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जर्मन चुनाव

प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रही हैं राबड़ी

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के गढ़ सारण लोकसभा सीट पर उनकी पत्नी प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रही हैं. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी मोदी लहर के साथ नीतीश सरकार के सुशासन की चुनौती से भी जूझ रही हैं.

सारण क्षेत्र से चार बार लोकसभा सदस्य चुने गये लालू यादव चारा घोटाले के एक मामले में सजायाफ्ता होने के कारण इस बार चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. इस सीट पर अपना प्रभाव कायम रखने के लिए लालू ने अपनी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पहली बार लोकसभा चुनाव में उतारा है. यह चुनाव राबड़ी देवी के लिए न सिर्फ अपनी बल्कि अपने पति और पार्टी की प्रतिष्ठा के लिए भी अहम है.

यह सीट भारतीय जनता पार्टी और विकास तथा सुशासन के नाम पर अलग छवि बनाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भी प्रतिष्ठा की सीट है. भाजपा ने इसी क्षेत्र से दो बार सांसद रहे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं जनता दल यूनाइटेड जदयू की ओर से विधान परिषद के उप सभापति सलीम परवेज मैदान में हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में लालू यादव सारण के साथ ही पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे. सारण में कांटे के मुकाबले में वे राजीव प्रताप रूडी से 51815 मतों से जीते लेकिन पाटलिपुत्र में वह अपने पुराने दोस्त और जदयू के रंजन प्रसाद यादव से चुनाव हार गये थे. इस बार लालू यादव खुद चुनाव नहीं लड़ सकते थे. इसलिए उन्होंने राबड़ी देवी को सारण और पुत्री मीसा भारती को पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया. मीसा भारती की भी लड़ाई आसान नहीं रही. उनका मुकाबला यादव के बेहद करीबी रहे भाजपा उम्मीदवार रामकृपाल यादव से है. पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में चुनाव खत्म होने के बाद जीत के प्रति पूरी तरह से आस्वश्त नहीं होने के कारण सारण का चुनाव राजद परिवार के लिए बेहद अहम हो गया है.

वर्ष 1952 से लेकर अब तक हुए सभी चुनावों में इस लोकसभा क्षेत्र पर यादव और राजपूत जातियों का ही दबदबा रहा है. 1971 तक यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार ही विजयी होते रहे, लेकिन 1977 में पहली बार जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लालू यादव ने 1962 से लगातार कांग्रेस के सांसद रहे रामशेखर प्रसाद सिंह को तीन लाख 73 हजार 800 मतों के बड़े अंतर पराजित किया. तब से इस क्षेत्र में कांग्रेस का अस्तित्व मिट गया.

1980 के लोकसभा चुनाव में यादव लोकदल के टिकट पर लड़े लेकिन हार गए. 1984 में लालू यादव तीसरे नम्बर पर चले गए. 1996 और 1999 में यह सीट भाजपा के राजीव प्रताप रूडी ने जीती. 2004 और 2009 के चुनाव में लालू यादव तथा रूडी के बीच फिर मुकाबला हुआ लेकिन दोनों चुनावों में यादव की जीत हुई.

इस बार का चुनाव भी राजपूत और यादव जातियों के इर्द गिर्द ही घूमता नजर आ रहा है. राबड़ी देवी को अपने आधार वोट को एकजुट रखने के साथ जदयू प्रत्याशी सलीम परवेज से अपने मतों को बचाने की भी चुनौती है. वहीं भाजपा प्रत्याशी भी अपनी जाति के वोटों को गोलबंद करने के साथ ही नमो लहर के जरिए अन्य जातियों के वोट को जुटाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं.

जदयू के सलीम परवेज अपनी स्वच्छ छवि और नीतीश कुमार के विकास कार्यो के सहारे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे. इस क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के बालमुकुंद चौहान और आम आदमी पार्टी के परमात्मा सिंह समेत 11 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इस क्षेत्र में जीत की अहमियत को समझते हुये तीनों प्रमुख पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. राबड़ी देवी की जीत पक्की करने के लिये उनकी पुत्री तथा पुत्र सारण में डेरा डाले हुए हैं जबकि लालू यादव अन्य क्षेत्रों में प्रचार कर लौटने के बाद देर रात तक अपने समर्थकों के साथ इलाके का भ्रमण कर रहे हैं.

भाजपा उम्मीदवार के लिये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी, लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के वरिष्ठ नेता सैय्यद शाहनवाज हुसैन और रवि शंकर प्रसाद समेत कई वरिष्ठ नेताओं की चुनावी सभाएं हो चुकी हैं. जदयू प्रत्याशी के लिये नीतीश कुमार और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव समेत अन्य वरिष्ठ नेता चुनावी सभा कर वोट मांग रहे हैं.

सारण संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले छह विधानसभा क्षेत्रों में से तीन पर भाजपा, दो पर जदयू और एक पर राजद का कब्जा है. इस संसदीय क्षेत्र के लिए सात मई को मतदान होना है.

एमजे/आईबी (वार्ता)

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