10 प्रदूषित जगहों में भारत के रानीपेट और सुकिंदा थे. उड़ीसा के सुकिंदा में क्रोमाइट का भंडार है. काफी वक्त तक यहां से निकलने वाला जहरीला कचरा सीधे नालों के जरिए नदी में डाल दिया जाता था. 2007 की रिपोर्ट के मुताबिक खदान वाले इलाके में 84 और आस पास गांवों में 86 फीसदी मौतें क्रोमाइट खनन के दौरान हुए प्रदूषण से हुई.

चेन्नई से 100 किलोमीटर दूर रानीपेट में बड़े पैमाने पर सोडियम क्रोमेट, क्रोमियम लवण और क्रोमियम सल्फेट बनाया जाता है. इस रसायनों से चमड़े की सफाई की जाती है, उसे सुखाया और गहरा रंग दिया जाता है. तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक बीते दो दशकों में यहां की फैक्ट्रियों ने डेढ़ लाख टन ठोस रसायनिक कचरा खुले में फेंका. देखते देखते एक बड़े मैदान में कचरे का दो मीटर ऊंचा ढेर बन गया और जहरीले रसायन पानी के घुल गए. इससे नदियां भी गंदी हुई और भूजल भी दूषित हुआ. फैक्ट्रियों के आस पास के एक किलोमीटर के इलाके में भूजल में क्लोरियम की मात्रा अथाह बढ़ गई. हालांकि 2007 की रिपोर्ट के बाद भारत में केंद्र और राज्य सरकारों ने इन इलाकों में बढ़िया कदम उठाए.

2013 की रिपोर्ट में भारत के कदमों पर खास तौर पर जोर देते हुए कहा गया है, "ब्लैकस्मिथ और ग्रीन क्रॉस ने जिन देशों में काम किया है उन सब में भारत ने प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे बढ़िया काम किया है. इसमें खोज और कार्रवाई दोनों शामिल हैं. भारत सरकार ने एक जुलाई 2010 से कोयले की सभी खदानों में क्लीन एनर्जी सेस या कोयला टैक्स लगाने का एलान किया. ये राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा फंड का हिस्सा है, इसमें पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दे आते हैं, जैसे कार्बन फुटप्रिंट कम करना, दूषित जगहों को स्वस्थ बनाना. फंड करीब 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक का हो सकता है, इसके जरिए भारत अगले दशक में इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति कर सकता है. ब्लैकस्मिथ और ग्रीन क्रॉस लगातार उठाए जा रहे कदमों पर लगातार रिपोर्ट देते रहेंगे."

ओएसजे/एनआर (डीपीए)

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