1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

प्रदूषण के चलते भारत और चीन में हुई 22 लाख मौतें

पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण से होने वाली आधी से अधिक मौतें भारत और चीन में होती हैं. एक अध्ययन के मुताबिक साल 2015 में इन दोनों देशों में करीब 22 लाख मौतें वायु प्रदूषण के चलते हुईं.

अमेरिकी संस्थान हेल्थ इफैक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचइआई) के शोध मुताबिक दुनिया भर में वायु प्रदूषण के चलते साल 2015 में तकरीबन 42 लाख लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी. इस अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण दुनिया में मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण है. चीन और भारत में ही इस दौरान वायु प्रदूषण से करीब 22 लाख मारे गए.

इंस्टीट्यूट ने अपना ऑनलाइन डाटाबेस भी लॉन्च किया है. इस डाटाबेस में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की गई है. संस्थान के मुताबिक दुनिया की करीब 92 फीसदी आबादी प्रदूषित हवा में सांस ले रही है. 

वायु प्रदूषण से कैंसर, दिल की बीमारियां और सांस संबंधी बीमारियां का खतरा बना रहता है. विश्व के अधिकतम आबादी वाले चीन और भारत में जहरीली हवा के चलते करीब 11-11 लाख मौतें हुई हैं.

अध्ययन मुताबिक चीन अब इस दिशा में कदम उठा रहा है और कार्रवाई भी कर रहा है. लेकिन भारत में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. एचइआई के अध्यक्ष डेन ग्रीनबॉम ने कहा कि तमाम सबूतों के बावजूद भारत के कई मंत्री अब भी यही कहते हैं कि वायु प्रदूषण और मृत्यु दर के बीच कोई संबंध नहीं है.

हालांकि चीन प्रशासन भी वायु प्रदूषण और इन मौतों के बीच किसी सीधे संबंध से इनकार करता है. चीन के स्वास्थय मंत्री ने कहा था कि ऐसा कोई डाटा नहीं है जिससे यह साबित होता है कि स्मॉग और कैंसर के बढ़ते मामलों में कोई संबंध है. पिछले महीने मीडिया से बातचीत में एक मंत्री ने कहा था कि स्मॉग से मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों के नतीजे निकालना जल्दबाजी होगा क्योंकि इसका मानव शरीर पर दीर्घकालिक असर पड़ता है. 

एए/ओएसजे (रॉयटर्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री